असम बाढ़ राहत: भारतीय सेना ने 931 नागरिकों और 330 पशुओं का उपचार किया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना की चिकित्सा टीमें 16 से 18 अगस्त 2025 के बीच असम के बाढ़ग्रस्त इलाकों में उन स्थानों तक पहुँचीं जहाँ सामान्य परिस्थितियों में पहुँचना लगभग असंभव था — और इस अभियान में 931 नागरिकों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ तथा 330 से अधिक पशुओं को पशु चिकित्सा सहायता प्रदान की गई। पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ की विभीषिका के बीच यह अभियान सेना की मानवीय भूमिका का ताज़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।
मुख्य घटनाक्रम
स्पीयर कोर के अंतर्गत सेना की इकाइयों ने असम के शिवसागर जिले में बरहोइटिंग, चिंतामणि घर और निमाईजान में विशेष चिकित्सा एवं पशु चिकित्सा शिविर आयोजित किए। इन शिविरों में नि:शुल्क दवाइयाँ वितरित की गईं और बाढ़ के कारण सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं से कट चुके परिवारों तक सीधे राहत पहुँचाई गई।
गौरतलब है कि इस अभियान की एक विशिष्टता यह रही कि सेना ने मनुष्यों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी अलग से पशु चिकित्सा शिविर स्थापित किए — जो बाढ़ राहत कार्यों में अपेक्षाकृत कम देखा जाता है। 330 से अधिक बाढ़ प्रभावित पशुओं की जाँच और उपचार किया गया।
सामुदायिक सहभागिता
यह अभियान केवल सेना तक सीमित नहीं रहा। स्थानीय राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के कैडेटों और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGO) ने भी सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। इस संयुक्त प्रयास ने राहत की पहुँच को और व्यापक बनाया तथा दूरदराज़ के प्रभावित गाँवों तक सहायता सुनिश्चित की।
सेना प्रमुख की समीक्षा
उल्लेखनीय है कि थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 28 और 29 जुलाई को पूर्वी थिएटर के सैन्य गठन क्षेत्रों का दो दिवसीय दौरा किया था। इस दौरे में उन्होंने पूर्वोत्तर की सुरक्षा स्थिति, सैन्य तैयारियों और शांति बनाए रखने के प्रयासों की समीक्षा के साथ-साथ बाढ़ राहत अभियानों की प्रगति का भी जायज़ा लिया था।
आम जनता पर असर
बाढ़ ने असम और पूर्वोत्तर के कई क्षेत्रों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। सामान्य स्वास्थ्य अवसंरचना के बाधित होने के कारण प्रभावित परिवारों के लिए चिकित्सा सहायता तक पहुँचना चुनौतीपूर्ण हो गया था। ऐसे में सेना के शिविरों ने न केवल स्वास्थ्य सेवाएँ दीं, बल्कि संकट के समय एक मनोवैज्ञानिक आश्वासन भी प्रदान किया।
क्या होगा आगे
पूर्वोत्तर में मानसून का मौसम अभी जारी है और बाढ़ की स्थिति में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। सेना के राहत अभियान आगे भी जारी रहने की संभावना है। थल सेना प्रमुख की हालिया समीक्षा यह संकेत देती है कि पूर्वोत्तर में राहत एवं बचाव कार्यों को शीर्ष स्तर पर प्राथमिकता दी जा रही है।