अल अलामीन घोषणापत्र: मिस्र, सूडान, इरिट्रिया और सोमालिया ने लाल सागर व नील नदी पर एकजुटता दिखाई
सारांश
मुख्य बातें
मिस्र, सूडान, इरिट्रिया और सोमालिया के शीर्ष नेताओं ने 5 अक्टूबर 2026 को मिस्र के न्यू अलामीन शहर में एक महत्वपूर्ण शिखर बैठक के बाद 'अल अलामीन संयुक्त घोषणापत्र' जारी किया, जिसमें राष्ट्रीय संप्रभुता, लाल सागर के प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय जल अधिकारों पर साझा रुख स्पष्ट किया गया। यह घोषणापत्र ऐसे समय में आया है जब हॉर्न ऑफ अफ्रीका और लाल सागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक दबाव तेजी से बढ़ रहे हैं।
शिखर बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
बैठक में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इरिट्रिया के राष्ट्रपति इसायस अफवर्की, सोमालिया के राष्ट्रपति हसन शेख मोहम्मद और सूडान की ट्रांजिशनल सॉवरेन काउंसिल के अध्यक्ष अब्देल फतह अल-बुरहान ने भाग लिया। चारों नेताओं ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया और राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के रास्तों पर सहमति बनाई।
घोषणापत्र के मुख्य बिंदु
घोषणापत्र में चारों देशों ने 'किसी भी बहाने' से क्षेत्रीय देशों के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप का कड़ा विरोध किया। नेताओं ने स्पष्ट किया कि लाल सागर से जुड़े मामलों का प्रबंधन केवल उसके तटीय देशों की जिम्मेदारी है और इस पर किसी बाहरी शक्ति का अधिकार नहीं है।
घोषणापत्र में नील नदी सहित एकाधिक देशों से होकर बहने वाली नदियों के मामले में अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। नेताओं ने 'ऐसे किसी भी एकतरफा कदम' का पूरी तरह विरोध किया जिससे नील नदी के निचले हिस्से में बसे देशों के मौजूदा जल उपयोग को नुकसान पहुँचे — यह संकेत स्पष्ट रूप से इथियोपिया द्वारा बनाए जा रहे ग्रैंड इथियोपियन रेनेसाँ डैम (GERD) की दिशा में माना जा रहा है।
सूडान और सोमालिया पर साझा रुख
सूडान के संकट पर चारों नेताओं ने देश की एकता, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संस्थाओं के समर्थन की बात दोहराई। साथ ही सूडान में किसी भी 'समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था या संस्था' बनाने के प्रयासों का विरोध किया गया, जो वहाँ जारी गृहयुद्ध की पृष्ठभूमि में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
इसी तरह नेताओं ने कथित तौर पर तथाकथित 'सोमालीलैंड' को किसी भी रूप में मान्यता या समर्थन देने का विरोध किया, जो सोमाली क्षेत्रीय अखंडता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। गौरतलब है कि इथियोपिया ने हाल के महीनों में सोमालीलैंड के साथ समझौते की खबरें सामने आने के बाद यह क्षेत्रीय विवाद और तीखा हो गया था।
क्षेत्रीय संदर्भ और महत्व
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब मिस्र हॉर्न ऑफ अफ्रीका और लाल सागर क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक उपस्थिति मजबूत करने की लगातार कोशिश कर रहा है। नेताओं ने इस सिद्धांत पर सहमति जताई कि किसी देश के कदम से पड़ोसी देश को नुकसान नहीं होना चाहिए और ऐसे मामलों में पूर्व सूचना, संवाद और आपसी सहमति के जरिए सहयोग अनिवार्य है।
यह घोषणापत्र केवल चार देशों के बीच द्विपक्षीय दस्तावेज़ नहीं, बल्कि एक बहुपक्षीय रणनीतिक संकेत है — जो यह बताता है कि ये देश अपने क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए मिलकर आगे बढ़ने को तैयार हैं। आने वाले हफ्तों में इन घोषणाओं को अमल में लाने की दिशा में ठोस कदमों पर सबकी नज़र रहेगी।