12 अगस्त 2026
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असम बाढ़ जुलाई 2026: बादल फटने की कोई घटना नहीं, 71 परिवारों को अनुग्रह राशि मिली — केंद्र

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असम बाढ़ जुलाई 2026: बादल फटने की कोई घटना नहीं, 71 परिवारों को अनुग्रह राशि मिली — केंद्र

सारांश

केंद्र ने राज्यसभा में साफ किया — जुलाई 2026 की असम बाढ़ बादल फटने से नहीं, बल्कि तीन राज्यों में लगातार बारिश से आई। 4 अगस्त तक 71 मृतकों के परिवारों को अनुग्रह राशि मिली; पोस्टमार्टम रिपोर्ट की भी अनिवार्यता नहीं।

मुख्य बातें

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 12 अगस्त 2026 को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि जुलाई 2026 की असम बाढ़ में बादल फटने की कोई घटना नहीं हुई।
बाढ़ का कारण असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में लगातार हुई भारी वर्षा बताई गई।
गुवाहाटी आरएमसी-आईएमडी ने बादल फटने की कोई रिपोर्ट नहीं दी।
4 अगस्त 2026 तक 71 मृतकों के परिवारों को अनुग्रह राशि सहायता प्रदान की जा चुकी है।
असम सरकार की 1 अगस्त 2026 की अधिसूचना के अनुसार अनुग्रह राशि के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट अनिवार्य नहीं ।
राहत एसडीआरएफ और एनडीआरएफ मानदंडों के तहत दी जा रही है।

केंद्र सरकार ने 12 अगस्त 2026 को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि जुलाई 2026 में असम में आई विनाशकारी बाढ़ का कारण बादल फटने की कोई घटना नहीं थी, बल्कि यह असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में हुई लगातार और तीव्र वर्षा का परिणाम था। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी और साथ ही बताया कि 4 अगस्त 2026 तक 71 मृतकों के परिवारों को अनुग्रह राशि सहायता प्रदान की जा चुकी है।

राज्यसभा में उठा था सवाल

सांसद तेराश गोवाला ने राज्यसभा में यह प्रश्न उठाया था, जिसमें उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में बादल फटने से प्रभावित असम के जिलों का विवरण, जिलावार मौतों का ब्यौरा, पोस्टमार्टम की स्थिति और मृतकों के परिवारों को दी गई वित्तीय सहायता की जानकारी माँगी थी। इस प्रश्न के लिखित उत्तर में गृह मंत्रालय ने विस्तृत स्पष्टीकरण दिया।

बाढ़ का वास्तविक कारण क्या था

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि असम सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जुलाई में आई बाढ़ राज्य के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में लगातार हुई भारी वर्षा के कारण आई। उन्होंने स्पष्ट किया, "गुवाहाटी स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र — भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आरएमसी-आईएमडी) द्वारा बादल फटने की कोई रिपोर्ट नहीं दी गई है।" यह स्पष्टीकरण इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि संसद में उठाए गए प्रश्न में बादल फटने को बाढ़ का कारण मानते हुए जानकारी माँगी गई थी।

मौतों का ब्यौरा और डीआरआईएमएस प्रणाली

केंद्र के अनुसार, जुलाई 2026 की बाढ़ में हुई मौतों का जिलावार विवरण असम सरकार ने अपनी आपदा रिपोर्टिंग और सूचना प्रबंधन प्रणाली (डीआरआईएमएस) के माध्यम से उपलब्ध कराया। यह प्रणाली राज्य में आपदा-संबंधी आँकड़ों के केंद्रीकृत प्रबंधन के लिए स्थापित की गई है। गौरतलब है कि इस तरह की डिजिटल रिपोर्टिंग व्यवस्था राहत वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का एक अहम माध्यम है।

पोस्टमार्टम की अनिवार्यता पर स्थिति

मंत्री राय ने यह भी स्पष्ट किया कि असम सरकार द्वारा 1 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, बाढ़ और अन्य अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं — जिनमें राज्य-विशिष्ट आपदाएँ भी शामिल हैं — में हुई मौतों के मामलों में अनुग्रह राशि के भुगतान के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं है। यह राहत राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के मानदंडों के तहत दी जाती है।

71 परिवारों तक पहुँची राहत, आगे क्या

केंद्र ने बताया कि 4 अगस्त 2026 तक 71 मृतकों के परिवारों को अनुग्रह राशि सहायता प्रदान की जा चुकी है। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब मानसून सीजन में असम और पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है और ऊपरी इलाकों में भारी वर्षा से जलस्तर में वृद्धि जारी है। आने वाले हफ्तों में राहत वितरण की प्रगति और शेष प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुँचाने की गति पर नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़े सवाल को टालता है कि पूर्वोत्तर में बाढ़-प्रबंधन की तैयारी क्यों हर साल अपर्याप्त साबित होती है। बादल फटने और लगातार वर्षा के बीच का अंतर आपदा के कारण की व्याख्या बदलता है, लेकिन पीड़ितों की तकलीफ नहीं। 71 परिवारों तक राहत पहुँचना एक शुरुआत है, पर यह संख्या असम की वार्षिक बाढ़ में दर्ज होने वाली कुल मौतों के सापेक्ष कितनी है — यह सवाल संसद में नहीं पूछा गया। पोस्टमार्टम की अनिवार्यता हटाना राहत प्रक्रिया को सरल बनाता है, लेकिन मौत के कारणों के सटीक दस्तावेज़ीकरण पर दीर्घकालिक असर की समीक्षा ज़रूरी है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जुलाई 2026 की असम बाढ़ में बादल फटने की घटना क्यों नहीं मानी गई?
गुवाहाटी स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी-आईएमडी) ने बादल फटने की कोई रिपोर्ट नहीं दी। केंद्र सरकार के अनुसार, बाढ़ असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में लगातार भारी वर्षा के कारण आई थी।
असम बाढ़ 2026 में कितने परिवारों को अनुग्रह राशि मिली?
4 अगस्त 2026 तक 71 मृतकों के परिवारों को अनुग्रह राशि सहायता प्रदान की जा चुकी है। यह राहत राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के मानदंडों के तहत दी गई है।
क्या असम बाढ़ में मृतकों के परिवारों को अनुग्रह राशि के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट ज़रूरी है?
नहीं। असम सरकार की 1 अगस्त 2026 की अधिसूचना के अनुसार, बाढ़ और अन्य अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं में हुई मौतों के मामलों में अनुग्रह राशि के भुगतान के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं है।
राज्यसभा में असम बाढ़ पर सवाल किसने उठाया था?
सांसद तेराश गोवाला ने राज्यसभा में यह प्रश्न उठाया था। उन्होंने बाढ़ से प्रभावित जिलों का विवरण, जिलावार मौतों का ब्यौरा, पोस्टमार्टम की स्थिति और मृतकों के परिवारों को दी गई सहायता की जानकारी माँगी थी।
असम बाढ़ में मौतों का जिलावार विवरण कैसे दर्ज किया गया?
जुलाई 2026 की बाढ़ में हुई मौतों का जिलावार विवरण असम सरकार ने अपनी आपदा रिपोर्टिंग और सूचना प्रबंधन प्रणाली (डीआरआईएमएस) के माध्यम से केंद्र को उपलब्ध कराया। यह प्रणाली राज्य में आपदा-संबंधी आँकड़ों के केंद्रीकृत प्रबंधन के लिए स्थापित है।
राष्ट्र प्रेस
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