20 अक्टूबर 2026
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DMK नेता थेन्नारासु का तमिलनाडु सरकार पर सवाल: कम उधारी = विकास ठप और बिल बकाया?

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DMK नेता थेन्नारासु का तमिलनाडु सरकार पर सवाल: कम उधारी = विकास ठप और बिल बकाया?

सारांश

तमिलनाडु की TVK सरकार ने उधारी में 21% कमी को वित्तीय अनुशासन बताया, लेकिन डीएमके नेता थंगम थेन्नारासु ने पूछा — क्या यह बचत है या विकास खर्च टालने की चाल? ₹48,000 करोड़ के तीसरी तिमाही के कर्ज़ कार्यक्रम ने सवालों की आग और तेज़ कर दी।

मुख्य बातें

डीएमके विधायक और पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु ने 20 अक्टूबर 2026 को TVK सरकार के वित्तीय प्रबंधन के दावे को चुनौती दी।
अप्रैल-सितंबर 2026 में सरकारी प्रतिभूतियों से उधारी घटकर ₹40,500 करोड़ रही, जो एक साल पहले ₹51,300 करोड़ थी — 21% की कमी।
थेन्नारासु ने आरोप लगाया कि राजस्व प्राप्तियाँ बजट अनुमान से कम रहीं और टेंडर रद्द होने से निर्माण कार्य ठप हुए।
अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही में ₹48,000 करोड़ उधार लेने का प्रस्ताव, पिछली तिमाही के ₹23,500 करोड़ से दोगुना से अधिक।
CAG के अनंतिम आँकड़ों के अनुसार अप्रैल-सितंबर 2025 में पूंजीगत परियोजनाओं पर ₹13,002.22 करोड़ खर्च हुए थे — इस वर्ष के आँकड़े अभी सार्वजनिक नहीं।
पूर्व मंत्री ने माँग की कि सरकार पूंजीगत खर्च और ठेकेदारों के बकाये पर पारदर्शी बयान जारी करे।

डीएमके विधायक और तमिलनाडु के पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को राज्य की TVK सरकार के बेहतर वित्तीय प्रबंधन के दावे को चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि अप्रैल-सितंबर 2026 में उधारी में 21 प्रतिशत की कमी, जरूरी विकास कार्यों पर खर्च टालने और ठेकेदारों के बिलों के भुगतान में देरी की आड़ हो सकती है।

उधारी में कमी के सरकारी दावे पर विवाद

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) के ज़रिए ली गई उधारी घटकर ₹40,500 करोड़ रह गई, जबकि एक वर्ष पूर्व इसी अवधि में यह ₹51,300 करोड़ थी। सरकार ने इसे वित्तीय अनुशासन का प्रमाण बताया।

थेन्नारासु ने इस दावे को अपर्याप्त करार देते हुए कहा कि केवल उधारी घटाने से बेहतर वित्तीय प्रबंधन साबित नहीं होता। उनके अनुसार, सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या विकास परियोजनाओं पर खर्च जारी रहा और पूर्ण कार्यों का भुगतान समय पर किया गया।

पूंजीगत व्यय और बकाया भुगतान पर सवाल

पूर्व वित्त मंत्री ने सरकार से अप्रैल-सितंबर 2026 की अवधि के विस्तृत खर्च के आँकड़े, नए बुनियादी ढाँचे में किए गए निवेश की जानकारी, और डीएमके शासनकाल में शुरू की गई परियोजनाओं के लंबित भुगतानों का खुलासा करने की माँग की।

उन्होंने तुलनात्मक संदर्भ देते हुए बताया कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के अनंतिम मासिक खातों के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2025 के बीच मेट्रो रेल कार्यों सहित विभिन्न पूंजीगत परियोजनाओं पर ₹13,002.22 करोड़ खर्च हुए थे। उन्होंने सीधा सवाल किया — “क्या बकाया भुगतान को बचत माना जा सकता है?”

तीसरी तिमाही में कर्ज़ कार्यक्रम पर चिंता

थेन्नारासु ने अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए सरकार के ₹48,000 करोड़ उधार लेने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह राशि पिछली तिमाही (जुलाई-सितंबर) में लिए गए ₹23,500 करोड़ से दोगुने से भी अधिक है।

उनका आरोप है कि राजस्व प्राप्तियाँ बजट के अनुमानों से कम रहीं, जिससे पूंजीगत व्यय बनाए रखना प्रशासन के लिए कठिन हो गया। गौरतलब है कि डीएमके सरकार ने अपने 2025-26 के बजट में पूंजीगत व्यय हेतु ₹57,231 करोड़ आवंटित किए थे।

विकास कार्य ठप होने के आरोप

थेन्नारासु ने दावा किया कि हज़ारों करोड़ रुपए के टेंडर रद्द कर दिए गए, निर्माण कार्य रुक गए और सड़कों की हालत बिगड़ी। उनके अनुसार, इन सबके चलते हज़ारों लोगों की आजीविका पर असर पड़ा।

यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु सरकार अपनी वित्तीय पारदर्शिता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक छवि बनाने की कोशिश में है। थेन्नारासु की माँग है कि कम कर्ज़ लेने के फैसले का मूल्यांकन, खर्च और भुगतान की जवाबदेही के साथ किया जाए।

क्या होगा आगे

थेन्नारासु ने माँग की है कि TVK सरकार पूंजीगत खर्च और ठेकेदारों के बकाये पर एक पारदर्शी बयान जारी करे। उनका कहना है कि इसके बिना यह नहीं कहा जा सकता कि उधारी में कमी वास्तव में बेहतर वित्त प्रबंधन को दर्शाती है, या महज़ ज़रूरी विकास खर्चों को टालने का नतीजा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर ठेकेदारों का बकाया बढ़ाते रहना। तीसरी तिमाही में ₹48,000 करोड़ के कर्ज़ की योजना, पहली छमाही की 'बचत' की कहानी को और जटिल बनाती है। असली परीक्षा यह है कि सरकार CAG-प्रमाणित खर्च और भुगतान डेटा कब सार्वजनिक करती है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थंगम थेन्नारासु ने तमिलनाडु सरकार पर क्या आरोप लगाए?
थेन्नारासु ने आरोप लगाया कि TVK सरकार की उधारी में 21% कमी, वास्तव में विकास कार्यों पर खर्च टालने और ठेकेदारों के बिलों का भुगतान न करने का नतीजा हो सकती है। उन्होंने सरकार से पूंजीगत व्यय और लंबित भुगतानों का पारदर्शी विवरण देने की माँग की।
तमिलनाडु सरकार की उधारी में कितनी कमी आई?
अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान सरकारी प्रतिभूतियों के ज़रिए उधारी घटकर ₹40,500 करोड़ रह गई, जो एक साल पहले की समान अवधि में ₹51,300 करोड़ थी — यानी लगभग 21% की गिरावट। सरकार ने इसे बेहतर वित्तीय प्रबंधन का प्रमाण बताया।
तीसरी तिमाही के कर्ज़ कार्यक्रम पर क्या चिंता जताई गई?
थेन्नारासु ने बताया कि अक्टूबर-दिसंबर 2026 में सरकार ने ₹48,000 करोड़ उधार लेने का प्रस्ताव रखा है, जो पिछली तिमाही के ₹23,500 करोड़ से दोगुने से भी अधिक है। उनका कहना है कि यह पहली छमाही की 'बचत' की कहानी से मेल नहीं खाता।
CAG के आँकड़ों में पिछले वर्ष पूंजीगत खर्च कितना था?
CAG के अनंतिम मासिक खातों के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2025 के बीच मेट्रो रेल कार्यों सहित विभिन्न पूंजीगत परियोजनाओं पर ₹13,002.22 करोड़ खर्च हुए थे। थेन्नारासु ने माँग की है कि इस वर्ष की समान अवधि के आँकड़े भी सार्वजनिक किए जाएँ।
थेन्नारासु की मुख्य माँगें क्या हैं?
उन्होंने TVK सरकार से अप्रैल-सितंबर 2026 के खर्च के आँकड़े, नए बुनियादी ढाँचे में निवेश की जानकारी, और डीएमके शासनकाल में शुरू परियोजनाओं के लंबित भुगतानों का खुलासा करने की माँग की। साथ ही, पूंजीगत खर्च और ठेकेदारों के बकाये पर पारदर्शी बयान जारी करने को कहा।
राष्ट्र प्रेस
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