7 अक्टूबर 2026
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चुनाव आयोग में मतभेद नई बात नहीं: पूर्व अधिकारी मोहम्मद अमीन का बड़ा बयान

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चुनाव आयोग में मतभेद नई बात नहीं: पूर्व अधिकारी मोहम्मद अमीन का बड़ा बयान

सारांश

चुनाव आयोग के पूर्व अधिकारी मोहम्मद अमीन ने विपक्ष के हमलों को संदर्भहीन बताया — कहा, गिल से लवासा तक मतभेद पहले भी हुए। लेकिन असली सवाल यह है कि मामला सर्वोच्च न्यायालय तक क्यों पहुँचा, और आयोग ने खुद अब तक सफाई क्यों नहीं दी।

मुख्य बातें

मोहम्मद अमीन (पूर्व संयुक्त निदेशक, चुनाव आयोग) ने 7 अक्टूबर 2026 को कहा कि आयोग में मतभेद कोई नई घटना नहीं है।
अशोक लवासा ने सुनील अरोड़ा के कार्यकाल में असहमति के कारण पद से इस्तीफा दिया था — अमीन ने इसे ऐतिहासिक उदाहरण के रूप में पेश किया।
आयोग में निर्णय सर्वसम्मति से होते हैं; न बनने पर दो बनाम एक के बहुमत से फैसला लिया जाता है।
AAP सांसद संजय सिंह की पत्नी का नाम दो स्थानों पर दर्ज होने के कारण एक जगह से हटाया गया — अमीन ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया।
मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है; अदालत ने आयोग से बैठकों की फाइलें और कार्यवाही विवरण माँगे हैं।
अमीन ने आयोग से अपील की कि सभी सदस्य सार्वजनिक रूप से एकजुटता का संदेश दें।

चुनाव आयोग के पूर्व संयुक्त निदेशक और चीफ ऑफ प्रोटोकॉल मोहम्मद अमीन ने 7 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट कहा कि भारतीय चुनाव आयोग के भीतर मतभेद और असहमति कोई नई परिघटना नहीं है — यह संस्था के इतिहास में पहले भी सामने आती रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों के लगातार हमलों के बीच अमीन का यह बयान महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।

ऐतिहासिक संदर्भ: गिल से लेकर लवासा तक

मोहम्मद अमीन ने कहा, 'आयोग के भीतर मतभेदों का इतिहास नया नहीं है। पहले भी कई अवसरों पर आयुक्तों के बीच वैचारिक टकराव सामने आते रहे हैं, चाहे वह मिस्टर गिल के कार्यकाल का दौर रहा हो या अन्य आयुक्तों से जुड़े मामले हों।'

उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि सुनील अरोड़ा के मुख्य चुनाव आयुक्त रहते हुए अशोक लवासा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जो आपसी असहमति का ही परिणाम था। गौरतलब है कि यह घटना भी उस समय मीडिया में बड़ी खबर बनी थी।

निर्णय प्रक्रिया: सर्वसम्मति बनाम बहुमत

अमीन ने स्पष्ट किया कि मतभेदों के बावजूद आयोग में अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लेने की परंपरा रही है। यदि सहमति नहीं बनती है, तो दो बनाम एक के बहुमत के आधार पर फैसला लिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले दो सदस्यीय आयोग की व्यवस्था भी लागू की गई थी, लेकिन वर्तमान जैसा विवाद इतने बड़े पैमाने पर पहली बार सामने आया है।

संजय सिंह की पत्नी के नाम का मामला: सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया

आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह की पत्नी के नाम को मतदाता सूची से हटाए जाने के विवाद पर अमीन ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले उनका नाम साउथ एवेन्यू और सुल्तानपुर — दो स्थानों पर दर्ज था। उन्होंने बताया कि आयोग के केंद्रीय सर्वर में समान डेटा का मिलान कर दोहरी प्रविष्टियाँ हटाना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। 'इसे लेकर अनावश्यक हंगामा किया गया,' उन्होंने कहा।

सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन मामला

अमीन ने बताया कि यह मामला पहले ही सर्वोच्च न्यायालय में दायर किया जा चुका है और शीर्ष अदालत ने आयोग को उस दौरान हुई बैठकों की सभी फाइलें और कार्यवाही विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि चूँकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए आरोप-प्रत्यारोप की बजाय न्यायालय के फैसले का इंतज़ार करना बेहतर होगा।

आयोग को एकजुटता का संदेश देना चाहिए

पूर्व अधिकारी ने कहा कि हर मतदाता सच्चाई जानना चाहता है, क्योंकि लोकतंत्र में असली हितधारक मतदाता हैं और चुनाव आयोग उनके प्रति जवाबदेह है। उन्होंने आयोग से अपील की कि 'सभी सदस्य एक मंच पर आकर एकजुटता के साथ देश को संबोधित करें।' उनका यह भी कहना था कि राजनीतिक दल आयोग के लिए द्वितीयक हितधारक हैं और प्रेस अथवा मीडिया के माध्यम से आंतरिक खबरों का बाहर आना देशहित में नहीं है। आने वाले दिनों में सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो आयोग ने अब तक स्वयं सार्वजनिक स्पष्टीकरण क्यों नहीं दिया? सर्वोच्च न्यायालय का फाइलें माँगना यह संकेत देता है कि मामला महज राजनीतिक शोर नहीं है। संस्थागत चुप्पी और बाहरी आवाज़ें — यही संयोजन लोकतंत्र में आयोग जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाता है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद क्या है?
विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आयोग के भीतर मतभेद और पक्षपात के आरोप लगा रहे हैं। यह मामला अब सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है, जहाँ अदालत ने आयोग से संबंधित बैठकों की फाइलें और कार्यवाही विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
पूर्व अधिकारी मोहम्मद अमीन ने क्या कहा?
चुनाव आयोग के पूर्व संयुक्त निदेशक मोहम्मद अमीन ने कहा कि आयोग में मतभेद और असहमति कोई नई बात नहीं है — गिल और अशोक लवासा के कार्यकाल में भी ऐसे टकराव हुए थे। उन्होंने विपक्ष पर एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया को अनावश्यक विवाद बनाने का आरोप लगाया।
अशोक लवासा का इस्तीफा चुनाव आयोग से क्यों हुआ था?
अशोक लवासा ने सुनील अरोड़ा के मुख्य चुनाव आयुक्त रहते हुए पद से इस्तीफा दिया था, जो आपसी असहमति का परिणाम बताया जाता है। मोहम्मद अमीन ने इस घटना को इस बात के प्रमाण के रूप में उद्धृत किया कि आयोग में वैचारिक टकराव पहले भी होते रहे हैं।
AAP सांसद संजय सिंह की पत्नी का नाम मतदाता सूची से क्यों हटाया गया?
दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले संजय सिंह की पत्नी का नाम साउथ एवेन्यू और सुल्तानपुर — दो स्थानों पर मतदाता सूची में दर्ज था। आयोग के केंद्रीय सर्वर में दोहरी प्रविष्टि पाए जाने पर एक स्थान से नाम हटाया गया, जो नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है।
चुनाव आयोग का मामला सर्वोच्च न्यायालय में कहाँ तक पहुँचा है?
सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर होने के बाद शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को आदेश दिया है कि वह संबंधित बैठकों की सभी फाइलें और कार्यवाही विवरण प्रस्तुत करे। मामला अभी विचाराधीन है और अगली सुनवाई पर न्यायालय का निर्देश इस विवाद की दिशा तय करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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