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दिल्ली की साइबर पुलिस ने बड़ा निवेश ठगी रैकेट किया बेनकाब, ११ ठगों की गिरफ्तारी

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दिल्ली की साइबर पुलिस ने बड़ा निवेश ठगी रैकेट किया बेनकाब, ११ ठगों की गिरफ्तारी

सारांश

दिल्ली की साइबर पुलिस ने बड़े निवेश ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में ११ ठगों को गिरफ्तार किया गया है, जो लोगों को उच्च रिटर्न का लालच देकर ठगी कर रहे थे। जानें इस रैकेट की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

साइबर पुलिस ने 11 ठगों को गिरफ्तार किया है।
ठगी का शिकार एक 60 वर्षीय बुजुर्ग हुआ।
बरामद सामान में फर्जी सिम कार्ड और मोबाइल फोन शामिल हैं।
यह रैकेट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ा हुआ था।
पुलिस की कार्रवाई से साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश हुआ है।

नई दिल्ली, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले की साइबर पुलिस ने एक विशाल निवेश ठगी रैकेट का खुलासा किया है, जो दिल्ली, राजस्थान और मुंबई में सक्रिय था। इस कार्रवाई में पुलिस ने ११ साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है, जो लोगों को उच्च रिटर्न का लालच देकर ठगी करते थे।

इस गिरोह के शिकार हुए एक ६० वर्षीय बुजुर्ग से लगभग २२.६७ लाख रुपए की ठगी की गई। पुलिस ने आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद की है, जिसमें ४० मोबाइल फोन, ९२ फर्जी सिम कार्ड, ३९ पासबुक और चेकबुक, २७ एटीएम कार्ड, ४ पैन कार्ड, एक लैपटॉप, एक डेस्कटॉप, २ पीओएस मशीन, ६ यूपीआई स्कैनर, एक प्रिंटर और अनेक फर्जी दस्तावेज शामिल हैं।

यह मामला २१ नवंबर २०२५ को तब सामने आया जब पीड़ित ने साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उन्हें फेसबुक पर एक विज्ञापन के माध्यम से निवेश का प्रस्ताव मिला, जिसमें वित्त मंत्री के भाषण का गलत इस्तेमाल किया गया था।

आरोपियों ने खुद को निवेश सलाहकार बताते हुए फोन और व्हाट्सऐप के जरिए बातचीत की और उन्हें मुद्रावन ऐप और ९ प्रो जैसे प्लेटफार्मों पर रजिस्टर कराया। इसके बाद उनसे क्रेओविया टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर पैसा निवेश करने को कहा गया।

इस गिरोह का संचालन दिल्ली के रोहिणी और नेताजी सुभाष प्लेस से हो रहा था। पुलिस ने इन क्षेत्रों में छापेमारी की, जहाँ से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने बताया कि वे नेताजी सुभाष प्लेस में फ्रंट ऑफिस चलाते थे। इसके अलावा, पुलिस ने ब्यावर में भी छापेमारी की, जहाँ से चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

जांच में यह भी पता चला कि यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ा हुआ है और ये आरोपी कंबोडिया में बैठे साइबर ठगों के लिए काम कर रहे थे।

पुलिस की कार्रवाई ने एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह ठगी रैकेट कैसे काम करता था?
आरोपी खुद को निवेश सलाहकार बताकर लोगों को फेसबुक पर विज्ञापनों के माध्यम से झांसा देते थे।
पुलिस ने कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया?
पुलिस ने कुल ११ साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से क्या सामान बरामद किया?
पुलिस ने 40 मोबाइल फोन, 92 फर्जी सिम कार्ड, 39 पासबुक और अन्य फर्जी दस्तावेज बरामद किए।
क्या यह रैकेट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ा हुआ था?
हाँ, यह रैकेट कंबोडिया में बैठे साइबर ठगों के लिए काम कर रहा था।
इस ठगी से कितने लोगों को नुकसान हुआ?
अभी तक केवल एक बुजुर्ग व्यक्ति के बारे में जानकारी मिली है, जिनसे 22.67 लाख रुपए की ठगी की गई।
राष्ट्र प्रेस
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