1 अगस्त 2026
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दिल्ली में ISI से जुड़े आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़: स्पेशल सेल ने 7 को दबोचा, हथियार-ड्रग्स बरामद

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दिल्ली में ISI से जुड़े आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़: स्पेशल सेल ने 7 को दबोचा, हथियार-ड्रग्स बरामद

सारांश

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ISI से जुड़े एक हाइब्रिड आतंकी-आपराधिक नेटवर्क का पर्दाफाश किया है — जो ड्रोन से पंजाब में गिराए हथियार दिल्ली-एनसीआर पहुँचाता था। 7 गिरफ्तार, 5 पिस्तौल और नशीले पदार्थ बरामद। पाकिस्तान स्थित दो सरगना अब भी फरार हैं।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने 16 जून 2026 को पाकिस्तान-समर्थित आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ कर 7 संदिग्धों को गिरफ्तार किया।
नेटवर्क की कमान पाकिस्तान स्थित शहजाद भट्टी और अजमल गुर्जर के हाथ में थी, जो अब भी फरार हैं।
पुलिस ने 5 पिस्तौल , 41 जिंदा कारतूस , 7 मोबाइल फोन और एक स्कॉर्पियो एसयूवी बरामद की।
गिरोह ड्रोन के ज़रिये पाकिस्तान से पंजाब में हथियार और ड्रग्स गिरवाकर दिल्ली-एनसीआर तक पहुँचाता था।
नेटवर्क सोशल मीडिया के ज़रिये युवाओं को भर्ती करता था; अधिकांश आरोपियों पर हत्या, डकैती और एनडीपीएस अधिनियम के पुराने मामले दर्ज हैं।
पुलिस अब फरार सदस्यों, हथियार आपूर्तिकर्ताओं और नेटवर्क के वित्तपोषकों की तलाश कर रही है।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 16 जून 2026 को राजधानी में सक्रिय एक पाकिस्तान-समर्थित आतंकी और आपराधिक नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े सरगनाओं के इशारे पर दिल्ली-एनसीआर में अवैध हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की आपूर्ति कर रहा था।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क की कमान पाकिस्तान स्थित सरगना शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी अजमल गुर्जर के हाथों में थी। आरोप है कि गिरोह के सदस्य ड्रोन के ज़रिये पाकिस्तान से पंजाब में गिराई गई हथियारों और नशीले पदार्थों की खेप इकट्ठा कर दिल्ली-एनसीआर तक पहुँचाते थे।

मई 2026 में स्पेशल सेल को खुफिया जानकारी मिली कि शहजाद भट्टी और अजमल गुर्जर दिल्ली-एनसीआर में बड़े पैमाने पर आपराधिक और आतंकी गतिविधियों की योजना बना रहे हैं। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने जाल बिछाया और मोहित उर्फ योगी को पहले गिरफ्तार किया।

बरामदगी और साक्ष्य

अभियान के दौरान पुलिस ने 5 पिस्तौल, 41 जिंदा कारतूस, 7 मोबाइल फोन और एक स्कॉर्पियो एसयूवी बरामद की। मोहित के पास से कथित तौर पर अवैध हथियारों के साथ-साथ पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से उसके संबंधों के साक्ष्य भी मिले।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि नेटवर्क के सदस्य दिल्ली, गाजियाबाद और आसपास के इलाकों में कई महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी कर चुके थे — जो संभावित बड़े हमले की तैयारी की ओर इशारा करता है।

भर्ती का तरीका

पुलिस के अनुसार, गिरोह युवाओं को अपने नेटवर्क में खींचने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता था। कथित तौर पर नए सदस्यों को जल्दी पैसा कमाने का लालच और आपराधिक दुनिया की चकाचौंध दिखाकर हथियार व नशीले पदार्थों की तस्करी में धकेला जाता था। यह ऐसे समय में आया है जब सुरक्षा एजेंसियाँ सोशल मीडिया के ज़रिये युवाओं की कट्टरपंथी भर्ती को लेकर पहले से सतर्क हैं।

आरोपियों का आपराधिक इतिहास

गिरोह के कई सदस्यों पर पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, शस्त्र अधिनियम और एनडीपीएस अधिनियम से जुड़े मामले शामिल हैं। गौरतलब है कि यह नेटवर्क केवल आतंकी गतिविधियों तक सीमित नहीं था — हथियार और ड्रग्स की तस्करी को मिलाकर यह एक 'हाइब्रिड क्राइम मॉडल' था जो आर्थिक रूप से भी खुद को पोषित कर रहा था।

आगे की जाँच

दिल्ली पुलिस अब गिरोह के फरार सदस्यों, हथियार आपूर्तिकर्ताओं और इस ऑपरेशन को वित्तपोषित करने में शामिल लोगों की सक्रिय तलाश कर रही है। जाँच एजेंसियाँ पाकिस्तान स्थित सरगनाओं से इस नेटवर्क के व्यापक अंतरराष्ट्रीय तार खंगाल रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

सोशल मीडिया से भर्ती और दिल्ली-एनसीआर में रेकी — यह तीनों मिलकर बताते हैं कि यह नेटवर्क केवल तस्करी नहीं, बल्कि बड़े हमले की पूर्वतैयारी में था। चिंताजनक यह है कि पाकिस्तान स्थित दोनों मुख्य सरगना अभी भी फरार हैं, जिसका अर्थ है कि नेटवर्क का सिर अभी कटा नहीं है। जब तक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव और खुफिया साझेदारी से इन स्रोतों को नहीं सुखाया जाता, ऐसे मॉड्यूल बार-बार उभरते रहेंगे।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में ISI से जुड़े आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ कैसे हुआ?
मई 2026 में मिली खुफिया जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जाल बिछाया और पहले मोहित उर्फ योगी को गिरफ्तार किया। उसकी पूछताछ से मिले सुरागों के आधार पर कुल 7 संदिग्धों को दबोचा गया और हथियार व नशीले पदार्थ बरामद किए गए।
इस नेटवर्क के मुख्य सरगना कौन हैं और वे कहाँ हैं?
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क की कमान पाकिस्तान स्थित शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी अजमल गुर्जर के हाथ में थी। दोनों अभी भी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
गिरोह दिल्ली-एनसीआर में हथियार कैसे पहुँचाता था?
जाँच के अनुसार, आरोपी ड्रोन के ज़रिये पाकिस्तान से पंजाब में गिराई गई हथियारों और नशीले पदार्थों की खेप इकट्ठा कर दिल्ली-एनसीआर तक पहुँचाते थे। यह तस्करी का एक नया और तकनीकी रूप से उन्नत तरीका है जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है।
गिरोह युवाओं को कैसे अपने जाल में फँसाता था?
पुलिस के अनुसार, गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिये युवाओं से संपर्क करता था और उन्हें जल्दी पैसा कमाने का लालच देकर हथियार व ड्रग्स तस्करी में शामिल करता था। आपराधिक दुनिया की चकाचौंध दिखाकर उन्हें नेटवर्क में धकेला जाता था।
इस मामले में आगे क्या होगा?
दिल्ली पुलिस अब गिरोह के फरार सदस्यों, हथियार आपूर्तिकर्ताओं और नेटवर्क के वित्तपोषकों की तलाश कर रही है। जाँच एजेंसियाँ पाकिस्तान स्थित सरगनाओं से जुड़े अंतरराष्ट्रीय तार भी खंगाल रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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