धर्मेंद्र प्रधान की ओडिशा CM माझी और वरिष्ठ BJP नेताओं के साथ बैठक, राज्य विकास कार्यों की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
वरिष्ठ भाजपा नेता और सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार, 30 जुलाई 2026 को भुवनेश्वर में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ एक अहम बैठक की। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद यह प्रधान की अपने गृह राज्य में पहली प्रमुख राजनीतिक बैठक रही।
बैठक में क्या हुई चर्चा
इस बैठक में ओडिशा के विकास कार्यों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए प्रधान ने लिखा, 'ओडिशा के विकास कार्यों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर राज्य के मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, राज्य प्रभारी और हमारी पार्टी के सांसदों के साथ चर्चा हुई।' यह बैठक उनके भुवनेश्वर लौटने के ठीक एक दिन बाद हुई।
ओडिशा वापसी और गर्मजोशी भरा स्वागत
मंगलवार को बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रधान के पहुँचने पर BJP नेताओं और राज्य के मंत्रियों ने उनका उत्साहपूर्ण स्वागत किया। यह उनकी 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफे के बाद पहली ओडिशा यात्रा थी। गौरतलब है कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा में व्यापक अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर देशभर में हुए विरोध-प्रदर्शनों के बीच प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना पद छोड़ा था।
मुख्यमंत्री माझी ने की प्रशंसा
इस्तीफे के तुरंत बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधान के योगदान की सराहना की थी। माझी ने लिखा था, 'केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तौर पर धर्मेंद्र प्रधान ने ऐतिहासिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) सहित कई बड़े सुधारों का नेतृत्व किया और देश भर के लाखों छात्रों के भविष्य के लिए एक मजबूत नींव रखी।'
माझी ने आगे कहा था, 'उच्च नैतिक मूल्यों को सबसे ऊपर रखते हुए, उनका इस्तीफा देने का फैसला उनके गहरे सिद्धांतों और जनसेवा के प्रति अटूट समर्पण को दर्शाता है। हमें पूरा भरोसा है कि उनका भविष्य सफल होगा। महाप्रभु श्री जगन्नाथ उनके आगे के सफर पर अपनी कृपा बनाए रखें।'
नीट विवाद की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी 2026 पेपर लीक प्रकरण राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बना हुआ है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा में हुई अनियमितताओं ने शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रधान का नैतिक आधार पर इस्तीफा भारतीय राजनीति में एक विरल घटना के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या
अब जब प्रधान मंत्री पद के दायित्वों से मुक्त हैं, राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र इस बात पर है कि वे ओडिशा की राजनीति में क्या भूमिका निभाते हैं। राज्य के विकास कार्यों की समीक्षा और BJP नेताओं के साथ यह बैठक संकेत देती है कि प्रधान अपने गृह राज्य में सक्रिय रहने का इरादा रखते हैं।