28 जून 2026
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मेडिकल डिवाइस लाइसेंस: सरकार ने मंजूरी की समय-सीमा घटाने का प्रस्ताव रखा, क्लास बी को 140 से 115 दिन

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मेडिकल डिवाइस लाइसेंस: सरकार ने मंजूरी की समय-सीमा घटाने का प्रस्ताव रखा, क्लास बी को 140 से 115 दिन

सारांश

स्वास्थ्य मंत्रालय ने चिकित्सा उपकरण नियम, 2017 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है — क्लास बी उपकरणों की लाइसेंस समय-सीमा 140 से 115 दिन और क्लास सी-डी की 105 से 90 दिन करने की बात है। मसौदा अधिसूचना पर हितधारकों से सुझाव माँगे गए हैं।

मुख्य बातें

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 28 जून 2026 को चिकित्सा उपकरण नियम, 2017 में संशोधन का मसौदा जारी किया।
क्लास बी उपकरणों (ब्लड प्रेशर मॉनिटर, पल्स ऑक्सीमीटर) की लाइसेंस समय-सीमा 140 दिनों से घटाकर 115 दिन करने का प्रस्ताव।
क्लास सी और डी उपकरणों (हृदय स्टेंट, घुटने-कूल्हे के इम्प्लांट) की समय-सीमा 105 दिनों से घटाकर 90 दिन करने का प्रस्ताव।
लाइसेंसिंग के प्रत्येक चरण के लिए अलग स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जाएगी — पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए।
मसौदा अधिसूचना CDSCO की वेबसाइट और सरकारी राजपत्र पर उपलब्ध; हितधारकों से सुझाव आमंत्रित।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 28 जून 2026 को चिकित्सा उपकरण नियम, 2017 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन के मानकों से समझौता किए बिना मेडिकल डिवाइस लाइसेंसिंग प्रक्रिया को तेज़ और सरल बनाना है। मंत्रालय ने इस संबंध में सरकारी गजट में एक मसौदा अधिसूचना जारी कर सभी हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।

मौजूदा वर्गीकरण ढाँचा

वर्तमान नियमों के अंतर्गत चिकित्सा उपकरणों को जोखिम के आधार पर चार श्रेणियोंक्लास ए, क्लास बी, क्लास सी और क्लास डी—में वर्गीकृत किया गया है। इनमें क्लास डी में सर्वाधिक जोखिम वाले उपकरण आते हैं। प्रत्येक श्रेणी के लाइसेंस आवेदनों के निपटारे के लिए वैधानिक समय-सीमाएँ पहले से निर्धारित हैं।

प्रस्तावित समय-सीमाओं में कटौती

मंत्रालय के बयान के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों में क्लास बी उपकरणों — जैसे ब्लड प्रेशर मॉनिटर, हाइपोडर्मिक सुइयाँ और पल्स ऑक्सीमीटर — के लाइसेंस की समय-सीमा 140 दिनों से घटाकर 115 दिन करने का प्रस्ताव है। ये निम्न से मध्यम जोखिम वाले उपकरण हैं।

इसी प्रकार, क्लास सी और क्लास डी के उच्च जोखिम वाले उपकरणों — जिनमें हृदय स्टेंट, कूल्हे और घुटने के प्रत्यारोपण तथा हड्डी रोगों से संबंधित इम्प्लांट शामिल हैं — की लाइसेंस समय-सीमा 105 दिनों से घटाकर 90 दिन करने का प्रस्ताव है।

प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता

मसौदा संशोधनों में लाइसेंसिंग के प्रत्येक चरण — आवेदन की जाँच, अधिसूचित निकायों द्वारा ऑडिट, अनुपालन सत्यापन और लाइसेंस जारी करने — के लिए अलग-अलग स्पष्ट समय-सीमाएँ प्रस्तावित की गई हैं। मंत्रालय का मानना है कि इससे नियामक व्यवस्था में पारदर्शिता, पूर्वानुमान और दक्षता बढ़ेगी।

गौरतलब है कि यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारत का मेडिकल डिवाइस उद्योग वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देने की नीतिगत प्राथमिकता बनी हुई है।

मरीज़ों और उद्योग पर असर

मंत्रालय के अनुसार, इस बदलाव का लाभ केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा — मरीज़ों को भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपकरण अधिक तेज़ी से उपलब्ध हो सकेंगे। तेज़ लाइसेंसिंग से नए उत्पादों के बाज़ार में आने का समय कम होगा, जो विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले इम्प्लांट और निदान उपकरणों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है।

आगे की प्रक्रिया

मसौदा अधिसूचना केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की वेबसाइट और सरकारी राजपत्र पर उपलब्ध है। सभी हितधारकों से निर्धारित अवधि के भीतर अपने सुझाव और टिप्पणियाँ भेजने का अनुरोध किया गया है। सार्वजनिक परामर्श के बाद संशोधन अंतिम रूप लेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली बाधा प्रायः वैधानिक सीमाएँ नहीं, बल्कि ऑडिट क्षमता और अधिसूचित निकायों की उपलब्धता होती है। मसौदे में प्रत्येक चरण के लिए अलग समय-सीमा का प्रावधान स्वागत योग्य है, पर यह तभी अर्थपूर्ण होगा जब CDSCO के पास पर्याप्त तकनीकी जनशक्ति हो। भारत का मेडिकल डिवाइस बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है और घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देने की ज़रूरत वास्तविक है — लेकिन नियामक सुधार की सफलता प्रक्रिया की गति से अधिक उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिकित्सा उपकरण नियम, 2017 में प्रस्तावित संशोधन क्या है?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मेडिकल डिवाइस लाइसेंस मंजूरी की समय-सीमा घटाने का प्रस्ताव रखा है। इसमें गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना प्रक्रिया को तेज़ और अधिक पारदर्शी बनाने की योजना है।
क्लास बी मेडिकल डिवाइस के लिए नई समय-सीमा क्या होगी?
प्रस्ताव के अनुसार क्लास बी उपकरणों — जैसे ब्लड प्रेशर मॉनिटर, हाइपोडर्मिक सुइयाँ और पल्स ऑक्सीमीटर — के लाइसेंस की समय-सीमा 140 दिनों से घटाकर 115 दिन की जाएगी। ये निम्न से मध्यम जोखिम श्रेणी के उपकरण हैं।
हृदय स्टेंट और घुटने के इम्प्लांट जैसे उपकरणों के लाइसेंस में कितना समय लगेगा?
क्लास सी और क्लास डी के उच्च जोखिम वाले उपकरणों — जिनमें हृदय स्टेंट, कूल्हे और घुटने के प्रत्यारोपण शामिल हैं — की लाइसेंस समय-सीमा 105 दिनों से घटाकर 90 दिन करने का प्रस्ताव है।
इस बदलाव से मरीज़ों को क्या फायदा होगा?
तेज़ लाइसेंसिंग प्रक्रिया से गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपकरण बाज़ार में जल्दी आ सकेंगे, जिससे मरीज़ों को उन्नत निदान और उपचार उपकरण अधिक शीघ्रता से उपलब्ध होंगे। उद्योग के लिए भी नए उत्पाद लॉन्च की प्रक्रिया सरल होगी।
मसौदा अधिसूचना पर सुझाव कहाँ और कैसे दे सकते हैं?
मसौदा अधिसूचना केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की आधिकारिक वेबसाइट और सरकारी राजपत्र पर उपलब्ध है। सभी हितधारक निर्धारित अवधि के भीतर अपने सुझाव और टिप्पणियाँ वहाँ भेज सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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