मेडिकल डिवाइस लाइसेंस: सरकार ने मंजूरी की समय-सीमा घटाने का प्रस्ताव रखा, क्लास बी को 140 से 115 दिन
सारांश
मुख्य बातें
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 28 जून 2026 को चिकित्सा उपकरण नियम, 2017 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन के मानकों से समझौता किए बिना मेडिकल डिवाइस लाइसेंसिंग प्रक्रिया को तेज़ और सरल बनाना है। मंत्रालय ने इस संबंध में सरकारी गजट में एक मसौदा अधिसूचना जारी कर सभी हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।
मौजूदा वर्गीकरण ढाँचा
वर्तमान नियमों के अंतर्गत चिकित्सा उपकरणों को जोखिम के आधार पर चार श्रेणियों—क्लास ए, क्लास बी, क्लास सी और क्लास डी—में वर्गीकृत किया गया है। इनमें क्लास डी में सर्वाधिक जोखिम वाले उपकरण आते हैं। प्रत्येक श्रेणी के लाइसेंस आवेदनों के निपटारे के लिए वैधानिक समय-सीमाएँ पहले से निर्धारित हैं।
प्रस्तावित समय-सीमाओं में कटौती
मंत्रालय के बयान के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों में क्लास बी उपकरणों — जैसे ब्लड प्रेशर मॉनिटर, हाइपोडर्मिक सुइयाँ और पल्स ऑक्सीमीटर — के लाइसेंस की समय-सीमा 140 दिनों से घटाकर 115 दिन करने का प्रस्ताव है। ये निम्न से मध्यम जोखिम वाले उपकरण हैं।
इसी प्रकार, क्लास सी और क्लास डी के उच्च जोखिम वाले उपकरणों — जिनमें हृदय स्टेंट, कूल्हे और घुटने के प्रत्यारोपण तथा हड्डी रोगों से संबंधित इम्प्लांट शामिल हैं — की लाइसेंस समय-सीमा 105 दिनों से घटाकर 90 दिन करने का प्रस्ताव है।
प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता
मसौदा संशोधनों में लाइसेंसिंग के प्रत्येक चरण — आवेदन की जाँच, अधिसूचित निकायों द्वारा ऑडिट, अनुपालन सत्यापन और लाइसेंस जारी करने — के लिए अलग-अलग स्पष्ट समय-सीमाएँ प्रस्तावित की गई हैं। मंत्रालय का मानना है कि इससे नियामक व्यवस्था में पारदर्शिता, पूर्वानुमान और दक्षता बढ़ेगी।
गौरतलब है कि यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारत का मेडिकल डिवाइस उद्योग वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देने की नीतिगत प्राथमिकता बनी हुई है।
मरीज़ों और उद्योग पर असर
मंत्रालय के अनुसार, इस बदलाव का लाभ केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा — मरीज़ों को भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपकरण अधिक तेज़ी से उपलब्ध हो सकेंगे। तेज़ लाइसेंसिंग से नए उत्पादों के बाज़ार में आने का समय कम होगा, जो विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले इम्प्लांट और निदान उपकरणों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है।
आगे की प्रक्रिया
मसौदा अधिसूचना केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की वेबसाइट और सरकारी राजपत्र पर उपलब्ध है। सभी हितधारकों से निर्धारित अवधि के भीतर अपने सुझाव और टिप्पणियाँ भेजने का अनुरोध किया गया है। सार्वजनिक परामर्श के बाद संशोधन अंतिम रूप लेंगे।