DMK नेता थेन्नारासु का तमिलनाडु सरकार पर सवाल: कम उधारी = विकास ठप और बिल बकाया?
सारांश
मुख्य बातें
डीएमके विधायक और तमिलनाडु के पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को राज्य की TVK सरकार के बेहतर वित्तीय प्रबंधन के दावे को चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि अप्रैल-सितंबर 2026 में उधारी में 21 प्रतिशत की कमी, जरूरी विकास कार्यों पर खर्च टालने और ठेकेदारों के बिलों के भुगतान में देरी की आड़ हो सकती है।
उधारी में कमी के सरकारी दावे पर विवाद
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) के ज़रिए ली गई उधारी घटकर ₹40,500 करोड़ रह गई, जबकि एक वर्ष पूर्व इसी अवधि में यह ₹51,300 करोड़ थी। सरकार ने इसे वित्तीय अनुशासन का प्रमाण बताया।
थेन्नारासु ने इस दावे को अपर्याप्त करार देते हुए कहा कि केवल उधारी घटाने से बेहतर वित्तीय प्रबंधन साबित नहीं होता। उनके अनुसार, सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या विकास परियोजनाओं पर खर्च जारी रहा और पूर्ण कार्यों का भुगतान समय पर किया गया।
पूंजीगत व्यय और बकाया भुगतान पर सवाल
पूर्व वित्त मंत्री ने सरकार से अप्रैल-सितंबर 2026 की अवधि के विस्तृत खर्च के आँकड़े, नए बुनियादी ढाँचे में किए गए निवेश की जानकारी, और डीएमके शासनकाल में शुरू की गई परियोजनाओं के लंबित भुगतानों का खुलासा करने की माँग की।
उन्होंने तुलनात्मक संदर्भ देते हुए बताया कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के अनंतिम मासिक खातों के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2025 के बीच मेट्रो रेल कार्यों सहित विभिन्न पूंजीगत परियोजनाओं पर ₹13,002.22 करोड़ खर्च हुए थे। उन्होंने सीधा सवाल किया — “क्या बकाया भुगतान को बचत माना जा सकता है?”
तीसरी तिमाही में कर्ज़ कार्यक्रम पर चिंता
थेन्नारासु ने अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए सरकार के ₹48,000 करोड़ उधार लेने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह राशि पिछली तिमाही (जुलाई-सितंबर) में लिए गए ₹23,500 करोड़ से दोगुने से भी अधिक है।
उनका आरोप है कि राजस्व प्राप्तियाँ बजट के अनुमानों से कम रहीं, जिससे पूंजीगत व्यय बनाए रखना प्रशासन के लिए कठिन हो गया। गौरतलब है कि डीएमके सरकार ने अपने 2025-26 के बजट में पूंजीगत व्यय हेतु ₹57,231 करोड़ आवंटित किए थे।
विकास कार्य ठप होने के आरोप
थेन्नारासु ने दावा किया कि हज़ारों करोड़ रुपए के टेंडर रद्द कर दिए गए, निर्माण कार्य रुक गए और सड़कों की हालत बिगड़ी। उनके अनुसार, इन सबके चलते हज़ारों लोगों की आजीविका पर असर पड़ा।
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु सरकार अपनी वित्तीय पारदर्शिता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक छवि बनाने की कोशिश में है। थेन्नारासु की माँग है कि कम कर्ज़ लेने के फैसले का मूल्यांकन, खर्च और भुगतान की जवाबदेही के साथ किया जाए।
क्या होगा आगे
थेन्नारासु ने माँग की है कि TVK सरकार पूंजीगत खर्च और ठेकेदारों के बकाये पर एक पारदर्शी बयान जारी करे। उनका कहना है कि इसके बिना यह नहीं कहा जा सकता कि उधारी में कमी वास्तव में बेहतर वित्त प्रबंधन को दर्शाती है, या महज़ ज़रूरी विकास खर्चों को टालने का नतीजा है।