12 अक्टूबर 2026
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कोलकाता में ईडी का चिटफंड घोटाले पर बड़ा एक्शन, आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

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कोलकाता में ईडी का चिटफंड घोटाले पर बड़ा एक्शन, आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

सारांश

ईडी ने कोलकाता में चिटफंड घोटाले की जाँच में एक और बड़ा कदम उठाया है — टॉलीगंज और शरत बोस रोड समेत आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी। सीएपीएफ की तैनाती और पिछले महीने की कार्रवाई से मिले सुरागों के आधार पर यह ऑपरेशन पश्चिम बंगाल में केंद्रीय एजेंसी की बढ़ती सक्रियता का हिस्सा है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 12 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में चिटफंड घोटाले के सिलसिले में आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
तलाशी अभियान मुख्य रूप से दक्षिण कोलकाता के टॉलीगंज और शरत बोस रोड इलाकों में चलाया गया।
ईडी की टीमों के साथ सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) के जवान भी मौजूद थे।
कथित तौर पर निवेशकों से जुटाई गई रकम को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में अवैध रूप से लगाया गया; कंपनी का कामकाज अन्य राज्यों तक भी फैला था।
यह कार्रवाई पिछले महीने हुई छापेमारी में मिले दस्तावेजों और जानकारी के आधार पर की गई।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में एक बड़े चिटफंड घोटाले के सिलसिले में आठ अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई पिछले महीने हुए ऑपरेशन में मिली जानकारी के आधार पर शुरू की गई।

मुख्य घटनाक्रम

ईडी की टीमों के साथ इस पूरे अभियान में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) के जवान भी तैनात थे। छापेमारी मुख्य रूप से दक्षिण कोलकाता के इलाकों में हुई, जिनमें टॉलीगंज और शरत बोस रोड शामिल हैं। सुबह से शुरू हुआ यह तलाशी अभियान कई घंटों तक जारी रहा।

घोटाले की पृष्ठभूमि

सूत्रों के मुताबिक, एक चिटफंड कंपनी ने हजारों निवेशकों को आकर्षक रिटर्न का वादा करके अपनी मल्टीलेवल मार्केटिंग स्कीम में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में कुछ निवेशकों को वादे के अनुरूप रिटर्न मिला, जिससे वे और अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित हुए। लेकिन धीरे-धीरे रिटर्न मिलना बंद हो गया और निवेशकों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।

जाँचकर्ताओं के अनुसार, निवेशकों से एकत्र धन को कथित तौर पर कोलकाता के कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में अवैध रूप से लगाया गया। ये प्रोजेक्ट्स राज्य की पिछली सत्ताधारी सरकार के करीबी और प्रभावशाली प्रमोटरों द्वारा संचालित बताए जा रहे हैं।

पिछली छापेमारी से जुड़ाव

गौरतलब है कि पिछले महीने भी ईडी ने इसी वित्तीय धोखाधड़ी मामले में संबंधित कंपनी के कई कार्यालयों और अधिकारियों के आवासों पर छापेमारी की थी। उस दौरान जाँच अधिकारियों ने कंपनी के विभिन्न लेनदेन और बैंकिंग दस्तावेजों की जाँच की। पता चला कि कंपनी ने अपना कामकाज कोलकाता से शुरू कर धीरे-धीरे अन्य राज्यों तक भी फैला लिया था।

सूत्रों के अनुसार, उसी ऑपरेशन में मिली जानकारी और दस्तावेजों के आधार पर सोमवार को नए सिरे से तलाशी अभियान चलाया गया।

ईडी की बढ़ती सक्रियता

यह ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ महीनों से ईडी पश्चिम बंगाल में मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक लोन फ्रॉड जैसे कई मामलों में लगातार सक्रिय है। केंद्रीय जाँच एजेंसी की ओर से नियमित अंतराल पर राज्य में छापेमारी अभियान चलाए जा रहे हैं।

आगे क्या होगा

सोमवार की छापेमारी में बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जाँच के बाद ईडी के संभावित गिरफ्तारी या सम्पत्ति कुर्की के आदेश जारी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला पश्चिम बंगाल में चल रहे कई वित्तीय धोखाधड़ी मामलों की जाँच की कड़ी में एक और अहम पड़ाव साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों से बेपरवाह नहीं है। उल्लेखनीय है कि रियल एस्टेट में फंड डायवर्जन और 'पिछली सत्ताधारी सरकार से करीबी प्रमोटरों' का जिक्र इस मामले को महज एक वित्तीय धोखाधड़ी से ऊपर उठाता है। असली सवाल यह है कि क्या जाँच सिर्फ दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने तक सीमित रहेगी, या वास्तविक राजनीतिक-प्रशासनिक जवाबदेही तय होगी — चिटफंड घोटाले पश्चिम बंगाल में नए नहीं हैं, लेकिन दोषसिद्धि की दर हमेशा छापों की संख्या से बहुत पीछे रही है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता में ईडी ने चिटफंड घोटाले में किन जगहों पर छापेमारी की?
ईडी ने 12 अक्टूबर 2026 को मुख्य रूप से दक्षिण कोलकाता के टॉलीगंज और शरत बोस रोड समेत कुल आठ ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान सीएपीएफ जवान भी तैनात थे।
इस चिटफंड घोटाले में क्या हुआ था?
एक चिटफंड कंपनी ने मल्टीलेवल मार्केटिंग स्कीम के तहत हजारों निवेशकों को अच्छे रिटर्न का वादा करके पैसा जुटाया। शुरू में कुछ निवेशकों को रिटर्न मिला, लेकिन बाद में भुगतान बंद हो गया और उनकी रकम कोलकाता के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में कथित तौर पर अवैध रूप से लगा दी गई।
ईडी ने सोमवार को नई छापेमारी क्यों की?
पिछले महीने हुई छापेमारी में मिले दस्तावेजों और बैंकिंग लेनदेन की जाँच के दौरान नई जानकारी मिली थी। उसी आधार पर ईडी ने 12 अक्टूबर को दूसरा बड़ा तलाशी अभियान शुरू किया।
इस घोटाले में पश्चिम बंगाल की राजनीति से क्या संबंध बताया जा रहा है?
सूत्रों के अनुसार, जिन रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में कथित तौर पर धन लगाया गया, वे राज्य की पिछली सत्ताधारी सरकार के करीबी और प्रभावशाली प्रमोटरों द्वारा संचालित बताए जा रहे हैं। हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
पश्चिम बंगाल में ईडी की हालिया सक्रियता का दायरा क्या है?
पिछले कुछ महीनों से ईडी पश्चिम बंगाल में मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक लोन फ्रॉड के कई मामलों में नियमित रूप से छापेमारी कर रही है। यह चिटफंड मामला उसी व्यापक जाँच अभियान का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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