3 अगस्त 2026
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असम बाढ़: शिवसागर-चराइदेव के पूरे गाँव बसाने पड़ सकते हैं — मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा

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असम बाढ़: शिवसागर-चराइदेव के पूरे गाँव बसाने पड़ सकते हैं — मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा

सारांश

असम में इस बार की बाढ़ सिर्फ राहत-शिविरों की कहानी नहीं है — मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने खुद ट्रैक्टर से दौरा कर माना कि शिवसागर और चराइदेव के कुछ गाँव इतने तबाह हो चुके हैं कि उन्हें नए सिरे से बसाना होगा। यह राज्य की बाढ़ नीति पर एक बड़े पुनर्विचार का संकेत है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 3 अगस्त को शिवसागर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का ट्रैक्टर से दौरा किया।
बिहुबोर, नेपाली खुटी, बेटबारी और निमाइजन जैसे गाँवों को पूरी तरह पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता हो सकती है।
शिवसागर और चराइदेव ऊपरी असम के सर्वाधिक प्रभावित जिले रहे; हज़ारों परिवार विस्थापित हुए।
सरकार नुकसान का व्यापक आकलन करने के बाद दीर्घकालिक पुनर्वास योजना तैयार करेगी।
घरों, कृषि भूमि, पशुधन, तटबंधों और सड़कों को भारी क्षति; बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी सामान्य जीवन बहाल करना मुश्किल।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 3 अगस्त को स्पष्ट किया कि ऊपरी असम में हाल की विनाशकारी बाढ़ से तबाह हुए शिवसागर और चराइदेव जिलों के कुछ गाँवों को पूरी तरह पुनर्स्थापित करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि तबाही का पैमाना इतना व्यापक है कि महज तात्कालिक राहत उपाय पर्याप्त नहीं होंगे।

मुख्यमंत्री का ज़मीनी दौरा

शिवसागर जिले के बाढ़ प्रभावित नेपाली खुटी क्षेत्र का सरमा ने ट्रैक्टर से दौरा किया, क्योंकि कई इलाकों में वाहनों की सामान्य पहुँच संभव नहीं थी। दौरे के दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों से सीधे बातचीत की, जिन्होंने घर, मवेशी, कृषि भूमि और आजीविका के अन्य साधनों के नुकसान का विवरण साझा किया।

सरमा ने कहा, 'शिवसागर और चराइदेव में तबाही टीवी पर दिखने वाली तस्वीरों से कहीं अधिक गंभीर है। सिर्फ बाढ़ राहत काफी नहीं होगी। बिहुबोर, नेपाली खुटी, बेटबारी और निमाइजन जैसी जगहों पर हमें शायद पूरे गाँवों को फिर से बसाना पड़े।'

तबाही का दायरा

भारी वर्षा और नदियों के उफान के कारण आई इस बाढ़ ने ऊपरी असम में व्यापक विनाश किया। हज़ारों परिवार विस्थापित हुए क्योंकि गाँव कई दिनों तक जलमग्न रहे। घरों, कृषि भूमि, पशुधन और सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे को भारी क्षति पहुँची। अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी कई परिवारों के लिए सामान्य जीवन पुनः शुरू करना फिलहाल संभव नहीं है।

पुनर्वास की दीर्घकालिक योजना

मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित पुनर्वास प्रक्रिया में क्षतिग्रस्त घरों, सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे, तटबंधों, सड़कों और आजीविका के नुकसान का व्यापक आकलन किया जाएगा। इसके बाद ही पुनर्निर्माण की विस्तृत योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। सरमा ने कहा कि बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत सर्वेक्षण पूरा होने के बाद सरकार दीर्घकालिक पुनर्वास रणनीति तैयार करेगी।

सामुदायिक बुनियादी ढाँचे की बहाली

सरकार से यह भी अपेक्षा है कि वह सर्वाधिक प्रभावित गाँवों में आवश्यक सामुदायिक सुविधाओं के पुनर्निर्माण और बुनियादी सेवाओं की बहाली पर ध्यान केंद्रित करेगी। सरमा ने आश्वासन दिया कि फील्ड विजिट और तकनीकी आकलन का सिलसिला जारी रहेगा ताकि पुनर्वास प्रयास केवल अल्पकालिक राहत तक सीमित न रहें, बल्कि प्रभावित परिवारों को स्थायी समाधान मिल सके।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब असम हर वर्ष मानसून के दौरान भीषण बाढ़ की चपेट में आता है, और ऊपरी असम के ज़िले सबसे अधिक संवेदनशील बने रहते हैं। गौरतलब है कि इस बार की बाढ़ की तीव्रता ने दीर्घकालिक बस्ती नीति पर पुनर्विचार की ज़रूरत को सामने ला दिया है। राज्य सरकार का अगला कदम व्यापक नुकसान-आकलन रिपोर्ट के आधार पर तय होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह चक्र हर साल दोहराता रहेगा।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में कौन-से गाँवों को पुनर्स्थापित करने की बात हो रही है?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बिहुबोर, नेपाली खुटी, बेटबारी और निमाइजन का विशेष उल्लेख किया है, जो शिवसागर और चराइदेव जिलों में स्थित हैं। इन गाँवों में बाढ़ से हुई तबाही इतनी व्यापक है कि महज मरम्मत से काम नहीं चलेगा।
असम बाढ़ पुनर्वास योजना कब तक लागू होगी?
सरकार ने अभी कोई निश्चित समय-सीमा नहीं दी है। पहले नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाएगा, उसके बाद दीर्घकालिक पुनर्निर्माण योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।
शिवसागर और चराइदेव में बाढ़ से कितना नुकसान हुआ?
हज़ारों परिवार विस्थापित हुए और गाँव कई दिनों तक जलमग्न रहे। घरों, कृषि भूमि, पशुधन, तटबंधों और सड़कों को भारी क्षति पहुँची। मुख्यमंत्री के अनुसार, वास्तविक तबाही टेलीविज़न पर दिखाई गई तस्वीरों से कहीं अधिक गंभीर है।
पुनर्वास प्रक्रिया में क्या-क्या शामिल होगा?
अधिकारियों के अनुसार, प्रक्रिया में क्षतिग्रस्त घरों, सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे, तटबंधों, सड़कों और आजीविका के नुकसान का व्यापक आकलन शामिल होगा। इसके आधार पर पुनर्निर्माण और सामुदायिक सुविधाओं की बहाली की योजना बनाई जाएगी।
क्या असम में पहले भी इस तरह के पुनर्वास हुए हैं?
असम हर वर्ष मानसून में भीषण बाढ़ झेलता है और पुनर्वास की घोषणाएँ नई नहीं हैं। हालाँकि, इस बार मुख्यमंत्री ने स्वयं ज़मीनी दौरा कर पूरे गाँवों को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता स्वीकार की है, जो नीतिगत स्तर पर एक महत्त्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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