ECI के पूर्व अधिकारी मोहम्मद अमीन बोले — कैबिनेट सचिव को पत्र प्रोटोकॉल के विरुद्ध, राष्ट्रपति या कानून मंत्रालय को होना चाहिए था संबोधित
सारांश
मुख्य बातें
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के पूर्व संयुक्त निदेशक मोहम्मद अमीन ने 30 सितंबर 2026 को कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और ज्ञानेश कुमार द्वारा कैबिनेट सचिव को लिखे गए कथित पत्र संवैधानिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन हैं। उनके अनुसार, यदि पत्र लिखना आवश्यक था तो उसे कानून और न्याय मंत्रालय अथवा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित किया जाना चाहिए था।
विवाद की पृष्ठभूमि
इससे पहले एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने ECI के कई निर्णयों पर आपत्ति दर्ज कराई थी, जो कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे। इन रिपोर्टों के बाद आयोग के भीतर आंतरिक मतभेदों की चर्चा तेज हो गई।
भारत निर्वाचन आयोग ने इन खबरों को शांत करने के लिए एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की और स्पष्ट किया कि अधिकारियों ने किस संदर्भ में कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में आगामी राज्य विधानसभा चुनावों की तैयारी जोरों पर है।
मोहम्मद अमीन की मुख्य दलीलें
पूर्व संयुक्त निदेशक मोहम्मद अमीन ने कहा, 'जो भी पत्र लिखे गए हैं, अगर लिखना ही था तो उन्हें कानून और न्याय मंत्रालय को लिखना चाहिए था क्योंकि संशोधन का अधिकार उसी मंत्रालय के पास है।' उन्होंने आगे कहा कि यदि कैबिनेट सचिव को कुछ भी लिखा गया था तो यह सीधे-सीधे प्रोटोकॉल के विरुद्ध है।
अमीन के अनुसार, यदि चुनाव आयुक्त किसी बात से असहमत थे, तो उचित मार्ग यह था कि वे राष्ट्रपति को पत्र लिखते या उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलते। उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'कुछ गलत जानकारी भी फैली है और पूरे आयोग को देश के सामने आकर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए — तभी जनता को विश्वास होगा कि ECI पारदर्शी तरीके से काम कर रहा है और किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ा है।'
मतदाता सूची के विशेष संशोधन (SIR) पर स्थिति
मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के बारे में अमीन ने बताया कि यह प्रक्रिया पहले 2004 में संचालित हुई थी और बाद में 2025-26 में बिहार तथा पश्चिम बंगाल में इसे दोहराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही यह मत व्यक्त कर चुका है कि SIR किस प्रकार आयोजित किया जाए, यह निर्धारित करना ECI का संवैधानिक अधिकार है।
हालाँकि, अमीन ने यह भी जोड़ा कि यदि प्रक्रिया में कोई अनियमितता पाई जाती है तो सर्वोच्च न्यायालय इस पर गौर कर सकता है और ECI भी इस मामले को पुनः विचार में ले सकता है।
राजनीतिक असर और विपक्ष की स्थिति
ECI के भीतर मतभेदों की खबरों पर अमीन ने कहा कि विपक्ष इस स्थिति का उपयोग अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए करेगा और यह तर्क देगा कि उसके द्वारा पहले उठाए गए मुद्दे सही थे।
यह ऐसे समय में आया है जब कई विपक्षी दल ECI की निर्णय-प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग को लेकर पहले से सक्रिय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस पूरे प्रकरण पर एक आधिकारिक और विस्तृत सफाई जरूरी है।
आगे क्या होगा
फिलहाल ECI की ओर से कोई आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस निर्धारित नहीं की गई है। अमीन का सुझाव है कि पूरे आयोग को सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखना चाहिए। इस प्रकरण का असर आगामी चुनावों में मतदाताओं और राजनीतिक दलों के ECI पर भरोसे को प्रभावित कर सकता है।