24 सितंबर 2026
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चुनाव आयोग पर अधीर रंजन चौधरी का हमला: ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग, राहुल के विरोध को बताया 'दूरदर्शिता'

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चुनाव आयोग पर अधीर रंजन चौधरी का हमला: ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग, राहुल के विरोध को बताया 'दूरदर्शिता'

सारांश

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का दावा — चुनाव आयोग के भीतर से उठ रहे कथित सवाल साबित करते हैं कि राहुल गांधी की शुरुआती आपत्तियाँ सही थीं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और नए सिरे से चुनाव कराने की माँग के साथ यह बयान आने वाले चुनावी मौसम में विपक्ष की रणनीति का हिस्सा बन सकता है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 24 सितंबर 2026 को मुर्शिदाबाद में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग की।
राहुल गांधी और चौधरी ने नियुक्ति के समय नोट ऑफ डिसेंट दर्ज कराया था; चौधरी ने इसे अब 'दूरदर्शिता' बताया।
चौधरी ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठने के बाद सरकार को भंग कर नए सिरे से चुनाव कराए जाने चाहिए।
हुमायूं कबीर के समर्थकों की हिरासत को चौधरी ने राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और मुस्लिम मतों में विभाजन की साज़िश का आरोप लगाया।
ये सभी आरोप चौधरी के राजनीतिक दावे हैं; चुनाव आयोग या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी नहीं आई।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 24 सितंबर 2026 को मुर्शिदाबाद में मीडिया से बात करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग की और कहा कि चुनाव आयोग के भीतर से कथित तौर पर उठ रहे सवाल यह साबित करते हैं कि राहुल गांधी की आपत्तियाँ शुरू से सही थीं। चौधरी ने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और मतदाताओं को वोट के अधिकार से वंचित किए जाने के आरोप दोहराए।

नियुक्ति से ही शुरू हुआ विरोध

चौधरी ने स्पष्ट किया कि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान संबंधित बैठक में उन्होंने स्वयं उपस्थित रहकर नोट ऑफ डिसेंट दर्ज कराया था। इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी लिखित असहमति दर्ज करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया का विरोध किया था। चौधरी ने कहा कि उस समय इन आपत्तियों का उपहास उड़ाया गया, लेकिन अब चुनाव आयोग के भीतर से ही कथित असहमति की खबरें सामने आने के बाद इन सवालों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

संसद से सर्वोच्च न्यायालय तक चुनावी सवाल

चौधरी के अनुसार, राहुल गांधी ने संसद के भीतर, सड़कों पर और सर्वोच्च न्यायालय तक चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने विपक्षी नेताओं को बुलाकर मतों में कथित गड़बड़ी पर एक विस्तृत प्रस्तुति भी दी थी। चौधरी ने इन घटनाओं को 'देर से सामने आई सच्चाई' करार दिया और कहा कि यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल, नए चुनाव की माँग

चौधरी ने तर्क दिया कि यदि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी की बात सामने आती है तो वर्तमान सरकार की वैधता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। उन्होंने माँग की कि सरकार को भंग कर नए सिरे से चुनाव कराए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ-साथ अन्य आयुक्त भी उसी संस्था के अंग हैं — इसलिए भीतरी मतभेद संस्था की विश्वसनीयता के लिए ठीक नहीं। गौरतलब है कि ये सभी माँगें चौधरी के राजनीतिक बयान हैं, जिन पर सरकार या चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

हुमायूं कबीर प्रकरण और मुस्लिम वोट विभाजन का आरोप

चौधरी ने हुमायूं कबीर के समर्थकों को हिरासत में लिए जाने को लेकर पुलिस पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इसके पीछे राजनीतिक उद्देश्य हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव को देखते हुए मुस्लिम मतों में विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा रही है, जिससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) को चुनावी लाभ मिल सकता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बाबरी मस्जिद के नाम पर जुटाए गए चंदे और उसके खर्च पर स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जाती। हालाँकि, चौधरी के ये सभी आरोप उनके राजनीतिक दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

आगे क्या होगा

चौधरी की इन माँगों के बाद सत्तारूढ़ दल और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर नज़र रहेगी। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक सरगर्मी तेज़ है। विपक्ष की ये माँगें आने वाले हफ्तों में संसदीय बहस या न्यायिक मंच पर भी उठाई जा सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उन्हें आसानी से खारिज किया जाता रहा — लेकिन यदि आयोग के भीतर से भी असहमति की खबरें आ रही हैं, तो यह सवाल संस्थागत स्तर पर अधिक गंभीर हो जाता है। हालाँकि, 'सरकार भंग कर दो' जैसी माँगें राजनीतिक रूप से ज़्यादा और व्यावहारिक रूप से कम लगती हैं, जिससे मूल संस्थागत सवाल दब जाने का खतरा है। असली बहस — चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता — इस शोरगुल में पीछे न रह जाए, यही लोकतंत्र के लिए ज़रूरी है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अधीर रंजन चौधरी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्या माँग की है?
चौधरी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग की है। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और आयोग के भीतर से उठ रहे कथित सवालों के मद्देनज़र यह कार्रवाई ज़रूरी है।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर कब और कैसे आपत्ति जताई थी?
चौधरी के अनुसार, ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान पहले चौधरी ने और फिर राहुल गांधी ने लिखित नोट ऑफ डिसेंट दर्ज कराया था। इसके बाद राहुल गांधी ने संसद, सड़क और सर्वोच्च न्यायालय तक चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए और विपक्षी नेताओं को मतों में कथित गड़बड़ी पर प्रस्तुति भी दी।
हुमायूं कबीर प्रकरण में चौधरी ने क्या आरोप लगाए?
चौधरी ने आरोप लगाया कि हुमायूं कबीर के समर्थकों को राजनीतिक उद्देश्य से हिरासत में लिया गया है। उनका दावा है कि इसके पीछे मुस्लिम मतों में विभाजन पैदा करने की कोशिश है ताकि BJP को चुनावी फायदा मिले — हालाँकि ये आरोप उनके राजनीतिक दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
चौधरी ने सरकार को भंग करने की माँग क्यों की?
चौधरी का तर्क है कि यदि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं तो वर्तमान सरकार की वैधता संदिग्ध हो जाती है। उन्होंने माँग की कि सरकार को भंग कर नए सिरे से चुनाव कराए जाने चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में मतदाता का अधिकार सर्वोपरि है।
चुनाव आयोग के भीतर से उठ रहे कथित सवालों का क्या मतलब है?
चौधरी ने संकेत दिया कि आयोग के भीतर से ही कथित मतभेद सामने आए हैं, जो उनके अनुसार विपक्ष की पुरानी आशंकाओं की पुष्टि करते हैं। हालाँकि इन कथित मतभेदों की प्रकृति और विवरण अभी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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