दिल्ली पुलिस का ISI जासूसी नेटवर्क पर शिकंजा: पति-पत्नी गिरफ्तार, 8 सिम कार्ड दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजे
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 28 अगस्त 2026 को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से कथित तौर पर जुड़े एक जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए एक युवा दंपति — मोहम्मद साहिल और उसकी पत्नी समीरा — को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों वर्ष 2024 से पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों के संपर्क में थे और सोशल मीडिया के माध्यम से इस नेटवर्क से जुड़े थे।
मामले की पृष्ठभूमि और जाँच की शुरुआत
स्पेशल सेल की नॉर्दर्न रेंज को दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय एक पाकिस्तान समर्थित जासूसी नेटवर्क की सूचना मिली थी। जाँच आगे बढ़ने पर पुलिस को ऐसे सुराग मिले जिनसे पता चला कि यह नेटवर्क भारतीय सिम कार्ड जुटाकर पाकिस्तान पहुँचाने और संवेदनशील सैन्य व खुफिया जानकारियाँ हासिल करने की कोशिश कर रहा था। गौरतलब है कि यह ऑपरेशन ऐसे समय में सामने आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पहले से ही ऊँचे स्तर पर है।
आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार, मोहम्मद साहिल का जन्म 2001 में हुआ था। इग्नू से बीए करने के बाद उसने एलएलबी की तैयारी के लिए एक वकील के साथ काम शुरू किया था, जो उसने जून 2025 में छोड़ दिया। 2022 में उसकी मुलाकात समीरा से हुई और बाद में दोनों ने विवाह किया। साहिल के पिता मोहम्मद अशफाक 1982 में बदायूँ (उत्तर प्रदेश) से दिल्ली आए और सराय काले खाँ में बस गए, जहाँ वे कार मैकेनिक का काम करते हैं।
वहीं, समीरा का जन्म 2005 में हुआ था। दिल्ली से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने पत्राचार माध्यम से बीए किया। गिरफ्तारी से पूर्व समीरा नोएडा के एक कॉल सेंटर में कार्यरत थीं। उनके पिता नदीम 1996 में बिजनौर (उत्तर प्रदेश) से दिल्ली आए और शकूरपुर में बस गए।
जासूसी के तरीके: सिम कार्ड, व्हाट्सऐप और छावनी की रेकी
जाँच में सामने आया कि 2024 और 2025 के दौरान दोनों ने कथित तौर पर 8 भारतीय सिम कार्ड दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजे, जिसके बदले उन्हें करीब ₹30,000 मिले। पुलिस का दावा है कि इन भारतीय नंबरों पर पाकिस्तान में व्हाट्सऐप अकाउंट संचालित किए गए और इनके ज़रिए भारतीय व्हाट्सऐप समूहों में प्रवेश कर संवेदनशील जानकारियाँ जुटाने की कोशिश की गई।
इसके अतिरिक्त, साहिल को भारत में विभिन्न स्थानों पर छावनी क्षेत्रों की रेकी करने और उन सैन्य जवानों की जानकारी देने का काम सौंपा गया था, जिनके कोर्ट मार्शल की कार्यवाही ट्रिब्यूनल में लंबित है। साहिल पहले एक कथित पाकिस्तानी एजेंट के संपर्क में आया, जिसके बाद दोनों की मुलाकात एक कथित पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी (PIO) से कराई गई।
फोरेंसिक साक्ष्य और पूछताछ से मिली जानकारी
दोनों के मोबाइल फोन के फोरेंसिक विश्लेषण में साहिल, समीरा और पाकिस्तानी हैंडलर्स के बीच व्हाट्सऐप चैट सहित कई आपत्तिजनक बातचीत मिलीं। पुलिस के अनुसार, पूछताछ से पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव्स के कार्यपद्धति का पर्दाफाश हुआ और इस मॉड्यूल की संरचना तथा कामकाज के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी सामने आई।
इस ऑपरेशन से पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स द्वारा एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म के ज़रिए ओवर-ग्राउंड वर्कर्स और स्लीपर सेल्स के साथ तालमेल बिठाने के तरीकों पर भी प्रकाश पड़ा है।
आगे की जाँच और व्यापक निहितार्थ
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर कथित पाकिस्तानी जासूसी गतिविधियों को नाकाम करने का दावा किया है। यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि किस प्रकार सामान्य पृष्ठभूमि वाले युवाओं को सोशल मीडिया के ज़रिए लक्षित कर खुफिया नेटवर्क में शामिल किया जा सकता है। जाँचकर्ताओं के अनुसार, इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।