असम बाढ़ राहत: CM हिमंत बिस्वा सरमा बोले — फंड की कोई कमी नहीं, केंद्र उठाएगा पूरा बोझ
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 22 जुलाई 2026 को चराइदेव जिले के सोनारी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य में बाढ़ राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन का लगभग पूरा वित्तीय बोझ केंद्र सरकार वहन करती है और यदि आवश्यकता पड़ी तो सीधे प्रधानमंत्री से भी अतिरिक्त सहायता का अनुरोध किया जाएगा।
मुख्यमंत्री का आश्वासन: धन की नहीं, पहुँच की चुनौती
सरमा ने कहा, 'मुद्दा धन का नहीं है। बाढ़ राहत और कटाव रोकने पर होने वाला लगभग पूरा खर्च केंद्र सरकार वापस देती है। राज्य सरकार को केवल खर्च करना होता है और उसका पूरा विवरण केंद्र को देना होता है।' उन्होंने यह भी बताया कि आपदा प्रबंधन की तय व्यवस्था के तहत केंद्र पहले से ही राहत कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराता है। यदि मौजूदा राशि पर्याप्त न हो, तो राज्य अतिरिक्त धन की माँग कर सकता है।
प्रभावित परिवारों की स्थिति और नुकसान का दायरा
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि बाढ़ से प्रभावित अनेक परिवारों ने अपने घर, मवेशी, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज़ खो दिए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इन सभी नुकसानों की भरपाई यथासंभव करेगी। उन्होंने यह भी चेताया कि तबाही का पूरा असर अभी सामने आना बाकी है और वास्तविक नुकसान शुरुआती सरकारी आकलन से कहीं अधिक हो सकता है।
बचाव अभियान: सेना और NDRF दिन-रात सक्रिय
सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित इलाकों में चौबीसों घंटे राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं। हालाँकि, मुख्यमंत्री ने माना कि कई गाँव अभी भी जलमग्न हैं और वहाँ पहुँचना कठिन है, जिससे बचाव कार्यों में व्यावहारिक अड़चनें आ रही हैं।
आगे की रणनीति: आकलन और पुनर्वास
सरमा ने कहा कि जैसे-जैसे बाढ़ का पानी घटेगा, राज्य सरकार नुकसान का चरणबद्ध आकलन करेगी और राहत उपायों को उसी अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार पुनर्वास कार्य पूरा होने और प्रभावित जिलों में सामान्य स्थिति बहाल होने तक बाढ़ पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी रहेगी। यह ऐसे समय में आया है जब असम प्रतिवर्ष मानसूनी बाढ़ से व्यापक तबाही झेलता है और दीर्घकालिक पुनर्वास एक बारहमासी चुनौती बनी रहती है।