शहडोल में ₹222 करोड़ का धान बारिश में सड़ा, सीहोर में रिश्वत कांड: जीतू पटवारी का MP सरकार पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 22 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश सरकार की कृषि व्यवस्था पर तीखा हमला बोला — एक तरफ शहडोल में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया ₹222 करोड़ से अधिक का धान खुले आसमान के नीचे बारिश में अंकुरित हो रहा है, तो दूसरी ओर सीहोर में वेयरहाउस सब्सिडी जारी करने के बदले रिश्वत माँगने का मामला सामने आया है। पटवारी के अनुसार, ये दोनों घटनाएँ किसानों के प्रति सरकार की संवेदनहीनता और प्रशासनिक विफलता को उजागर करती हैं।
शहडोल में धान की बर्बादी: मुख्य घटनाक्रम
पटवारी के आरोप के अनुसार, वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया लगभग 9.44 लाख क्विंटल धान लंबे समय से शहडोल में खुले में पड़ा हुआ है। इस धान की अनुमानित कीमत ₹222 करोड़ से अधिक बताई गई है। समय पर उठाव और मिलिंग न होने के कारण बारिश के चलते यह अनाज खराब होकर अंकुरित हो गया है — यानी किसानों की मेहनत का अनाज व्यावहारिक रूप से बर्बाद हो गया।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य दोनों सरकारें किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करती रही हैं। गौरतलब है कि खुले भंडारण की समस्या मध्य प्रदेश में पहली बार नहीं उठी है — गोदाम क्षमता की कमी हर खरीफ-रबी सीजन के बाद विवाद का विषय बनती है।
सीहोर में रिश्वत कांड और निलंबन
पटवारी ने बताया कि सीहोर में केंद्रीय कृषि मंत्रालय के एक विपणन अधिकारी पर वेयरहाउस सब्सिडी जारी करने के बदले रिश्वत माँगने की शिकायत दर्ज हुई। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। पटवारी ने इसे सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों का प्रमाण बताया।
सरकार से पटवारी के सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य सरकार से चार सीधे सवाल पूछे: इतनी बड़ी मात्रा में धान खुले में क्यों रखा गया? जिम्मेदार अधिकारियों ने समय पर उठाव क्यों नहीं कराया? बारिश से हुए नुकसान की जवाबदेही किसकी होगी? और सरकारी खज़ाने को हुई क्षति की भरपाई कैसे की जाएगी?
ये सवाल महज राजनीतिक नहीं हैं — इनका सीधा असर उन हज़ारों किसानों पर पड़ता है जिन्होंने सरकारी खरीद केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेची थी।
कांग्रेस की आगे की रणनीति
पटवारी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसानों की फसल, आय और अधिकारों से जुड़े हर मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी। उनके अनुसार, सरकार को केवल घोषणाओं और आँकड़ों से नहीं, बल्कि खेत से मंडी और गोदाम तक किसान को वास्तविक राहत देकर अपनी ज़िम्मेदारी सिद्ध करनी होगी। यह मामला आगामी विधानसभा सत्र और ज़िला स्तरीय आंदोलनों में भी उठाए जाने की संभावना है।