18 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड का पुनर्गठन: एलजी टीएस संधू की मंजूरी, राजधानी के 'ग्रीन लंग्स' को मिलेगी नई सुरक्षा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड का पुनर्गठन: एलजी टीएस संधू की मंजूरी, राजधानी के 'ग्रीन लंग्स' को मिलेगी नई सुरक्षा

सारांश

दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने DRMB के पुनर्गठन को हरी झंडी दी — मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बना यह बहु-एजेंसी बोर्ड राजधानी के 'ग्रीन लंग्स' की निगरानी करेगा। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत लिए गए इस फैसले में विशेषज्ञ और नागरिक समाज की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है।

मुख्य बातें

उपराज्यपाल टीएस संधू ने 2 जून 2026 को दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड (DRMB) के पुनर्गठन को मंजूरी दी।
पुनर्गठित बोर्ड की अध्यक्षता दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव करेंगे; DDA, MCD, NDMC, CPWD और दिल्ली पुलिस के अधिकारी सदस्य होंगे।
चंद्र प्रकाश गोयल को CEC प्रतिनिधि के रूप में विशेषज्ञ सदस्य नियुक्त किया गया; अरविंद माधव सिंह और डॉ.
मालविका कौल गैर-सरकारी सदस्य होंगी।
बोर्ड के अंतर्गत एक स्थायी समिति बनाई जाएगी जो रिज मामलों में त्वरित निर्णय लेगी।
यह फैसला सर्वोच्च न्यायालय के टी.एन.
गोदावरमन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ मामले के निर्देशों और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत लिया गया।

दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने 2 जून 2026 को दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड (DRMB) के पुनर्गठन को औपचारिक मंजूरी दे दी — यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के टी.एन. गोदावरमन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ मामले में दिए गए निर्देशों और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के अनुरूप लिया गया है। नए ढाँचे का उद्देश्य दिल्ली के रिज क्षेत्र — जिसे राजधानी के 'ग्रीन लंग्स' के रूप में जाना जाता है — के संरक्षण, निगरानी और प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है।

रिज क्षेत्र का महत्व

दिल्ली का रिज क्षेत्र शहर के पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ माना जाता है। यह क्षेत्र न केवल जैव विविधता की रक्षा करता है, बल्कि शहरी ताप द्वीप प्रभाव को कम करने और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को थामने में भी अहम भूमिका निभाता है। गौरतलब है कि अतिक्रमण और अनियंत्रित निर्माण के कारण यह क्षेत्र वर्षों से दबाव में रहा है, जिससे इसकी प्रभावी निगरानी की माँग लगातार उठती रही है।

पुनर्गठित बोर्ड की संरचना

पुनर्गठित DRMB की अध्यक्षता दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव करेंगे। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के उपाध्यक्ष बोर्ड के सदस्य होंगे। इसके अतिरिक्त पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी बोर्ड में शामिल रहेंगे।

दिल्ली नगर निगम (MCD) के आयुक्त, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) के अध्यक्ष, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के महानिदेशक, दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, राजस्व विभाग के प्रधान सचिव और पर्यावरण एवं वन विभाग के प्रधान सचिव भी बोर्ड का हिस्सा होंगे। जमीनी निगरानी की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के प्रधान मुख्य वन संरक्षक को सदस्य सचिव के रूप में सौंपी गई है।

विशेषज्ञ और नागरिक समाज की भागीदारी

केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) का प्रतिनिधित्व करने के लिए चंद्र प्रकाश गोयल को विशेषज्ञ सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। सेंटर फॉर सस्टेनेबल ग्रीन इकोनॉमी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरविंद माधव सिंह गैर-सरकारी सदस्य के रूप में बोर्ड में शामिल होंगे। इसके साथ ही संकल्प फाउंडेशन की अनुसंधान एवं संचार निदेशक डॉ. मालविका कौल को भी बोर्ड में स्थान दिया गया है, ताकि समुदाय-आधारित पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी को प्रोत्साहन मिल सके।

स्थायी समिति का गठन

बोर्ड के अंतर्गत एक स्थायी समिति का भी गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के एक नामित सदस्य द्वारा की जाएगी। इस समिति को रिज क्षेत्र से जुड़े मामलों में तत्काल निर्णय लेने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में वायु प्रदूषण और हरित क्षेत्र के क्षरण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय और पर्यावरण विशेषज्ञ लगातार चिंता जता रहे हैं। सरकार का मानना है कि बहु-एजेंसी समन्वय और नागरिक समाज की सक्रिय भागीदारी से रिज क्षेत्र की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक प्रभावी होगी। अब देखना यह होगा कि पुनर्गठित बोर्ड अपनी पहली बैठक में किन प्राथमिकताओं को सामने रखता है और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की गति क्या रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आठ से अधिक एजेंसियाँ, नागरिक समाज प्रतिनिधि — लेकिन इतनी बड़ी बहु-एजेंसी संरचनाएँ अक्सर जवाबदेही की जगह समन्वय की भूलभुलैया बन जाती हैं। असली कसौटी यह है कि स्थायी समिति को कितनी स्वायत्त शक्ति मिलती है और क्या उल्लंघनों पर कार्रवाई की कोई समयसीमा तय होती है। रिज क्षेत्र पर अतिक्रमण के मामले दशकों से न्यायालय में लंबित हैं — नया बोर्ड तभी अर्थपूर्ण होगा जब वह निगरानी से आगे बढ़कर प्रवर्तन की भूमिका निभाए।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड (DRMB) का पुनर्गठन क्यों किया गया?
DRMB का पुनर्गठन सर्वोच्च न्यायालय के टी.एन. गोदावरमन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ मामले में दिए गए निर्देशों और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत किया गया है। उद्देश्य रिज क्षेत्र के संरक्षण और प्रबंधन को अधिक प्रभावी और समन्वित बनाना है।
पुनर्गठित DRMB की अध्यक्षता कौन करेगा?
पुनर्गठित दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड की अध्यक्षता दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव करेंगे। DDA के उपाध्यक्ष सहित केंद्र और राज्य की कई एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे।
दिल्ली का रिज क्षेत्र पर्यावरण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
दिल्ली का रिज क्षेत्र राजधानी के 'ग्रीन लंग्स' के रूप में जाना जाता है। यह जैव विविधता की रक्षा करता है, शहरी ताप को कम करता है और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को थामने में अहम भूमिका निभाता है।
बोर्ड में नागरिक समाज का प्रतिनिधित्व कैसे सुनिश्चित किया गया है?
सेंटर फॉर सस्टेनेबल ग्रीन इकोनॉमी के CEO अरविंद माधव सिंह और संकल्प फाउंडेशन की डॉ. मालविका कौल को गैर-सरकारी सदस्य के रूप में बोर्ड में शामिल किया गया है। इससे समुदाय-आधारित पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
DRMB के तहत बनने वाली स्थायी समिति क्या काम करेगी?
स्थायी समिति की अध्यक्षता केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के एक नामित सदस्य द्वारा की जाएगी। इसे रिज क्षेत्र से जुड़े मामलों में तत्काल निर्णय लेने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 1 साल पहले