24 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

असम बाढ़: नागालैंड की भारी बारिश से चराइदेव-शिवसागर में तबाही, 31 की मौत, 7 लाख प्रभावित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
असम बाढ़: नागालैंड की भारी बारिश से चराइदेव-शिवसागर में तबाही, 31 की मौत, 7 लाख प्रभावित

सारांश

नागालैंड के तीन जिलों में सामान्य से 490% अधिक बारिश ने असम के चराइदेव और शिवसागर को जलमग्न कर दिया। 31 मौतें, 7 लापता और 7 लाख प्रभावित — यह असम की उन बाढ़ों में से एक है जो परंपरागत रूप से 'सुरक्षित' माने जाने वाले इलाकों को भी नहीं बख्शती।

मुख्य बातें

असम CM हिमंता बिस्वा सरमा ने 24 जुलाई को बताया कि बाढ़ का कारण नागालैंड के मोन, मोकोकचुंग और वोखा जिलों में हुई असाधारण वर्षा है।
प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य से 435 से 490 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई।
31 लोगों की मौत — शिवसागर में 21 और चराइदेव में 10; 7 लोग अभी भी लापता।
दोनों जिलों में करीब 7 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित।
प्रभावित क्षेत्र का 20-25% हिस्सा क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के कारण अभी भी दुर्गम।
सेना, वायु सेना, NDRF, SDRF और जिला प्रशासन राहत-बचाव में जुटे; दो राज्य मंत्री मौके पर तैनात।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 24 जुलाई को गुवाहाटी में पत्रकारों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि चराइदेव और शिवसागर जिलों में आई विनाशकारी बाढ़ का मुख्य कारण ऊपरी असम के साथ-साथ पड़ोसी राज्य नागालैंड के मोन, मोकोकचुंग और वोखा जिलों में हुई असाधारण वर्षा है। अब तक 31 लोगों की जान जा चुकी है और करीब 7 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में मौसमी औसत से 435 से 490 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई। इस अभूतपूर्व बारिश के कारण नागालैंड की पहाड़ियों से असम की ओर बहने वाली नदियाँ, नाले और जल निकासी मार्ग उफान पर आ गए, जिससे बाढ़ की स्थिति और भीषण हो गई।

उन्होंने बताया कि शिवसागर में 21 और चराइदेव में 10 लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि 7 लोग अभी भी लापता हैं। दोनों जिलों के बड़े हिस्से जलमग्न हैं।

भौगोलिक कारण और संवेदनशीलता

मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि ऊपरी असम की भौगोलिक स्थिति के कारण चराइदेव और शिवसागर जैसे जिले पड़ोसी पहाड़ी राज्य से अचानक आने वाले जल प्रवाह के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ये क्षेत्र परंपरागत रूप से बड़े पैमाने पर बाढ़ की चपेट में नहीं आते थे — जिससे इस बार की तबाही और अधिक चिंताजनक हो जाती है।

गौरतलब है कि अंतर-राज्यीय जल प्रवाह के कारण असम में बाढ़ की यह घटना पहली बार नहीं है, लेकिन सामान्य से 490% तक अधिक वर्षा का आँकड़ा हाल के वर्षों में दुर्लभ है।

राहत और बचाव अभियान

राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। सेना, भारतीय वायु सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और जिला प्रशासन की टीमें फँसे हुए निवासियों को निकालने और राहत सामग्री पहुँचाने में जुटी हैं। राहत कार्यों की निगरानी के लिए दो राज्य मंत्री प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किए गए हैं।

हालाँकि, मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के कारण प्रभावित क्षेत्र का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा अभी भी प्रशासन के लिए दुर्गम बना हुआ है।

आम जनता पर असर

दोनों जिलों में करीब 7 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। घर, फसलें और बुनियादी ढाँचा बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त हुए हैं। जलमग्न इलाकों में फँसे परिवारों तक राहत पहुँचाना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

क्या होगा आगे

मुख्यमंत्री सरमा ने संकेत दिया कि जैसे-जैसे संपर्क मार्ग बहाल होंगे, राहत अभियान और तेज किया जाएगा। लापता 7 लोगों की तलाश जारी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी उतरने के बाद नुकसान का पूरा आकलन किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल को भी उठाता है — अंतर-राज्यीय जल प्रबंधन और पूर्व-चेतावनी प्रणालियों की कमी। सामान्य से 490% अधिक वर्षा का आँकड़ा जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में गंभीर है, फिर भी असम-नागालैंड के बीच कोई संस्थागत जल-साझाकरण तंत्र अब तक नहीं बन पाया है। 20-25% प्रभावित क्षेत्र का दुर्गम रहना यह भी दर्शाता है कि बुनियादी ढाँचे की तैयारी उन इलाकों में भी अपर्याप्त है जो 'परंपरागत रूप से बाढ़-प्रवण नहीं' माने जाते। राहत की तात्कालिकता के साथ-साथ दीर्घकालिक अंतर-राज्यीय आपदा समन्वय की जरूरत अब नकारी नहीं जा सकती।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में इस बार की बाढ़ इतनी विनाशकारी क्यों है?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, इस बार ऊपरी असम के साथ-साथ नागालैंड के मोन, मोकोकचुंग और वोखा जिलों में सामान्य से 435 से 490 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। इस असाधारण बारिश से नागालैंड की पहाड़ियों से असम में प्रवेश करने वाली नदियाँ और नाले उफान पर आ गए, जिससे चराइदेव और शिवसागर जैसे परंपरागत रूप से कम बाढ़-प्रवण जिले भी जलमग्न हो गए।
असम बाढ़ में अब तक कितनी मौतें हुई हैं?
24 जुलाई तक चराइदेव और शिवसागर जिलों में कुल 31 लोगों की मौत हो चुकी है — शिवसागर में 21 और चराइदेव में 10। इसके अलावा 7 लोग अभी भी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है।
बाढ़ से कितने लोग प्रभावित हुए हैं और राहत कार्य कैसे चल रहे हैं?
दोनों जिलों में करीब 7 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। सेना, भारतीय वायु सेना, NDRF, SDRF और जिला प्रशासन राहत-बचाव में जुटे हैं। दो राज्य मंत्री प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं, हालाँकि क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के कारण 20-25% इलाका अभी भी दुर्गम है।
क्या चराइदेव और शिवसागर पहले भी ऐसी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं?
मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार ये जिले परंपरागत रूप से बड़े पैमाने पर बाढ़ की चपेट में नहीं आते थे। इस बार की स्थिति हाल के वर्षों में सबसे भीषण बताई जा रही है, जो असाधारण अंतर-राज्यीय जल प्रवाह के कारण उत्पन्न हुई है।
नागालैंड की बारिश असम को कैसे प्रभावित करती है?
ऊपरी असम की भौगोलिक स्थिति के कारण नागालैंड की पहाड़ियों से बहने वाला पानी सीधे चराइदेव और शिवसागर जैसे जिलों में प्रवेश करता है। भारी वर्षा होने पर नदियाँ, नाले और जल निकासी मार्ग उफान पर आ जाते हैं, जिससे इन जिलों में अचानक बाढ़ आ जाती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 12 घंटे पहले
  3. कल
  4. 2 दिन पहले
  5. 2 दिन पहले
  6. 4 दिन पहले
  7. 4 दिन पहले
  8. 4 दिन पहले