रामगढ़ में डीआरडीओ कर्मी कमल किशोर महतो का शव पेड़ से लटका मिला, अवसाद से थे पीड़ित

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रामगढ़ में डीआरडीओ कर्मी कमल किशोर महतो का शव पेड़ से लटका मिला, अवसाद से थे पीड़ित

सारांश

बेंगलुरु में तैनात डीआरडीओ कर्मी कमल किशोर महतो छुट्टी पर अपने रामगढ़ स्थित पैतृक गाँव आए थे — लेकिन लौट नहीं सके। अवसाद और नींद न आने की शिकायत के बाद मंगलवार सुबह उनका शव पहाड़ी पर पेड़ से लटका मिला। पीछे छूट गए दो मासूम बच्चे और एक टूटा परिवार।

मुख्य बातें

कमल किशोर महतो , डीआरडीओ कर्मी, का शव मंगलवार सुबह रामगढ़ जिले के पतरातू थाना क्षेत्र में पेड़ से लटका मिला।
वे बेंगलुरु में तैनात थे और 19 अप्रैल से अवकाश पर अपने पैतृक गाँव तालाताड़ भुइयां टोला में थे।
परिजनों के अनुसार वे पिछले कुछ दिनों से गंभीर मानसिक अवसाद और नींद न आने की समस्या से पीड़ित थे।
सोमवार रात 11 बजे उन्हें अकेले टहलते देखा गया; रात 2 बजे परिजनों को उनके गायब होने का पता चला।
वे अपने पीछे पत्नी और 6 व 4 वर्ष के दो बेटों को छोड़ गए हैं।
पतरातू थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा; जाँच जारी है।

झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू थाना क्षेत्र अंतर्गत तालाताड़ भुइयां टोला निवासी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के कर्मी कमल किशोर महतो का शव मंगलवार, 20 मई की सुबह उनके घर के निकट एक पहाड़ी पर पेड़ से लटकी अवस्था में बरामद किया गया। बेंगलुरु में तैनात महतो 19 अप्रैल को अवकाश लेकर अपने पैतृक गाँव आए हुए थे और परिजनों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से गंभीर मानसिक अवसाद से जूझ रहे थे।

घटनाक्रम: रात से सुबह तक

स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, सोमवार की रात करीब 11 बजे कमल किशोर को गाँव में अकेले टहलते देखा गया था। रात करीब 2 बजे परिजनों की अचानक नींद खुली तो वे उन्हें बिस्तर पर न पाकर चिंतित हो गए। परिवारवालों ने तत्काल तलाश शुरू की, परंतु घने अँधेरे के कारण उनका कोई सुराग नहीं मिल सका।

मंगलवार की सुबह जब ग्रामीण और परिजन पुनः खोज में निकले, तो घर के समीप पहाड़ी पर एक पेड़ से फंदे के सहारे उनका शव लटका हुआ मिला। सूचना मिलते ही पतरातू थाना पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुँची और शव को नीचे उतारकर अपने कब्जे में लिया।

मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति

परिजनों ने बताया कि कमल किशोर पिछले कुछ दिनों से गंभीर अवसाद (डिप्रेशन) से पीड़ित थे। वे अक्सर परिवार के सदस्यों से नींद न आने की शिकायत करते थे और मानसिक बेचैनी के चलते काफी परेशान रहते थे। विशेषज्ञों के अनुसार, नींद न आना और सामाजिक अलगाव गहरे अवसाद के गंभीर संकेत होते हैं।

पीछे छूटा परिवार

कमल किशोर अपने पीछे अपनी पत्नी और 6 वर्ष4 वर्ष की आयु के दो मासूम बेटों को छोड़ गए हैं। इस दुखद घटना के बाद भुइयां टोला में शोक का माहौल है और पूरे गाँव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।

पुलिस जाँच जारी

पतरातू थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। पुलिस मामले की गहनता से जाँच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, अभी तक किसी संदिग्ध परिस्थिति का संकेत नहीं मिला है, लेकिन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जाँच की जा रही है।

यह घटना कार्यस्थल के मानसिक दबाव और कर्मचारी कल्याण की ज़रूरत पर एक बार फिर ध्यान आकर्षित करती है। संबंधित विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संस्थागत जागरूकता की कमी को उजागर करता है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कमल किशोर महतो कौन थे और उनका शव कहाँ मिला?
कमल किशोर महतो झारखंड के रामगढ़ जिले के तालाताड़ भुइयां टोला के निवासी और डीआरडीओ में कार्यरत कर्मी थे, जिनकी पोस्टिंग बेंगलुरु में थी। उनका शव मंगलवार सुबह उनके घर के पास पहाड़ी पर एक पेड़ से लटका हुआ बरामद किया गया।
कमल किशोर महतो गाँव क्यों आए थे?
वे 19 अप्रैल को अवकाश लेकर अपने पैतृक गाँव आए थे। परिजनों के अनुसार वे पिछले कुछ दिनों से गंभीर मानसिक अवसाद और नींद न आने की समस्या से पीड़ित थे।
घटना की रात क्या हुआ था?
सोमवार की रात करीब 11 बजे उन्हें गाँव में अकेले टहलते देखा गया था। रात करीब 2 बजे परिजनों की नींद खुली तो वे उन्हें बिस्तर पर नहीं पाकर चिंतित हो गए और तलाश शुरू की, लेकिन अँधेरे के कारण कुछ पता नहीं चल सका।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
पतरातू थाना पुलिस सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची और शव को फंदे से नीचे उतारकर अपने कब्जे में लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा गया है और मामले की गहनता से जाँच जारी है।
कमल किशोर महतो के परिवार में कौन हैं?
वे अपने पीछे अपनी पत्नी और 6 वर्ष व 4 वर्ष की आयु के दो छोटे बेटों को छोड़ गए हैं। इस घटना से पूरे भुइयां टोला में शोक का माहौल है।
राष्ट्र प्रेस
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