जेनेवा में चीन का पलटवार: ICBM परीक्षण के आरोपों को बताया 'निराधार', अमेरिका पर लगाया नाभिकीय विस्तार का इल्ज़ाम
सारांश
मुख्य बातें
चीन के निरस्त्रीकरण राजदूत ली चीच्यांग ने 11 अगस्त 2026 को जेनेवा निरस्त्रीकरण सम्मेलन के पूर्णाधिवेशन में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा चीन के विरुद्ध दिए गए संयुक्त भाषण की कड़ी निंदा की। यह भाषण तथाकथित बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण अधिसूचना पर आधारित था, जिसमें चीन पर जुलाई में समुद्र से इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) परीक्षण करने का आरोप लगाया गया था।
क्या थे आरोप और चीन का खंडन
11 अगस्त को आयोजित निरस्त्रीकरण सम्मेलन के पूर्णाधिवेशन में अमेरिका समेत कई देशों ने संयुक्त रूप से चीन पर जुलाई 2026 में समुद्र से ICBM परीक्षण करने का आरोप लगाया। राजदूत ली चीच्यांग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चीन के प्रतिरक्षा आधुनिकीकरण का निर्माण पूरी तरह युक्तियुक्त और जायज है। उन्होंने इसे निरस्त्रीकरण मंच का राजनीतिक दुरुपयोग करार दिया।
आँकड़ों में चीन बनाम अमेरिका
ली चीच्यांग ने तथ्यात्मक तुलना पेश करते हुए कहा कि चीन ने अब तक केवल तीन बार ICBM परीक्षण किए हैं, जो पाँच मान्यता प्राप्त नाभिकीय शक्तियों में सबसे कम है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका विश्व में सर्वाधिक ICBM परीक्षण करने वाला देश है और उसने नाभिकीय शक्ति निर्माण में भारी पूँजी निवेश किया है। राजदूत ने तथाकथित 'नाभिकीय शेयरिंग' और 'विस्तारित निवारण' नीतियों को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।
चीन की नाभिकीय नीति का बचाव
राजदूत ली चीच्यांग ने स्पष्ट किया कि चीन सदैव शांतिपूर्ण विकास के मार्ग पर चलता है और प्रतिरक्षात्मक नाभिकीय रणनीति का पालन करता है। उन्होंने दोहराया कि चीन अपनी नाभिकीय क्षमता को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए न्यूनतम आवश्यक स्तर पर बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्ध है। चीन ने किसी भी प्रकार की नाभिकीय हथियार स्पर्द्धा में भाग लेने से इनकार किया।
व्यापक संदर्भ: बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन संबंध व्यापार, प्रौद्योगिकी और ताइवान जलडमरूमध्य को लेकर पहले से ही तनावपूर्ण हैं। गौरतलब है कि जेनेवा निरस्त्रीकरण सम्मेलन परंपरागत रूप से बहुपक्षीय संवाद का मंच रहा है, परंतु हाल के वर्षों में यह महाशक्तियों के बीच वाकयुद्ध का अखाड़ा बनता जा रहा है। चीन का यह पलटवार संकेत देता है कि बीजिंग अपनी नाभिकीय गतिविधियों पर किसी बाहरी जाँच या दबाव को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।
आगे क्या होगा
निरस्त्रीकरण सम्मेलन में इस तीखी नोकझोंक के बाद यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि अमेरिका और उसके सहयोगी चीन के खंडन पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के सार्वजनिक टकराव से नाभिकीय पारदर्शिता और हथियार नियंत्रण वार्ताओं पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।