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डिब्रूगढ़ और बराक घाटी में गुवाहाटी हाईकोर्ट की बेंच स्थापित होगी, असम सरकार का ऐलान

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डिब्रूगढ़ और बराक घाटी में गुवाहाटी हाईकोर्ट की बेंच स्थापित होगी, असम सरकार का ऐलान

सारांश

दशकों की माँग के बाद असम सरकार ने डिब्रूगढ़ और बराक घाटी में गुवाहाटी हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने का ऐलान किया है। कानून मंत्री सुशांत बोरगोहेन ने विधानसभा में यह घोषणा की, हालाँकि समय-सीमा और कार्यक्षेत्र का विवरण अभी नहीं दिया गया।

मुख्य बातें

असम के कानून मंत्री सुशांत बोरगोहेन ने 7 जुलाई 2025 को विधानसभा में डिब्रूगढ़ और बराक घाटी में गुवाहाटी हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने की घोषणा की।
बराक घाटी (कछार, श्रीभूमि, हैलाकांडी) गुवाहाटी से लगभग 300 किलोमीटर दूर है; बेंच की माँग दशकों पुरानी थी।
नई बेंचों से यात्रा-खर्च, मुकदमेबाज़ी की लागत और मामलों की सुनवाई में देरी कम होने की उम्मीद है।
घोषणा में बेंचों की स्थापना की कोई समय-सीमा नहीं बताई गई और अधिकार क्षेत्र का विवरण भी अनुपस्थित है।
गुवाहाटी हाईकोर्ट असम, नागालैंड, मिज़ोरम और अरुणाचल प्रदेश के लिए साझा उच्च न्यायालय है।

असम के कानून मंत्री सुशांत बोरगोहेन ने 7 जुलाई 2025 को विधानसभा में घोषणा की कि डिब्रूगढ़ और बराक घाटी में गुवाहाटी हाईकोर्ट की स्थायी बेंच स्थापित की जाएंगी। यह निर्णय ऊपरी असम और राज्य के दक्षिणी क्षेत्र में न्यायिक पहुँच को सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दशकों पुरानी मांग को मिली मंज़ूरी

बराक घाटी — जिसमें कछार, श्रीभूमि और हैलाकांडी जिले शामिल हैं — गुवाहाटी से लगभग 300 किलोमीटर दूर स्थित है। इस क्षेत्र के वकील, बार एसोसिएशन, राजनीतिक दल और नागरिक समाज संगठन दशकों से एक स्थायी हाईकोर्ट बेंच की माँग करते आए हैं। बेंच के अभाव में मुकदमेबाज़ों और अधिवक्ताओं को सुनवाई के लिए गुवाहाटी तक की लंबी और खर्चीली यात्रा करनी पड़ती थी।

डिब्रूगढ़ बेंच से ऊपरी असम को राहत

डिब्रूगढ़ में प्रस्तावित बेंच से ऊपरी असम के कई जिलों के नागरिकों को न्यायिक सेवाएँ उनके नज़दीक मिलने की उम्मीद है। इससे गुवाहाटी हाईकोर्ट की मुख्य सीट पर मामलों का बोझ भी कम होगा। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हाईकोर्ट के कामकाज का विकेंद्रीकरण दूरदराज़ के जिलों में मामलों के त्वरित निपटारे को सुनिश्चित कर सकता है।

प्रस्तावित बेंचों से अपेक्षित लाभ

नई बेंचों से न्याय तक पहुँच बेहतर होने, यात्रा-समय और मुकदमेबाज़ी का खर्च घटने तथा मामलों के तेज़ निपटारे की संभावना जताई जा रही है। इनसे दोनों क्षेत्रों में न्यायिक बुनियादी ढाँचे के सुदृढ़ीकरण और कानूनी व्यवस्था के समग्र विकास को भी बल मिलने की उम्मीद है।

समय-सीमा और विवरण अभी अस्पष्ट

उल्लेखनीय है कि घोषणा करते समय कानून मंत्री सुशांत बोरगोहेन ने इन दोनों बेंचों की स्थापना के लिए कोई समय-सीमा नहीं बताई और न ही उनके अधिकार क्षेत्र या कामकाज के तरीके का कोई विस्तृत विवरण दिया। यह ऐसे समय में आया है जब बराक घाटी में पिछले कुछ वर्षों में बेंच की माँग को लेकर कई सार्वजनिक अभियान चलाए जा चुके हैं।

गुवाहाटी हाईकोर्ट का दायरा

गुवाहाटी हाईकोर्ट वर्तमान में असम, नागालैंड, मिज़ोरम और अरुणाचल प्रदेश के लिए साझा उच्च न्यायालय है और अपनी मुख्य सीट से संचालित होता है। कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में इसकी स्थायी बेंच पहले से कार्यरत हैं। नई बेंचों की स्थापना से इस न्यायिक ढाँचे का और विस्तार होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन समय-सीमा और अधिकार क्षेत्र का विवरण न देना चिंताजनक है — बराक घाटी में यह माँग दशकों से लंबित थी और कई बार राजनीतिक आश्वासनों में दफ़न हो चुकी है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या सरकार संसाधन आवंटन, न्यायाधीशों की नियुक्ति और बुनियादी ढाँचे के लिए ठोस रोडमैप पेश करती है। बिना क्रियान्वयन की समयरेखा के, यह घोषणा उन वादों की सूची में जुड़ने का जोखिम उठाती है जो विधानसभा की दीवारों से बाहर नहीं निकल पाए।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में डिब्रूगढ़ और बराक घाटी में हाईकोर्ट बेंच की घोषणा किसने और कब की?
असम के कानून मंत्री सुशांत बोरगोहेन ने 7 जुलाई 2025 को विधानसभा में यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि डिब्रूगढ़ और बराक घाटी में गुवाहाटी हाईकोर्ट की स्थायी बेंच स्थापित की जाएंगी।
बराक घाटी में हाईकोर्ट बेंच की माँग क्यों हो रही थी?
बराक घाटी गुवाहाटी से लगभग 300 किलोमीटर दूर है और वहाँ हाईकोर्ट बेंच न होने से वकीलों व मुकदमेबाज़ों को सुनवाई के लिए लंबी और महँगी यात्रा करनी पड़ती थी। बार एसोसिएशन, राजनीतिक दल और नागरिक संगठन दशकों से स्थायी बेंच की माँग कर रहे थे।
नई बेंचों से आम जनता को क्या फायदा होगा?
प्रस्तावित बेंचों से न्यायिक सेवाएँ लोगों के नज़दीक आएंगी, यात्रा का समय और मुकदमेबाज़ी का खर्च घटेगा तथा मामलों का तेज़ निपटारा संभव होगा। इससे गुवाहाटी हाईकोर्ट की मुख्य सीट पर मामलों का बोझ भी कम होगा।
गुवाहाटी हाईकोर्ट किन राज्यों के लिए काम करता है?
गुवाहाटी हाईकोर्ट असम, नागालैंड, मिज़ोरम और अरुणाचल प्रदेश के लिए साझा उच्च न्यायालय है। यह अपनी मुख्य सीट गुवाहाटी से संचालित होता है और कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में इसकी स्थायी बेंच पहले से कार्यरत हैं।
क्या इन बेंचों की स्थापना की कोई समय-सीमा तय की गई है?
नहीं। कानून मंत्री सुशांत बोरगोहेन ने घोषणा के समय बेंचों की स्थापना के लिए कोई समय-सीमा नहीं बताई और न ही उनके अधिकार क्षेत्र या कामकाज के तरीके का विस्तृत विवरण दिया।
राष्ट्र प्रेस
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