सीपीआई नेता एनी राजा का सवाल: अपराधियों को चुनाव लड़ने की राहत, सीएए विरोधियों को जेल क्यों?
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) की वरिष्ठ नेता एनी राजा ने 20 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार और न्याय व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए — एक हाईकोर्ट द्वारा हत्या के मामले में सजायाफ्ता अपराधी को चुनाव लड़ने की अनुमति देने और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) विरोधी आंदोलन में शामिल लोगों को रिहाई न मिलने के विरोधाभास को उजागर करते हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार सीएए जैसे कानूनों के ज़रिए संविधान को नष्ट करने का प्रयास कर रही है। एनी राजा ने यह बयान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान के जवाब में भी दिया।
हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल
एनी राजा ने कहा कि अखबारों में यह खबर है कि एक हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में दोषसिद्ध अपराधी को आगामी चुनाव में हिस्सा लेने की अनुमति देते हुए उसकी सजा पर राहत दी है। उन्होंने इसकी तुलना सीजेपी (सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस) के उन कार्यकर्ताओं से की जो जनवाद और धर्मनिरपेक्षता बचाने के लिए आंदोलन में उतरे, किंतु जिन्हें अभी तक रिहाई नहीं मिली है।
उन्होंने कहा, 'सवाल यह है कि चुनाव और वोट बहुत महत्वपूर्ण हैं, तो उन्हें बचाने के लिए जो आंदोलन में निकला था, उसे रिहाई नहीं मिल रही। हमें फिर देखना है कि हम किस देश में रह रहे हैं।' एनी राजा ने माँग की कि इन लोगों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।
भागवत के बयान पर पलटवार
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान का उल्लेख करते हुए एनी राजा ने स्पष्ट किया कि देश में चल रहा आंदोलन देश को तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष दस्तावेज़ है और इसे खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने सीएए को एक बड़े 'हथियार' के रूप में इस्तेमाल किया है।
उन्होंने भागवत को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें देश के संविधान, देशवासियों, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता में विश्वास होना चाहिए और आंदोलन की 'वास्तविक माँगों' पर चुप्पी साधना उचित नहीं है।
संसद और श्रम कानूनों पर आरोप
सीपीआई नेता ने संसद के तथाकथित दुरुपयोग का भी मुद्दा उठाया। उनके अनुसार वर्षों की मेहनत और आंदोलनों के बल पर हासिल किए गए श्रम कानूनों — जिनमें लेबर कोड भी शामिल हैं — को दरकिनार कर मजदूर-विरोधी और जन-विरोधी कानून लाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे संसद और संविधान का दुरुपयोग बताया।
गौरतलब है कि सीएए के खिलाफ देश में व्यापक आंदोलन हुए थे, जिनमें बड़ी संख्या में लोग हिरासत में लिए गए थे। एनी राजा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की सरगर्मियाँ भी चल रही हैं।
लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया पर जोर
एनी राजा ने यह भी कहा कि देश में चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से आवश्यक बदलाव आ रहे हैं और आंदोलन भी इसी प्रक्रिया के पूरक हैं। उनके अनुसार संसदीय लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करना आज की सबसे ज़रूरी ज़िम्मेदारी है।
सीपीआई नेता के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ने की संभावना है, खासकर न्यायिक प्रक्रिया में समानता और सीएए विरोधी कार्यकर्ताओं की रिहाई के मसले पर।