असम बाढ़: शिवसागर-चराइदेव के पूरे गाँव बसाने पड़ सकते हैं — मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 3 अगस्त को स्पष्ट किया कि ऊपरी असम में हाल की विनाशकारी बाढ़ से तबाह हुए शिवसागर और चराइदेव जिलों के कुछ गाँवों को पूरी तरह पुनर्स्थापित करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि तबाही का पैमाना इतना व्यापक है कि महज तात्कालिक राहत उपाय पर्याप्त नहीं होंगे।
मुख्यमंत्री का ज़मीनी दौरा
शिवसागर जिले के बाढ़ प्रभावित नेपाली खुटी क्षेत्र का सरमा ने ट्रैक्टर से दौरा किया, क्योंकि कई इलाकों में वाहनों की सामान्य पहुँच संभव नहीं थी। दौरे के दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों से सीधे बातचीत की, जिन्होंने घर, मवेशी, कृषि भूमि और आजीविका के अन्य साधनों के नुकसान का विवरण साझा किया।
सरमा ने कहा, 'शिवसागर और चराइदेव में तबाही टीवी पर दिखने वाली तस्वीरों से कहीं अधिक गंभीर है। सिर्फ बाढ़ राहत काफी नहीं होगी। बिहुबोर, नेपाली खुटी, बेटबारी और निमाइजन जैसी जगहों पर हमें शायद पूरे गाँवों को फिर से बसाना पड़े।'
तबाही का दायरा
भारी वर्षा और नदियों के उफान के कारण आई इस बाढ़ ने ऊपरी असम में व्यापक विनाश किया। हज़ारों परिवार विस्थापित हुए क्योंकि गाँव कई दिनों तक जलमग्न रहे। घरों, कृषि भूमि, पशुधन और सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे को भारी क्षति पहुँची। अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी कई परिवारों के लिए सामान्य जीवन पुनः शुरू करना फिलहाल संभव नहीं है।
पुनर्वास की दीर्घकालिक योजना
मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित पुनर्वास प्रक्रिया में क्षतिग्रस्त घरों, सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे, तटबंधों, सड़कों और आजीविका के नुकसान का व्यापक आकलन किया जाएगा। इसके बाद ही पुनर्निर्माण की विस्तृत योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। सरमा ने कहा कि बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत सर्वेक्षण पूरा होने के बाद सरकार दीर्घकालिक पुनर्वास रणनीति तैयार करेगी।
सामुदायिक बुनियादी ढाँचे की बहाली
सरकार से यह भी अपेक्षा है कि वह सर्वाधिक प्रभावित गाँवों में आवश्यक सामुदायिक सुविधाओं के पुनर्निर्माण और बुनियादी सेवाओं की बहाली पर ध्यान केंद्रित करेगी। सरमा ने आश्वासन दिया कि फील्ड विजिट और तकनीकी आकलन का सिलसिला जारी रहेगा ताकि पुनर्वास प्रयास केवल अल्पकालिक राहत तक सीमित न रहें, बल्कि प्रभावित परिवारों को स्थायी समाधान मिल सके।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब असम हर वर्ष मानसून के दौरान भीषण बाढ़ की चपेट में आता है, और ऊपरी असम के ज़िले सबसे अधिक संवेदनशील बने रहते हैं। गौरतलब है कि इस बार की बाढ़ की तीव्रता ने दीर्घकालिक बस्ती नीति पर पुनर्विचार की ज़रूरत को सामने ला दिया है। राज्य सरकार का अगला कदम व्यापक नुकसान-आकलन रिपोर्ट के आधार पर तय होगा।