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शहडोल: रिटायर्ड फौजी ने खोए तोते 'गोपी' के लिए ₹21,000 का इनाम घोषित, वापसी तक व्रत का संकल्प

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शहडोल: रिटायर्ड फौजी ने खोए तोते 'गोपी' के लिए ₹21,000 का इनाम घोषित, वापसी तक व्रत का संकल्प

सारांश

शहडोल के रिटायर्ड फौजी चंदन मिश्रा का पालतू तोता 'गोपी' शनिवार को उड़ गया। परिवार ने इनाम राशि ₹11,000 से बढ़ाकर ₹21,000 की, हवन-पूजन की योजना बनाई और मिश्रा ने गोपी की वापसी तक व्रत रखने का संकल्प लिया। यह भावुक अपील सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

मुख्य बातें

शहडोल के सोहागपुर निवासी रिटायर्ड फौजी चंदन मिश्रा का पालतू तोता 'गोपी' शनिवार को अचानक उड़ गया।
परिवार ने इनाम राशि ₹11,000 से बढ़ाकर ₹21,000 कर दी है।
तोता अमरकंटक, अनूपपुर से करीब एक साल पहले लाया गया था; वह आवाज़ की नकल करता था और कुछ शब्द बोलता था।
हरे रंग के इस तोते की गर्दन पर काला घेरा है — यही उसकी मुख्य पहचान है।
चंदन मिश्रा ने गोपी की सुरक्षित वापसी तक व्रत रखने और हवन-पूजन कराने का संकल्प लिया है।

मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के सोहागपुर में एक भावुक और अनोखी घटना ने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल छू लिया है। सोहागपुर थाना क्षेत्र के बाणगंगा मेला मैदान के पास रहने वाले रिटायर्ड फौजी चंदन मिश्रा ने अपने पालतू तोते की सुरक्षित वापसी में मदद करने वाले व्यक्ति को ₹21,000 का इनाम देने की घोषणा की है। 9 अगस्त को जारी इस अपील ने सोशल मीडिया पर तेज़ी से ध्यान खींचा है।

तोते से परिवार का भावनात्मक जुड़ाव

चंदन मिश्रा के अनुसार, यह हरे रंग का तोता करीब एक साल पहले पड़ोसी जिले अनूपपुर के अमरकंटक से लाया गया था। परिवार उसे प्यार से 'गोपी' और 'मिट्ठू' कहकर पुकारता था। धीरे-धीरे यह तोता घर के हर सदस्य से घुल-मिल गया और परिवार का अभिन्न हिस्सा बन गया।

तोते की खास पहचान यह है कि उसके गर्दन पर काला घेरा है और पीठ के पंख विशिष्ट हैं। वह परिवार के सदस्यों की आवाज़ की नकल करता था और कुछ शब्द भी बोल सकता था — जो उसे आम तोतों से अलग बनाता है।

कैसे हुआ तोता गायब

परिवार के बच्चे शनिवार को तोते के साथ खेल रहे थे, तभी वह अचानक उड़ गया। शाम तक परिवार को उम्मीद थी कि वह खुद लौट आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आसपास की छतों, पेड़ों और मोहल्लों में काफी तलाश के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिला।

इनाम राशि और व्रत का संकल्प

पहले परिवार ने ₹11,000 का इनाम घोषित किया था। जब तोता नहीं मिला तो रविवार को यह राशि बढ़ाकर ₹21,000 कर दी गई। भावुक चंदन मिश्रा ने वीडियो जारी कर घोषणा की कि जब तक गोपी सुरक्षित घर नहीं आ जाता, वे व्रत रखेंगे। परिवार ने एक स्थानीय पंडित से संपर्क कर तोते की सुरक्षित वापसी के लिए विशेष हवन-पूजन कराने की भी योजना बनाई है।

सोशल मीडिया पर अपील

तोते की पहचान — काला घेरा, बोलने की क्षमता, और विशिष्ट पंख — को सोशल मीडिया पर जारी पोस्टरों में विस्तार से बताया गया है। कई लोग वीडियो और पोस्टर साझा कर रहे हैं ताकि गोपी का पता लगाया जा सके और वह अपने परिवार के पास वापस लौट सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस गहरे भावनात्मक बंधन की है जो इंसान अपने पालतू जानवरों से बनाता है — और जिसे अक्सर मुख्यधारा की मीडिया नज़रअंदाज़ करती है। एक रिटायर्ड फौजी का व्रत और हवन-पूजन का संकल्प यह दिखाता है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में पालतू जानवर केवल 'पशु' नहीं, परिवार के सदस्य होते हैं। सोशल मीडिया पर इस वायरल अपील की ताकत यह भी रेखांकित करती है कि डिजिटल माध्यम अब छोटे शहरों में भी सामुदायिक सहायता का सशक्त ज़रिया बन चुका है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शहडोल के रिटायर्ड फौजी का खोया तोता 'गोपी' कैसा दिखता है?
गोपी हरे रंग का तोता है जिसकी गर्दन पर काला घेरा है और पीठ के पंख विशिष्ट हैं। वह परिवार के सदस्यों की आवाज़ की नकल करता था और कुछ शब्द भी बोल सकता था।
चंदन मिश्रा ने तोते के लिए कितना इनाम घोषित किया है?
रिटायर्ड फौजी चंदन मिश्रा ने तोते 'गोपी' की सुरक्षित वापसी में मदद करने वाले को ₹21,000 का इनाम देने की घोषणा की है। पहले यह राशि ₹11,000 थी, जिसे रविवार को बढ़ाया गया।
तोता 'गोपी' कब और कहाँ से गायब हुआ?
शनिवार को परिवार के बच्चे तोते के साथ खेल रहे थे, तभी वह अचानक उड़ गया। यह घटना मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के सोहागपुर स्थित बाणगंगा मेला मैदान के पास हुई।
चंदन मिश्रा ने तोते की वापसी के लिए और क्या कदम उठाए हैं?
चंदन मिश्रा ने घोषणा की है कि जब तक गोपी सुरक्षित घर नहीं आ जाता, वे व्रत रखेंगे। परिवार ने एक स्थानीय पंडित से संपर्क कर विशेष हवन-पूजन कराने की भी योजना बनाई है।
यह तोता परिवार के पास कहाँ से और कब से है?
चंदन मिश्रा करीब एक साल पहले यह तोता पड़ोसी जिले अनूपपुर के अमरकंटक से लाए थे। परिवार उसे 'गोपी' और 'मिट्ठू' नाम से पुकारता था।
राष्ट्र प्रेस
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