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क्या आप जानते हैं दक्षिण भारत के धन्वंतरि मंदिरों के बारे में?

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क्या आप जानते हैं दक्षिण भारत के धन्वंतरि मंदिरों के बारे में?

सारांश

धनतेरस पर दक्षिण भारत के धन्वंतरि मंदिरों में भक्तों की भीड़ होती है। ये मंदिर आरोग्य और समृद्धि की कामना के लिए प्रसिद्ध हैं। जानें किन मंदिरों में होती है खास पूजा और कैसे मिलती है रोगों से मुक्ति।

मुख्य बातें

भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद के जनक हैं।
धनतेरस पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।
दक्षिण भारत के मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगती है।
धन्वंतरि होमम पूरे देश के कल्याण के लिए होता है।
धनतेरस पर भगवान को घी और तुलसी अर्पित किए जाते हैं।

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। भगवान धन्वंतरि, जिन्हें विष्णु भगवान का अवतार माना जाता है, आयुर्वेद के जनक हैं। धन्वंतरि को रोगों से छुटकारा दिलाने के लिए जाना जाता है, क्योंकि वह समुंद्र मंथन के समय अमृत कलश और जड़ी-बूटियों के साथ प्रकट हुए थे। दक्षिण भारत में भगवान धन्वंतरि को समर्पित कई मंदिर हैं, जहां धनतेरस पर दूर-दूर से भक्त अपनी मन्नत लेकर आते हैं।

धनतेरस के अवसर पर भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और आरोग्य की प्राप्ति का वरदान लिया जाता है। क्या आप जानते हैं कि भगवान धन्वंतरि के सबसे अधिक मंदिर दक्षिण भारत में हैं? यहां धनतेरस के दिन भक्त अपने रोगों से मुक्त होने के लिए आते हैं।

आंध्र प्रदेश के तिरुमला में एक धन्वंतरि मंदिर है, जिसे अपनी सकारात्मक ऊर्जा और रोगों से मुक्ति दिलाने के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। मान्यता है कि यहां विशेष पूजा करने से आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है और धन-धान्य का आशीर्वाद भी मिलता है। यहां हर साल धन्वंतरि होमम आयोजित किया जाता है, जिसका उद्देश्य पूरे देश के कल्याण और महामारी से सुरक्षा होता है।

तमिलनाडु के चेन्नई में प्राचीन श्री धन्वंतरि आरोग्य पीठम मंदिर है, जहां आयुर्वेदिक पूजा का विशेष महत्व है। भक्त यहां अपने रोगों से छुटकारा पाने के लिए जड़ी-बूटी अर्पित करते हैं। धनतेरस के मौके पर यहां विशेष पूजा आयोजित की जाती है और मंदिर को फूलों से सजाया जाता है।

केरल के त्रिशूर में भी भगवान धन्वंतरि का एक अनूठा मंदिर है, जो अपनी पारंपरिक आयुर्वेदिक विरासत के लिए जाना जाता है।

मान्यता है कि धनतेरस के दिन मंदिर में पूजा और जाप करने से सभी रोगों से मुक्ति मिलती है और भक्त को लंबी उम्र भी प्राप्त होती है। यहां भगवान धन्वंतरि को घी और तुलसी के पत्ते अर्पित किए जाते हैं, जिन्हें प्रसाद के रूप में भी ग्रहण किया जाता है। यहां का विशेष प्रसाद मुक्कुडी होता है।

केरल के थोट्टुवा में भी भगवान धन्वंतरि का मंदिर है। माना जाता है कि यहां भगवान धन्वंतरि स्वयं विराजते हैं और यहां की गई पूजा फलदायी होती है।

धनतेरस के अवसर पर भक्त लंबी-लंबी लाइनों में लगकर भगवान के दर्शन करते हैं और प्राकृतिक चीजें अर्पित करते हैं। भक्त यहां अपने परिवार के लिए अनुष्ठान भी कराते हैं।

तमिलनाडु का रंगनाथस्वामी मंदिर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का मंदिर है, लेकिन धनतेरस पर यहां भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा होती है और जड़ी-बूटियों से बना प्रसाद अर्पित किया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ये स्वास्थ्य, समृद्धि और आयुर्वेद की परंपरा को भी बनाए रखते हैं। यहां भक्तों की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि लोग आज भी अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं और वे आध्यात्मिक मार्ग से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करना चाहते हैं।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों की जाती है?
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा आयुर्वेद और स्वास्थ्य की कामना के लिए की जाती है। भक्त यहां रोगों से मुक्ति और लंबी उम्र की प्रार्थना करते हैं।
कौन से मंदिरों में धन्वंतरि की विशेष पूजा होती है?
दक्षिण भारत के तिरुमला, चेन्नई, त्रिशूर, और थोट्टुवा में भगवान धन्वंतरि के मंदिरों में विशेष पूजा आयोजित की जाती है।
धन्वंतरि होमम का क्या महत्व है?
धन्वंतरि होमम का उद्देश्य देश के कल्याण और महामारी से सुरक्षा है। यह पूजा भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है।
धनतेरस पर प्रसाद में क्या अर्पित किया जाता है?
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि को विशेष रूप से घी और तुलसी के पत्ते अर्पित किए जाते हैं।
धनतेरस के दिन मंदिर में पूजा करने का क्या लाभ है?
धनतेरस के दिन मंदिर में पूजा करने से सभी रोगों से मुक्ति और लंबी आयु प्राप्त करने की मान्यता है।
राष्ट्र प्रेस
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