30 सितंबर 2026
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ECI के पूर्व अधिकारी मोहम्मद अमीन बोले — कैबिनेट सचिव को पत्र प्रोटोकॉल के विरुद्ध, राष्ट्रपति या कानून मंत्रालय को होना चाहिए था संबोधित

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ECI के पूर्व अधिकारी मोहम्मद अमीन बोले — कैबिनेट सचिव को पत्र प्रोटोकॉल के विरुद्ध, राष्ट्रपति या कानून मंत्रालय को होना चाहिए था संबोधित

सारांश

ECI के पूर्व संयुक्त निदेशक मोहम्मद अमीन ने साफ कहा — चुनाव आयुक्तों का कैबिनेट सचिव को पत्र लिखना संवैधानिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। सही रास्ता था राष्ट्रपति या कानून मंत्रालय। यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब ECI की निष्पक्षता पर विपक्ष के सवाल पहले से खड़े हैं।

मुख्य बातें

ECI के पूर्व संयुक्त निदेशक मोहम्मद अमीन ने 30 सितंबर 2026 को कहा कि कैबिनेट सचिव को पत्र लिखना प्रोटोकॉल के विरुद्ध था।
उनके अनुसार पत्र कानून और न्याय मंत्रालय या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित होना चाहिए था।
मीडिया रिपोर्टों में दावा था कि आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और ज्ञानेश कुमार ने ECI के कई फैसलों पर आपत्ति जताई थी।
विशेष गहन संशोधन (SIR) पहले 2004 में हुई थी, फिर 2025-26 में बिहार और पश्चिम बंगाल में।
अमीन ने ECI से माँग की कि वह सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष स्पष्ट करे ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
विपक्ष इस प्रकरण का उपयोग अपने पहले के आरोपों को पुष्ट करने के लिए करेगा — अमीन की चेतावनी।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के पूर्व संयुक्त निदेशक मोहम्मद अमीन ने 30 सितंबर 2026 को कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और ज्ञानेश कुमार द्वारा कैबिनेट सचिव को लिखे गए कथित पत्र संवैधानिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन हैं। उनके अनुसार, यदि पत्र लिखना आवश्यक था तो उसे कानून और न्याय मंत्रालय अथवा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित किया जाना चाहिए था।

विवाद की पृष्ठभूमि

इससे पहले एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने ECI के कई निर्णयों पर आपत्ति दर्ज कराई थी, जो कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे। इन रिपोर्टों के बाद आयोग के भीतर आंतरिक मतभेदों की चर्चा तेज हो गई।

भारत निर्वाचन आयोग ने इन खबरों को शांत करने के लिए एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की और स्पष्ट किया कि अधिकारियों ने किस संदर्भ में कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में आगामी राज्य विधानसभा चुनावों की तैयारी जोरों पर है।

मोहम्मद अमीन की मुख्य दलीलें

पूर्व संयुक्त निदेशक मोहम्मद अमीन ने कहा, 'जो भी पत्र लिखे गए हैं, अगर लिखना ही था तो उन्हें कानून और न्याय मंत्रालय को लिखना चाहिए था क्योंकि संशोधन का अधिकार उसी मंत्रालय के पास है।' उन्होंने आगे कहा कि यदि कैबिनेट सचिव को कुछ भी लिखा गया था तो यह सीधे-सीधे प्रोटोकॉल के विरुद्ध है।

अमीन के अनुसार, यदि चुनाव आयुक्त किसी बात से असहमत थे, तो उचित मार्ग यह था कि वे राष्ट्रपति को पत्र लिखते या उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलते। उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'कुछ गलत जानकारी भी फैली है और पूरे आयोग को देश के सामने आकर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए — तभी जनता को विश्वास होगा कि ECI पारदर्शी तरीके से काम कर रहा है और किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ा है।'

मतदाता सूची के विशेष संशोधन (SIR) पर स्थिति

मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के बारे में अमीन ने बताया कि यह प्रक्रिया पहले 2004 में संचालित हुई थी और बाद में 2025-26 में बिहार तथा पश्चिम बंगाल में इसे दोहराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही यह मत व्यक्त कर चुका है कि SIR किस प्रकार आयोजित किया जाए, यह निर्धारित करना ECI का संवैधानिक अधिकार है।

हालाँकि, अमीन ने यह भी जोड़ा कि यदि प्रक्रिया में कोई अनियमितता पाई जाती है तो सर्वोच्च न्यायालय इस पर गौर कर सकता है और ECI भी इस मामले को पुनः विचार में ले सकता है।

राजनीतिक असर और विपक्ष की स्थिति

ECI के भीतर मतभेदों की खबरों पर अमीन ने कहा कि विपक्ष इस स्थिति का उपयोग अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए करेगा और यह तर्क देगा कि उसके द्वारा पहले उठाए गए मुद्दे सही थे।

यह ऐसे समय में आया है जब कई विपक्षी दल ECI की निर्णय-प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग को लेकर पहले से सक्रिय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस पूरे प्रकरण पर एक आधिकारिक और विस्तृत सफाई जरूरी है।

आगे क्या होगा

फिलहाल ECI की ओर से कोई आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस निर्धारित नहीं की गई है। अमीन का सुझाव है कि पूरे आयोग को सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखना चाहिए। इस प्रकरण का असर आगामी चुनावों में मतदाताओं और राजनीतिक दलों के ECI पर भरोसे को प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो इसे खारिज नहीं किया जा सकता। असली चिंता यह है कि आंतरिक मतभेद सार्वजनिक होने से चुनावी प्रक्रिया में आम मतदाताओं का भरोसा कमजोर होता है, जो लोकतंत्र की नींव है। ECI ने प्रेस विज्ञप्ति से काम चलाया, लेकिन जब तक आयोग खुद सामने आकर पारदर्शी जवाब न दे, विपक्ष के आरोप राजनीतिक हवा पकड़ते रहेंगे। यह प्रकरण दिखाता है कि संवैधानिक संस्थाओं को न केवल निष्पक्ष होना चाहिए, बल्कि निष्पक्ष दिखना भी उतना ही ज़रूरी है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ECI में कैबिनेट सचिव को पत्र लिखने का विवाद क्या है?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और ज्ञानेश कुमार ने ECI के कुछ फैसलों पर आपत्ति जताते हुए कैबिनेट सचिव को पत्र लिखे थे। ECI के पूर्व अधिकारी मोहम्मद अमीन ने इसे संवैधानिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया है।
मोहम्मद अमीन के अनुसार पत्र किसे लिखा जाना चाहिए था?
मोहम्मद अमीन के अनुसार यदि पत्र लिखना आवश्यक था तो उसे कानून और न्याय मंत्रालय को संबोधित किया जाना चाहिए था, क्योंकि संशोधन का अधिकार उसी के पास है। वैकल्पिक रूप से, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखना या उनसे मिलना उचित होता।
मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन (SIR) क्या है और यह विवाद में क्यों है?
SIR मतदाता सूचियों की व्यापक समीक्षा की एक प्रक्रिया है जो 2004 में पहली बार हुई और फिर 2025-26 में बिहार व पश्चिम बंगाल में की गई। सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही कहा है कि SIR आयोजित करना ECI का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन प्रक्रिया में अनियमितता पाए जाने पर न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है।
ECI के आंतरिक विवाद का राजनीतिक असर क्या होगा?
मोहम्मद अमीन ने चेताया है कि विपक्षी दल इस प्रकरण का उपयोग अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए करेंगे और यह तर्क देंगे कि उनके द्वारा पहले उठाए गए मुद्दे सही साबित हो रहे हैं। इससे ECI की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले नैरेटिव को बल मिल सकता है।
ECI ने इस विवाद पर क्या कहा है?
भारत निर्वाचन आयोग ने आंतरिक मतभेदों की खबरों को शांत करने के लिए एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की और स्पष्ट किया कि अधिकारियों ने किस संदर्भ में कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था। हालाँकि पूर्व अधिकारी अमीन ने माँग की है कि आयोग सार्वजनिक रूप से विस्तृत पक्ष रखे।
राष्ट्र प्रेस
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