क्या 1948 की क्रांति ने इतिहास को बदल दिया? ईवा पेरोन ने महिलाओं को दिलाए महत्वपूर्ण अधिकार
सारांश
Key Takeaways
- ईवा पेरोन ने महिलाओं को राजनीतिक अधिकार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- महिला मताधिकार कानून ने सामाजिक न्याय की नींव रखी।
- महिला पेरोनिस्ट पार्टी की स्थापना ने महिलाओं की राजनीतिक पहचान को बढ़ावा दिया।
- 1948 की क्रांति ने लैटिन अमेरिका में महिला अधिकारों के लिए मिसाल कायम की।
- ईवा पेरोन का योगदान आज भी महिलाओं के लिए प्रेरणा है।
नई दिल्ली, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। अर्जेंटीना के इतिहास में 1 दिसंबर 1948 सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की एक नई किरण है, जिसने लाखों महिलाओं की आवाज को पहली बार राष्ट्रीय राजनीति में स्थान दिया।
जुआन पेरोन की सरकार द्वारा पारित 'महिला मताधिकार कानून – ले (कानून) 13.010' आधुनिक अर्जेंटीना की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक मानी जाती है। लेकिन इस ऐतिहासिक परिवर्तन की आत्मा एक महिला थीं, जिनका नाम है ईवा पेरोन, जिन्हें दुनिया प्यार से एविटा कहती है। जुआन पेरोन की पत्नी ने पूरे देश की महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया।
20वीं सदी के लैटिन अमेरिका में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी नगण्य थी। अर्जेंटीना भी इससे अछूता नहीं था। 1946 में जब जुआन पेरोन सत्ता में आए, तब देश सामाजिक असमानता, वर्ग विभाजन और राजनीतिक संघर्षों से जूझ रहा था। ऐसे कठिन समय में, ईवा पेरोन ने महिलाओं को संगठित करने का कार्य आरंभ किया, जो एक बड़े सामाजिक विद्रोह के समान था। निकोलस फ्रेज़र और मेरीसा नवारो की प्रसिद्ध पुस्तक 'एविटा: द रियल लाइफ ऑफ ईवा पेरोन' में उल्लेख है कि ईवा ने रेडियो, जनसभाओं और देशभर के दौरे करके महिलाओं को एक संगठित शक्ति में बदल दिया। उन्होंने कहा— “अगर हम राजनीति में अपनी जगह नहीं बनाएंगी, तो समाज हमें हमेशा अधूरा ही समझेगा।”
1947 में जब अर्जेंटीना की कांग्रेस में महिला मताधिकार विधेयक पेश हुआ, तो उसका विरोध भी हुआ और समर्थन भी। लेकिन ईवा पेरोन ने इस अभियान को केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक आंदोलन बना दिया। उन्होंने पार्तिदो पेरोनिस्ता फेमिनीनो (महिला पेरोनिस्ट पार्टी) की स्थापना की—यह कदम अर्जेंटीना की राजनीति में पहली बार महिलाओं की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को सामने लाया। सैंड्रा मैगी डॉइच अपनी पुस्तक द अर्जेंटीन राइट में लिखती हैं कि ईवा का यह आंदोलन अपने समय के किसी भी यूरोपीय राष्ट्र के महिला आंदोलन से कहीं अधिक प्रभावी था।
22 सितंबर 1947 को कानून पारित हुआ और 1 जनवरी 1948 से यह पूरी तरह लागू हो गया। यह वह क्षण था जिसने अर्जेंटीना की राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया। इस कानून ने पेरोन सरकार की सामाजिक न्याय नीति को एक मजबूत आधार प्रदान किया और महिलाओं को राजनीतिक शक्ति में बदलने का मार्ग प्रशस्त किया।
ईवा पेरोन की भूमिका केवल कानून तक सीमित नहीं रही। उन्होंने लाखों महिलाओं को मतदान के महत्व को समझाया, और 1951 के चुनाव में वे इतनी बड़ी राजनीतिक शक्ति बन चुकी थीं कि महिला मतदाता पेरोनवाद का सबसे मजबूत आधार बनीं। जूली टेलर की किताब ईवा पेरोन: द मिथ्स ऑफ अ वूमन इस बात का जिक्र करती है कि ईवा के निधन के बाद भी महिला राजनीतिक संगठन कई वर्षों तक उनकी विरासत को आगे बढ़ाते रहे।
इस कानून ने अर्जेंटीना में सामाजिक लोकतंत्र की नई नींव रखी। महिलाओं की उपस्थिति ने न केवल चुनाव प्रक्रिया को, बल्कि देश के सामाजिक ढांचे को भी नया संतुलन दिया।
आज अर्जेंटीना में ईवा पेरोन सिर्फ एक ऐतिहासिक नाम नहीं हैं; वे सामाजिक न्याय, महिला अधिकारों और जनता के प्रति समर्पण की प्रतीक हैं। 1948 की यह क्रांति उन आवाजों की जीत थी, जिन्हें सदियों से दबाया गया। इस बदलाव ने लैटिन अमेरिका में महिला अधिकारों के लिए एक मिसाल पेश की, यह दर्शाते हुए कि परिवर्तन एक व्यक्ति से शुरू हो सकता है, लेकिन इसका प्रभाव पूरी पीढ़ियों तक पहुंचता है।