असम बाढ़: भारतीय सेना ने 700 से अधिक लोगों को बचाया, 72 लाख प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना ने 22 जुलाई 2026 को ऊपरी असम के बाढ़ग्रस्त जिलों में चलाए जा रहे राहत एवं बचाव अभियान के तहत 700 से अधिक फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकाला है। शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिलों में लगातार बारिश और नदियों के उफान से विशाल क्षेत्र जलमग्न हो चुके हैं, जिससे यह असम में इस वर्ष की सबसे भीषण बाढ़ बन गई है।
मुख्य बचाव अभियान
सेना के स्पीयर कोर के अंतर्गत रेड शील्ड डिवीजन के जवान तीनों प्रभावित जिलों में चौबीसों घंटे मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान संचालित कर रहे हैं। बचाव दल ने बढ़ते बाढ़ के पानी में फंसे 700 से अधिक लोगों को निकाला है, जबकि फील्ड में तैनात टीमों के माध्यम से 150 से अधिक निवासियों को चिकित्सा सहायता प्रदान की गई है।
सेना ने प्रभावित परिवारों को आपातकालीन राशन पैकेट, स्वच्छ पेयजल और अन्य आवश्यक राहत सामग्री भी वितरित की है। अधिकारियों के अनुसार, चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद जवान जलमग्न गाँवों में फंसे परिवारों तक पहुँचने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।
हवाई सर्वेक्षण और इंजीनियरिंग सहायता
सेना के विमानन हेलीकॉप्टर दुर्गम स्थानों में फंसे लोगों की पहचान करने और बाढ़ की स्थिति का आकलन करने के लिए हवाई सर्वेक्षण कर रहे हैं। ये सर्वेक्षण बचाव दलों को बाढ़ के पानी से कटे हुए क्षेत्रों में अभियानों को प्राथमिकता देने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, सेना के इंजीनियर अलग-थलग पड़े गाँवों तक संपर्क बहाल करने में जुटे हैं, ताकि पहुँच मार्गों में सुधार हो सके और नागरिक प्रशासन के साथ समन्वित राहत कार्य सुनिश्चित किया जा सके।
आम जनता पर असर
नवीनतम आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, असम के 25 जिलों में 72 लाख से अधिक लोग इस बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। 31 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर, बचाव दल और वितरण केंद्र सक्रिय हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियाँ मानसून के कारण खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गौरतलब है कि असम हर वर्ष मानसून बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित होता है, परंतु इस बार का पैमाना असाधारण रूप से व्यापक है।
सरकार और सेना की प्रतिक्रिया
सेना ने स्पष्ट किया है कि वह नागरिक प्रशासन और अन्य आपदा राहत एजेंसियों के साथ समन्वय में काम कर रही है, ताकि प्रभावित लोगों को समय पर सुरक्षित निकाला जा सके और मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो। राहत अभियान जारी हैं और स्थिति पर करीबी नज़र रखी जा रही है।
क्या होगा आगे
अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ का पानी उतरने तक राहत एवं बचाव अभियान जारी रहेगा। सेना के जवान और इंजीनियर कटे हुए गाँवों में संपर्क बहाल करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के आधार पर आने वाले दिनों में स्थिति की समीक्षा की जाएगी।