5 अक्टूबर 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट ने परवेश वर्मा, कपिल मिश्रा के खिलाफ भड़काऊ भाषण याचिकाएँ खारिज कीं

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दिल्ली हाईकोर्ट ने परवेश वर्मा, कपिल मिश्रा के खिलाफ भड़काऊ भाषण याचिकाएँ खारिज कीं

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर 2026 को परवेश वर्मा और कपिल मिश्रा के खिलाफ भड़काऊ भाषण पर FIR की माँग वाली याचिकाएँ खारिज कीं। दंगों में पुलिस की SIT जाँच और विपक्षी नेताओं पर मुकदमे की माँग भी अदालत ने ठुकराई।

मुख्य बातें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 5 अक्टूबर 2026 को परवेश वर्मा और कपिल मिश्रा के खिलाफ भड़काऊ भाषण मामले में दाखिल याचिकाएँ खारिज कीं।
फैसला न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति मनोज जैन की खंडपीठ ने सुनाया।
2020 दिल्ली दंगों में कथित तौर पर 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी; दंगों में पुलिस की भूमिका की SIT जाँच की माँग भी खारिज।
वृंदा करात (CPI-M) और जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिकाएँ भी अस्वीकार।
राहुल गांधी , सोनिया गांधी , असदुद्दीन ओवैसी सहित विपक्षी नेताओं पर मुकदमे की 'लॉयर्स वॉइस' की माँग भी खारिज।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को 2019 जामिया हिंसा और 2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित भड़काऊ भाषण मामले में दिल्ली सरकार के मंत्री परवेश वर्मा और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ दाखिल याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं में उक्त नेताओं पर प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराने की माँग की गई थी।

मुख्य फैसला और पीठ

न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति मनोज जैन की खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाया। याचिकाकर्ता शेख मुजतबा फारूक ने BJP नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, परवेश वर्मा और अभय वर्मा के भाषणों को उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की वजह बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग उठाई थी। आरोप है कि इन दंगों में 50 से अधिक लोगों की जान गई थी।

अन्य याचिकाओं की माँगें

खारिज की गई याचिकाओं में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) नेता वृंदा करात और जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से दायर याचिकाएँ भी शामिल थीं। इनमें दंगों में दिल्ली पुलिस की भूमिका की अदालत की निगरानी में विशेष जाँच दल (SIT) से जाँच कराने की माँग की गई थी। इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं ने कुछ मामलों में जाँच को दिल्ली पुलिस से किसी बाहरी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने की भी अपील की थी।

जामिया मामला और पुलिस पर आरोप

दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) विरोधी मार्च के दौरान जामिया मिलिया इस्लामिया परिसर में पुलिस पर कथित ज्यादती के आरोप लगाए गए थे। छात्रों का कहना था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। एक याचिकाकर्ता ने इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का भी रुख किया था।

विपक्षी नेताओं के खिलाफ माँग भी खारिज

उधर, 'लॉयर्स वॉइस' की ओर से दाखिल एक अलग याचिका में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी सहित कई विपक्षी नेताओं और एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ मुकदमा चलाने की माँग की गई थी, जिसे भी अदालत ने खारिज कर दिया। यह ऐसे समय में आया है जब 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े विभिन्न मामले वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में हैं।

आगे क्या होगा

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद याचिकाकर्ताओं के पास सर्वोच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। गौरतलब है कि यह मामला जामिया हिंसा और दिल्ली दंगों की न्यायिक समीक्षा से जुड़ी कई परतों में से एक है, और उच्च न्यायालय का यह निर्णय इन मामलों की दिशा पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2020 दिल्ली दंगों की न्यायिक जाँच के लिए नागरिक समाज की ओर से उठाई गई माँगों को भी बड़ा झटका लगा है। उल्लेखनीय है कि अदालत ने विपक्षी नेताओं पर मुकदमे की माँग को भी खारिज किया, जो यह संकेत देता है कि राजनीतिक रूप से प्रेरित दोनों ओर की याचिकाओं पर न्यायपालिका एकसमान दृष्टिकोण अपना रही है। फिर भी, दंगों के पीड़ितों और मानवाधिकार संगठनों के लिए यह फैसला निराशाजनक है, क्योंकि स्वतंत्र SIT जाँच की माँग वर्षों से लंबित थी। याचिकाकर्ताओं के पास सर्वोच्च न्यायालय जाने का रास्ता अभी खुला है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट ने परवेश वर्मा और कपिल मिश्रा के खिलाफ याचिका क्यों खारिज की?
दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 5 अक्टूबर 2026 को उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जिनमें 2019 जामिया हिंसा और 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े कथित भड़काऊ भाषण के लिए परवेश वर्मा और कपिल मिश्रा पर FIR दर्ज करने की माँग थी। अदालत ने यह फैसला न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने सुनाया।
2020 दिल्ली दंगों में कितने लोगों की मौत हुई थी?
आरोपों के अनुसार उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए 2020 के दंगों में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कुछ नेताओं के भाषणों ने इन दंगों को भड़काया।
दिल्ली दंगों में SIT जाँच की माँग क्यों की गई थी?
वृंदा करात (CPI-M) और जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिकाओं में दिल्ली पुलिस की दंगों में भूमिका की निष्पक्ष जाँच के लिए अदालत की निगरानी में SIT बनाने की माँग की गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जाँच को दिल्ली पुलिस से किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपा जाए, लेकिन अदालत ने यह माँग भी खारिज कर दी।
जामिया मिलिया इस्लामिया में क्या हुआ था?
दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में जामिया मिलिया इस्लामिया परिसर में मार्च के दौरान पुलिस पर कथित ज्यादती के आरोप लगे थे। छात्रों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके साथ मारपीट की; एक याचिकाकर्ता ने इस संबंध में NHRC का भी रुख किया था।
क्या याचिकाकर्ता इस फैसले के खिलाफ आगे अपील कर सकते हैं?
हाँ, दिल्ली उच्च न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। यह मामला 2020 दिल्ली दंगों से जुड़ी व्यापक न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है जो अभी भी विभिन्न स्तरों पर जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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