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गुवाहाटी में ईयू प्रतिनिधिमंडल के सामने असम की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक क्षमता का प्रदर्शन

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गुवाहाटी में ईयू प्रतिनिधिमंडल के सामने असम की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक क्षमता का प्रदर्शन

सारांश

गुवाहाटी में ईयू प्रतिनिधिमंडल के सामने असम ने अपनी सांस्कृतिक और आर्थिक ताकत दिखाई — मूगा सिल्क से लेकर अगरवुड तक। ₹411 करोड़ की नई स्कीम और यूरोपीय बाज़ारों से जुड़ाव की यह पहल किसानों, बुनकरों और कारीगरों के लिए नए द्वार खोल सकती है।

मुख्य बातें

9 जून 2026 को गुवाहाटी में यूरोपियन यूनियन (ईयू) के प्रतिनिधिमंडल के लिए विशेष प्रदर्शनी आयोजित की गई।
प्रदर्शनी में मूगा सिल्क , असम चाय , अगरवुड , जोहा चावल , काला चावल , लीची , बांस हस्तशिल्प और अदरक शामिल थे।
महानंदा के अनुसार मूगा सिल्क के लिए ₹411 करोड़ की नई योजना शुरू की गई है और उत्पादन दो मीट्रिक टन तक पहुँचा है।
पहल का लक्ष्य किसानों , बुनकरों , कारीगरों और उद्यमियों के लिए यूरोपीय बाज़ारों में निर्यात के नए अवसर खोलना है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पहल पर इस मंच का आयोजन किया गया, जिसे उद्यमियों ने सराहा।

गुवाहाटी में 9 जून 2026 को यूरोपियन यूनियन (ईयू) के प्रतिनिधिमंडल के लिए एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक क्षमता को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य असम के स्थानीय उत्पादों को यूरोपीय बाज़ारों से जोड़ना और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देना था।

प्रदर्शनी में शामिल प्रमुख उत्पाद

प्रदर्शनी में असम के कुछ सबसे विशिष्ट उत्पादों को ईयू प्रतिनिधियों के समक्ष रखा गया। इनमें मूगा सिल्क, असम की लीची, अगरवुड, जोहा चावल, काला चावल, बांस एवं बांस से निर्मित हस्तशिल्प, अदरक और विश्वविख्यात असम की चाय प्रमुख रूप से शामिल थे। ये उत्पाद न केवल असम की कृषि विविधता को दर्शाते हैं, बल्कि हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र की वैश्विक संभावनाओं को भी रेखांकित करते हैं।

मूगा सिल्क की अनूठी पहचान

डॉ. महानंदा ने इस अवसर पर कहा, 'पूरी दुनिया में मूगा सिल्क सिर्फ असम में मिलती है। इसका प्रोडक्शन दो मीट्रिक टन हुआ है। असम में एक नई स्कीम भी लॉन्च की गई, जो ₹411 करोड़ की है। असम का मूगा सिल्क प्रोडक्शन धीरे-धीरे बढ़ रहा है। हमें उम्मीद है कि पूरे भारत में इसका प्रोडक्शन बढ़ेगा। इसलिए समिट में हमने इसको पेश किया है।' गौरतलब है कि मूगा सिल्क अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक और टिकाऊपन के कारण वैश्विक फैशन बाज़ार में विशेष स्थान रखती है।

अगरवुड क्षेत्र की प्रतिक्रिया

प्रदर्शनी में अगरवुड को प्रस्तुत करने वाले एक प्रतिभागी ने कहा, 'सरकार ने एक बहुत अच्छा मंच हमें दिया है। आज हमें यहाँ यूरोपियन यूनियन के प्रतिनिधिमंडल के सामने प्रदर्शनी में हिस्सा लेने का अवसर मिला है। यूरोपियन यूनियन के प्रतिनिधिमंडल का हम स्वागत करते हैं, जो हमारे घर यानी असम की धरती पर आए हैं।' उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को इस पहल के लिए धन्यवाद दिया।

आम जनता और उद्यमियों पर असर

अधिकारियों के अनुसार यह पहल निवेश आकर्षित करने, निर्यात को बढ़ावा देने और असम, भारत तथा यूरोप के बीच व्यावसायिक साझेदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे राज्य के किसानों, बुनकरों, कारीगरों और उद्यमियों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत को वैश्विक व्यापार मानचित्र पर स्थापित करने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं।

क्या होगा आगे

इस प्रदर्शनी को असम और यूरोपीय देशों के बीच दीर्घकालिक व्यापारिक संवाद की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि कृषि, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों में निर्यात संभावनाओं को और विस्तार देने के लिए आगे भी ऐसे मंच तैयार किए जाएँगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि ये प्रदर्शनी-स्तरीय संपर्क ठोस निर्यात अनुबंधों में कब बदलते हैं। पूर्वोत्तर के उत्पादों को वैश्विक मंच पर बार-बार पेश किया जाता है, फिर भी उनकी वैल्यू चेन और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियाँ बनी रहती हैं। ₹411 करोड़ की मूगा सिल्क योजना उत्साहजनक है, पर उत्पादन मात्र दो मीट्रिक टन पर है — यूरोपीय माँग के अनुपात में यह अभी बहुत कम है। जब तक आपूर्ति श्रृंखला और गुणवत्ता प्रमाणन को मज़बूत नहीं किया जाता, ऐसे आयोजन प्रतीकात्मक ही रहेंगे।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुवाहाटी में ईयू प्रतिनिधिमंडल के लिए आयोजित प्रदर्शनी में क्या दिखाया गया?
9 जून 2026 को गुवाहाटी में आयोजित इस प्रदर्शनी में असम के प्रमुख उत्पाद — मूगा सिल्क, असम चाय, अगरवुड, जोहा चावल, काला चावल, लीची, बांस हस्तशिल्प और अदरक — यूरोपियन यूनियन के प्रतिनिधिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किए गए। इसका उद्देश्य असम के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ना था।
असम की मूगा सिल्क इतनी खास क्यों है?
मूगा सिल्क विश्व में केवल असम में उत्पादित होती है और अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक तथा टिकाऊपन के लिए जानी जाती है। डॉ. महानंदा के अनुसार इसका वर्तमान उत्पादन दो मीट्रिक टन है और इसके लिए ₹411 करोड़ की नई योजना शुरू की गई है।
इस प्रदर्शनी से असम के किसानों और कारीगरों को क्या फायदा होगा?
अधिकारियों के अनुसार यह पहल यूरोपीय बाज़ारों में निर्यात के अवसर बढ़ाकर किसानों, बुनकरों, कारीगरों और उद्यमियों के लिए नई आय के स्रोत खोल सकती है। इससे असम, भारत और यूरोप के बीच व्यावसायिक साझेदारी भी मज़बूत होगी।
इस आयोजन में असम सरकार की क्या भूमिका रही?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पहल पर यह मंच तैयार किया गया। प्रतिभागियों ने सरकार को इस अवसर के लिए धन्यवाद दिया और इसे स्थानीय उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच बताया।
असम के उत्पादों के यूरोप में निर्यात की क्या संभावनाएँ हैं?
असम की चाय, मूगा सिल्क और अगरवुड पहले से ही वैश्विक स्तर पर पहचाने जाते हैं। ईयू प्रतिनिधिमंडल के साथ इस संवाद से कृषि, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों में यूरोपीय बाज़ारों तक पहुँच बढ़ने की संभावना है, हालाँकि ठोस व्यापार समझौतों का विवरण अभी सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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