डीआरआई का मुंबई एयरपोर्ट पर बड़ा एक्शन: दो तस्करी गिरोह ध्वस्त, ₹23.63 करोड़ का सोना जब्त, 8 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की मुंबई जोनल यूनिट ने छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ज़रिए संचालित सोने की तस्करी के दो संगठित गिरोहों का भंडाफोड़ किया है। इन अभियानों में 15.764 किलोग्राम 24-कैरेट विदेशी सोना — जिसकी अनुमानित बाज़ार कीमत ₹23.63 करोड़ है — जब्त किया गया और आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया।
ऑपरेशन स्काई वॉल्ट: अदीस अबाबा से आए यात्री रंगे हाथ पकड़े गए
23 और 24 जुलाई 2026 के बीच चलाए गए 'ऑपरेशन स्काई वॉल्ट' में डीआरआई अधिकारियों ने अदीस अबाबा से मुंबई पहुँचे तीन विदेशी यात्रियों को हिरासत में लिया। विमान की गहन तलाशी के दौरान 12.004 किलोग्राम सोने की छड़ें (गोल्ड बार) बरामद हुईं, जिनकी कीमत लगभग ₹18 करोड़ आँकी गई है।
जाँच में सामने आया कि आरोपी यात्रियों ने सोने की छड़ों को विमान के अंदर इस उद्देश्य से छिपाया था ताकि बाद में उन्हें बाहर निकाला जा सके — जो एक सुनियोजित तस्करी तंत्र की ओर इशारा करता है।
ऑपरेशन मिडास मॉप: सफाई कर्मचारी भी निकले तस्करी नेटवर्क का हिस्सा
22 और 23 जुलाई 2026 के बीच चलाए गए 'ऑपरेशन मिडास मॉप' में खुफिया सूचना के आधार पर डीआरआई ने विमान की सफाई करने वाले दो कर्मचारियों, एक यात्री और तस्करी गिरोह के दो अन्य सदस्यों को गिरफ्तार किया। इस ऑपरेशन में 3.76 किलोग्राम 24-कैरेट सोने का बुरादा — जिसे वैक्स के रूप में छिपाया गया था — बरामद हुआ। इसकी कीमत लगभग ₹5.63 करोड़ बताई गई है।
प्रारंभिक जाँच के अनुसार, एक यात्री ने दुबई से मुंबई आने वाले विमान के भीतर यह सोना छिपाया था। सफाई कर्मचारियों की भूमिका थी कि वे चुपके से इस अवैध माल को विमान से बाहर निकालें और एयरपोर्ट परिसर के बाहर प्रतीक्षारत गिरोह के सदस्यों तक पहुँचाएँ।
17 जुलाई की कार्रवाई से जुड़ा पृष्ठभूमि संदर्भ
गौरतलब है कि इससे पहले 17 जुलाई 2026 को भी डीआरआई ने एक अंतरराष्ट्रीय तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें तीन फिलीपीन नागरिक शामिल थे। उस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में हिमांशु उपाध्याय, मोहिद हसन सिद्दीकी और फिरोज सैयद (सभी मुंबई निवासी) के साथ-साथ फिलीपीन नागरिक लाकिम अलीमुदीन नासेर, बेनी लॉयड ओलिवो और क्रिस्टीन जॉय अंदाया पोर्नास्डोरो शामिल थे।
डीआरआई के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे एक बड़े तस्करी सिंडिकेट के लिए काम कर रहे थे, जो दुबई और बैंकॉक से आने वाले ट्रांजिट यात्रियों तथा एयरपोर्ट परिसर में कार्यरत कुछ व्यक्तियों की मिलीभगत से सोने की तस्करी करता था।
आगे की जाँच और डीआरआई का रुख
डीआरआई ने स्पष्ट किया है कि तस्करी सिंडिकेट के शेष सदस्यों की पहचान और इस नेटवर्क की व्यापक कड़ियों का पता लगाने के लिए जाँच जारी है। एजेंसी ने कहा कि ये अभियान संगठित सोना तस्करी नेटवर्क के विरुद्ध खुफिया-आधारित कार्रवाई के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं, जो देश की आर्थिक सुरक्षा और वित्तीय प्रणाली की अखंडता की रक्षा के लिए अनिवार्य है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में सोने की तस्करी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और हवाई अड्डों पर अंदरूनी मिलीभगत की घटनाएँ सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।