ईयू का 'टीम यूरोप' असम दौरा: ब्लू वैली क्लस्टर लॉन्च और टाटा सेमीकंडक्टर विज़िट से पूर्वोत्तर में नए निवेश की राह
सारांश
मुख्य बातें
यूरोपीय संघ (EU) का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल 'टीम यूरोप' 8 और 9 जून 2026 को असम के दौरे पर रहेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों — अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा — के साथ यूरोपीय सहयोग को ठोस रूप देना है। यह दौरा जनवरी 2026 में आयोजित 16वें ईयू-भारत शिखर सम्मेलन में सहमत संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडा की प्राथमिकताओं को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रतिनिधिमंडल की संरचना और बैठकें
इस दौरे में भारत और भूटान में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन के नेतृत्व में ईयू सदस्य देशों के राजदूत, वरिष्ठ प्रतिनिधि और यूरोपीय व्यापार जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे। फेडरेशन ऑफ यूरोपियन बिजनेस इन इंडिया (FEBI) के नेतृत्व में एक अलग व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल राज्य के अधिकारियों के साथ व्यापार और निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श करेगा।
टीम यूरोप के राजदूत असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। यह बैठक राज्य-स्तरीय सहयोग को औपचारिक स्वरूप देने की दृष्टि से अहम मानी जा रही है।
ब्लू वैली क्लस्टर: दौरे का केंद्रबिंदु
दौरे का सबसे उल्लेखनीय आयोजन असम के पहले 'ब्लू वैली क्लस्टर' का शुभारंभ होगा। यह औद्योगिक केंद्र फ्रेगरेंस, फ्लेवर, आयुष और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों पर केंद्रित रहेगा। सार्वजनिक-निजी-जन भागीदारी (4P मॉडल) पर आधारित यह परियोजना यूरोप, पूर्वोत्तर भारत और भूटान के बीच नवाचार, अनुसंधान एवं सतत औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करेगी।
प्रतिनिधिमंडल 'ब्लू वैलीज़: बिल्डिंग इकोसिस्टम्स एंड वैल्यू चेन्स बिटवीन इंडिया एंड यूरोप' कार्यशाला में भी भाग लेगा, जहाँ भारतीय और यूरोपीय कंपनियाँ साझेदारी के नए अवसर तलाशेंगी।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सेमीकंडक्टर संयंत्र का दौरा
टीम यूरोप असम में स्थापित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के नए सेमीकंडक्टर संयंत्र का भी निरीक्षण करेगी। यह विज़िट राज्य के उभरते हाई-टेक विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक निवेशकों के सामने प्रदर्शित करने का अवसर है। गौरतलब है कि सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण दौरे के प्राथमिक फोकस क्षेत्रों में से एक है।
फोकस क्षेत्र और रणनीतिक महत्व
यात्रा में उन क्षेत्रों की मूल्य श्रृंखलाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहाँ यूरोप और पूर्वोत्तर भारत के बीच स्वाभाविक सामंजस्य है — नवीकरणीय एवं हरित ऊर्जा, सतत शहरी अवसंरचना, स्वास्थ्य सेवा एवं फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, चाय एवं कृषि-खाद्य प्रसंस्करण, फ्लेवर एवं फ्रेगरेंस तथा आयुष क्षेत्र।
यह पहल वित्तीय सहायता, कौशल विकास और स्थिरता मानकों के संयोजन से ऐसे व्यावसायिक मॉडल विकसित करने का प्रयास करती है जो स्थानीय समुदायों को लाभ पहुँचाएँ और उन्हें यूरोपीय बाज़ारों से जोड़ें।
राजदूत का बयान और व्यापक ढाँचा
ईयू राजदूत हर्वे डेल्फिन ने कहा, 'पूर्वोत्तर भारत और उसके केंद्र में स्थित असम में अपार संभावनाएँ हैं। इसके संसाधन, कुशल कार्यबल और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था इसे विशेष बनाते हैं। ब्लू वैलीज़ जैसी पहलों के माध्यम से हम केवल सहयोग पर चर्चा नहीं कर रहे, बल्कि ऐसे दीर्घकालिक व्यवसाय-से-व्यवसाय साझेदारी विकसित कर रहे हैं जो ईयू और भारत दोनों के विकास को गति देंगी।'
उन्होंने यह भी कहा, 'ईयू-भारत संबंधों को मजबूत करने की व्यापक रूपरेखा शिखर सम्मेलन में तय हो चुकी है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता राज्यों के स्तर पर होगी।'
उल्लेखनीय है कि भारत 2004 से ईयू का रणनीतिक साझेदार है और 2022 में दोनों के संबंधों के 60 वर्ष पूरे हुए। 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 16वें ईयू-भारत शिखर सम्मेलन के बाद सहयोग को ईयू-भारत व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) और ग्लोबल गेटवे रणनीति के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसके तहत 2021 से 2027 के बीच 300 अरब यूरो तक के निवेश जुटाने का लक्ष्य है। यह दौरा पूर्वोत्तर भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।