12 अगस्त 2026
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जेनेवा में चीन का पलटवार: ICBM परीक्षण के आरोपों को बताया 'निराधार', अमेरिका पर लगाया नाभिकीय विस्तार का इल्ज़ाम

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जेनेवा में चीन का पलटवार: ICBM परीक्षण के आरोपों को बताया 'निराधार', अमेरिका पर लगाया नाभिकीय विस्तार का इल्ज़ाम

सारांश

जेनेवा में अमेरिका ने चीन पर ICBM परीक्षण का आरोप लगाया — चीन ने इसे 'निराधार' और निरस्त्रीकरण मंच का 'राजनीतिक दुरुपयोग' बताया। चीनी राजदूत का तर्क: केवल 3 परीक्षण, पाँच नाभिकीय देशों में सबसे कम; असली खतरा अमेरिका की 'नाभिकीय शेयरिंग' नीति है।

मुख्य बातें

चीनी निरस्त्रीकरण राजदूत ली चीच्यांग ने 11 अगस्त 2026 को जेनेवा निरस्त्रीकरण सम्मेलन में अमेरिकी नेतृत्व वाले संयुक्त भाषण की कड़ी निंदा की।
अमेरिका और सहयोगी देशों ने चीन पर जुलाई 2026 में समुद्र से ICBM परीक्षण करने का आरोप लगाया, जिसे चीन ने 'निराधार' बताया।
चीन का दावा: उसने अब तक केवल 3 बार ICBM परीक्षण किए — पाँच नाभिकीय शक्तियों में सबसे कम।
चीन ने अमेरिका पर 'नाभिकीय शेयरिंग' और 'विस्तारित निवारण' नीतियों के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय शांति को खतरे में डालने का आरोप लगाया।
चीन ने दोहराया कि वह न्यूनतम प्रतिरक्षात्मक नाभिकीय रणनीति पर कायम है और किसी भी नाभिकीय हथियार स्पर्द्धा में भाग नहीं लेगा।

चीन के निरस्त्रीकरण राजदूत ली चीच्यांग ने 11 अगस्त 2026 को जेनेवा निरस्त्रीकरण सम्मेलन के पूर्णाधिवेशन में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा चीन के विरुद्ध दिए गए संयुक्त भाषण की कड़ी निंदा की। यह भाषण तथाकथित बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण अधिसूचना पर आधारित था, जिसमें चीन पर जुलाई में समुद्र से इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) परीक्षण करने का आरोप लगाया गया था।

क्या थे आरोप और चीन का खंडन

11 अगस्त को आयोजित निरस्त्रीकरण सम्मेलन के पूर्णाधिवेशन में अमेरिका समेत कई देशों ने संयुक्त रूप से चीन पर जुलाई 2026 में समुद्र से ICBM परीक्षण करने का आरोप लगाया। राजदूत ली चीच्यांग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चीन के प्रतिरक्षा आधुनिकीकरण का निर्माण पूरी तरह युक्तियुक्त और जायज है। उन्होंने इसे निरस्त्रीकरण मंच का राजनीतिक दुरुपयोग करार दिया।

आँकड़ों में चीन बनाम अमेरिका

ली चीच्यांग ने तथ्यात्मक तुलना पेश करते हुए कहा कि चीन ने अब तक केवल तीन बार ICBM परीक्षण किए हैं, जो पाँच मान्यता प्राप्त नाभिकीय शक्तियों में सबसे कम है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका विश्व में सर्वाधिक ICBM परीक्षण करने वाला देश है और उसने नाभिकीय शक्ति निर्माण में भारी पूँजी निवेश किया है। राजदूत ने तथाकथित 'नाभिकीय शेयरिंग' और 'विस्तारित निवारण' नीतियों को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।

चीन की नाभिकीय नीति का बचाव

राजदूत ली चीच्यांग ने स्पष्ट किया कि चीन सदैव शांतिपूर्ण विकास के मार्ग पर चलता है और प्रतिरक्षात्मक नाभिकीय रणनीति का पालन करता है। उन्होंने दोहराया कि चीन अपनी नाभिकीय क्षमता को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए न्यूनतम आवश्यक स्तर पर बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्ध है। चीन ने किसी भी प्रकार की नाभिकीय हथियार स्पर्द्धा में भाग लेने से इनकार किया।

व्यापक संदर्भ: बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन संबंध व्यापार, प्रौद्योगिकी और ताइवान जलडमरूमध्य को लेकर पहले से ही तनावपूर्ण हैं। गौरतलब है कि जेनेवा निरस्त्रीकरण सम्मेलन परंपरागत रूप से बहुपक्षीय संवाद का मंच रहा है, परंतु हाल के वर्षों में यह महाशक्तियों के बीच वाकयुद्ध का अखाड़ा बनता जा रहा है। चीन का यह पलटवार संकेत देता है कि बीजिंग अपनी नाभिकीय गतिविधियों पर किसी बाहरी जाँच या दबाव को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

आगे क्या होगा

निरस्त्रीकरण सम्मेलन में इस तीखी नोकझोंक के बाद यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि अमेरिका और उसके सहयोगी चीन के खंडन पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के सार्वजनिक टकराव से नाभिकीय पारदर्शिता और हथियार नियंत्रण वार्ताओं पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि अमेरिका को आक्रामक विस्तारवादी के रूप में। '3 परीक्षण बनाम सर्वाधिक परीक्षण' की तुलना चतुराईपूर्ण है, लेकिन यह संख्या की बजाय क्षमता और आधुनिकीकरण की गति को नज़रअंदाज़ करती है। असली सवाल यह है कि निरस्त्रीकरण सम्मेलन जैसे बहुपक्षीय मंच अब वास्तविक हथियार नियंत्रण संवाद की जगह प्रचार-युद्ध के अखाड़े बनते जा रहे हैं — और इसमें दोनों महाशक्तियों की भूमिका है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेनेवा निरस्त्रीकरण सम्मेलन में चीन पर क्या आरोप लगाया गया?
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने 11 अगस्त 2026 को जेनेवा निरस्त्रीकरण सम्मेलन में संयुक्त भाषण देकर चीन पर जुलाई 2026 में समुद्र से इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) परीक्षण करने का आरोप लगाया। यह आरोप तथाकथित बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण अधिसूचना पर आधारित था।
चीन ने ICBM परीक्षण के आरोपों का क्या जवाब दिया?
चीनी निरस्त्रीकरण राजदूत ली चीच्यांग ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज किया। उन्होंने कहा कि चीन ने अब तक केवल तीन बार ICBM परीक्षण किए हैं, जो पाँच नाभिकीय शक्तियों में सबसे कम है, और चीन का प्रतिरक्षा आधुनिकीकरण पूरी तरह जायज है।
चीन की नाभिकीय नीति क्या है?
चीन प्रतिरक्षात्मक नाभिकीय रणनीति का पालन करता है और अपनी नाभिकीय क्षमता को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए न्यूनतम आवश्यक स्तर पर बनाए रखने का दावा करता है। चीन ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी नाभिकीय हथियार स्पर्द्धा में भाग नहीं लेगा।
चीन ने अमेरिका की नाभिकीय नीति पर क्या आरोप लगाए?
चीनी राजदूत ने कहा कि अमेरिका विश्व में सर्वाधिक ICBM परीक्षण करने वाला देश है और उसने नाभिकीय शक्ति निर्माण में भारी पूँजी निवेश किया है। उन्होंने 'नाभिकीय शेयरिंग' और 'विस्तारित निवारण' नीतियों को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।
जेनेवा निरस्त्रीकरण सम्मेलन क्या है और इसका महत्त्व क्यों है?
जेनेवा निरस्त्रीकरण सम्मेलन एक बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय मंच है जहाँ देश हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण पर वार्ता करते हैं। यह महाशक्तियों के बीच नाभिकीय पारदर्शिता और हथियार नियंत्रण समझौतों के लिए एक महत्त्वपूर्ण कूटनीतिक मंच माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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