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असम बाढ़: सेना का 'ऑपरेशन जल राहत-3' शुरू, शिवसागर-जोरहाट-चराइदेव से 150 लोग सुरक्षित

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असम बाढ़: सेना का 'ऑपरेशन जल राहत-3' शुरू, शिवसागर-जोरहाट-चराइदेव से 150 लोग सुरक्षित

सारांश

असम की भीषण बाढ़ के बीच भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन जल राहत-3' के तहत तीन जिलों में विशेष दल उतारे और 150 लोगों को सुरक्षित निकाला। यह इस अभियान की तीसरी कड़ी है — जो दर्शाती है कि असम में सेना की बाढ़-राहत भूमिका अब एक स्थायी तंत्र बन चुकी है।

मुख्य बातें

भारतीय सेना ने 21 जुलाई 2026 को 'ऑपरेशन जल राहत-3' शुरू किया।
शिवसागर , जोरहाट और चराइदेव जिलों में तीन विशेष बाढ़ राहत दल तैनात।
अब तक 150 लोग सुरक्षित निकाले गए — 73 पुरुष , 47 महिलाएँ , 30 बच्चे ।
इंजीनियर टास्क फोर्स और त्वरित प्रतिक्रिया दल की सहायता से अभियान चल रहा है।
शिवसागर में गरगांव कॉलेज , जोरहाट में मरियानी और चराइदेव में सोनारी से अभियान संचालित।
सेना ने कहा — ज़रूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन तुरंत तैनात किए जाएँगे।

भारतीय सेना ने 21 जुलाई 2026 को असम की गंभीर बाढ़ स्थिति के मद्देनज़र राज्य प्रशासन के अनुरोध पर 'ऑपरेशन जल राहत-3' शुरू किया। शिवसागर, जोरहाट और चराइदेव जिलों में तीन विशेष बाढ़ राहत दल तैनात किए गए हैं, जो अब तक 150 लोगों को — जिनमें 73 पुरुष, 47 महिलाएँ और 30 बच्चे शामिल हैं — सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने में सफल रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

सेना के अनुसार बचाव अभियान में इंजीनियर टास्क फोर्स और त्वरित प्रतिक्रिया दल की सहायता ली जा रही है। ये दल बाढ़ प्रभावित बस्तियों में निकासी, बचाव और मानवीय सहायता — तीनों मोर्चों पर एक साथ काम कर रहे हैं। यह ऑपरेशन राज्य प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय में चलाया जा रहा है।

जिलेवार तैनाती

शिवसागर जिले में सेना का राहत दल गरगांव कॉलेज को अपना अभियान केंद्र बनाकर नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहा है। जोरहाट जिले में एक दल मरियानी में तैनात है और जिला प्रशासन के साथ समन्वय में तत्काल कार्रवाई के लिए हर समय तैयार है; इसके अतिरिक्त एक रिज़र्व दल भी अल्प सूचना पर तैनाती के लिए स्टैंडबाय पर है। चराइदेव जिले में सोनारी से संचालित राहत दल लगातार बचाव अभियान जारी रखे हुए है।

सेना की प्रतिबद्धता

सेना ने स्पष्ट किया है कि बचाव अभियान अभी जारी है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन तुरंत तैनात किए जाएँगे। सेना का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं के समय नागरिकों के साथ खड़े रहना उसकी प्राथमिक प्रतिबद्धता है।

आम जनता पर असर

असम में बाढ़ प्रतिवर्ष लाखों लोगों को प्रभावित करती है और ब्रह्मपुत्र व उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में जनजीवन ठप हो जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई हिस्सों में मानसून की भारी बारिश से स्थिति पहले से नाज़ुक बनी हुई थी। गौरतलब है कि यह 'ऑपरेशन जल राहत' की तीसरी कड़ी है, जो दर्शाता है कि असम में सेना की बाढ़-राहत भूमिका अब एक स्थापित प्रतिक्रिया तंत्र बन चुकी है।

क्या होगा आगे

सेना के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य तब तक जारी रहेंगे जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती। अतिरिक्त दलों और संसाधनों को ज़रूरत के अनुसार तैनात करने की तैयारी पहले से है। राज्य प्रशासन और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय भी बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक दोहराव-आधारित संकट है। असम में बाढ़ हर साल आती है, हर साल सेना बुलाई जाती है, और हर साल राहत की तस्वीरें सामने आती हैं — लेकिन स्थायी बुनियादी ढाँचे और नदी-प्रबंधन पर सवाल वैसे ही बने रहते हैं। सेना की तत्परता सराहनीय है, पर असली जवाबदेही यह है कि 'ऑपरेशन जल राहत-4' की नौबत न आए।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऑपरेशन जल राहत-3' क्या है?
यह असम की बाढ़ से प्रभावित नागरिकों को बचाने के लिए भारतीय सेना द्वारा 21 जुलाई 2026 को शुरू किया गया राहत एवं बचाव अभियान है। इसके तहत शिवसागर, जोरहाट और चराइदेव जिलों में तीन विशेष बाढ़ राहत दल तैनात किए गए हैं।
सेना ने अब तक कितने लोगों को बचाया है?
सेना ने अब तक 150 लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकाला है, जिनमें 73 पुरुष, 47 महिलाएँ और 30 बच्चे शामिल हैं। बचाव अभियान अभी जारी है।
किन जिलों में सेना के दल तैनात हैं?
शिवसागर (गरगांव कॉलेज से संचालित), जोरहाट (मरियानी में तैनात) और चराइदेव (सोनारी से संचालित) — तीनों जिलों में अलग-अलग राहत दल काम कर रहे हैं। जोरहाट में एक अतिरिक्त रिज़र्व दल भी स्टैंडबाय पर है।
इस अभियान में सेना के साथ कौन-कौन सी एजेंसियाँ काम कर रही हैं?
भारतीय सेना राज्य प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर यह अभियान चला रही है। इंजीनियर टास्क फोर्स और त्वरित प्रतिक्रिया दल भी इस अभियान का हिस्सा हैं।
क्या बचाव अभियान अभी भी जारी है?
हाँ, सेना ने पुष्टि की है कि बचाव अभियान जारी है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन तुरंत तैनात किए जाएँगे। स्थिति सामान्य होने तक राहत कार्य बंद नहीं होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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