4 अक्टूबर 2026
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आईसीएसआई के 58वें स्थापना दिवस पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का संबोधन, कंपनी सचिवों को बताया 'सुशासन का संरक्षक'

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आईसीएसआई के 58वें स्थापना दिवस पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का संबोधन, कंपनी सचिवों को बताया 'सुशासन का संरक्षक'

सारांश

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने आईसीएसआई के 58वें स्थापना दिवस पर कंपनी सचिवों को 'सुशासन का संरक्षक' बताया और एआई युग में भी नैतिकता व जवाबदेही को मानवीय ज़िम्मेदारी क़रार दिया। विकसित भारत 2047 की राह में मज़बूत संस्थानों की अनिवार्यता पर ज़ोर देते हुए एमएसएमई अनुपालन कैलेंडर 2027 भी लॉन्च किया गया।

मुख्य बातें

राधाकृष्णन ने 4 अक्टूबर 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आईसीएसआई के 58वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया।
उन्होंने कंपनी सचिवों को आधुनिक अर्थव्यवस्था के 'अदृश्य ढाँचे' — विश्वास, पारदर्शिता और कॉर्पोरेट गवर्नेंस — का संरक्षक बताया।
एआई युग में भी सत्यनिष्ठा, जवाबदेही और पारदर्शिता को मानवीय ज़िम्मेदारी क़रार दिया।
एमएसएमई अनुपालन कैलेंडर 2027 और आईसीएसआई एमएसएमई एवं स्टार्ट-अप कैटलिस्ट पहलों का शुभारंभ किया गया।
विकसित भारत 2047 में आईसीएआई, आईसीएमएआई और आईसीएसआई की पूरक भूमिका पर ज़ोर; मज़बूत संस्थानों को भौतिक बुनियादी ढाँचे के समकक्ष बताया।
'शहीद की बेटी' पहल के तहत राष्ट्रीय रक्षा कोष में आईसीएसआई के योगदान की प्रशंसा की गई।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 4 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) के 58वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कंपनी सचिवों को 'सुशासन का संरक्षक' बताते हुए पारदर्शी, नैतिक और समावेशी कॉर्पोरेट गवर्नेंस को सुदृढ़ करने में संस्थान की लगभग छह दशकों की यात्रा की सराहना की।

मुख्य घटनाक्रम

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आईसीएसआई का रूपांतरण पूरे पेशे के विकास का प्रतीक है, जो आज कॉर्पोरेट पारदर्शिता, निवेशकों के विश्वास और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को सुदृढ़ बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। यह ऐसे समय में आया है जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), उन्नत डेटा विश्लेषण और तेज़ी से बदलते व्यावसायिक मॉडलों ने पेशेवरों की ज़िम्मेदारियाँ और भी जटिल बना दी हैं।

राधाकृष्णन ने स्पष्ट कहा, 'प्रौद्योगिकी सूचना उत्पन्न करने और निर्णयों का समर्थन करने के तरीके को बदल सकती है, लेकिन सत्यनिष्ठा, जवाबदेही, पारदर्शिता और ज़िम्मेदारी मानवीय ही रहती है।' उन्होंने विश्वास, पारदर्शिता और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को आधुनिक अर्थव्यवस्था का 'अदृश्य ढाँचा' क़रार दिया।

कंपनी सचिवों की भूमिका और आह्वान

उपराष्ट्रपति ने कंपनी सचिवों से आह्वान किया कि वे उद्यमों, स्टार्टअप्स, पारिवारिक व्यवसायों और सूचीबद्ध कंपनियों की कानूनी, रणनीतिक और नैतिक नींव को बनाए रखें। उन्होंने कहा कि सतत आर्थिक प्रगति के लिए निवेशकों का विश्वास अपरिहार्य है और कंपनी सचिव इस ढाँचे के केंद्र में हैं।

गौरतलब है कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को देखते हुए राधाकृष्णन ने आईसीएआई, आईसीएमएआई और आईसीएसआई की पूरक भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि मज़बूत संस्थान और सुशासन भौतिक व डिजिटल बुनियादी ढाँचे जितने ही महत्त्वपूर्ण होंगे।

नई पहलों का शुभारंभ

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने एमएसएमई अनुपालन कैलेंडर 2027 का शुभारंभ किया और एमएसएमई तथा स्टार्टअप के लिए आईसीएसआई एमएसएमई और स्टार्ट-अप कैटलिस्ट पहलों की प्रशंसा की। उन्होंने युवाओं को पेशे में प्रवेश के अधिक अवसर प्रदान करने के लिए आईसीएसआई की शुल्क माफी पहलों की भी सराहना की।

राधाकृष्णन ने 'शहीद की बेटी' पहल के अंतर्गत राष्ट्रीय रक्षा कोष और रक्षा मंत्रालय के सशस्त्र सेना ध्वज दिवस कोष में आईसीएसआई के योगदान की भी सराहना की और कहा, 'जब इरादा अच्छा होता है, तो सब कुछ अच्छा होता है।'

विशेषज्ञ उपस्थिति और व्यापक संदेश

समारोह में आईसीएसआई के अध्यक्ष सीएस पवन चंदक, राज्यसभा की पूर्व सांसद डॉ. सोनल मानसिंह तथा आईसीएसआई के सचिव सीएस आशीष मोहन सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। उपराष्ट्रपति ने 'सत्यम वदा, धर्मम चर' के सिद्धांत का आह्वान करते हुए कहा कि भारत को विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखना चाहिए — न दूसरों पर शर्तें थोपने के लिए, बल्कि इसलिए कि कोई भी भारत पर अवांछित शर्तें न थोप सके।

क्या होगा आगे

आईसीएसआई की नई पहलें, विशेष रूप से एमएसएमई अनुपालन कैलेंडर 2027, देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को नियामकीय अनुपालन में अधिक सक्षम बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। पेशेवर संस्थानों की यह सक्रियता विकसित भारत 2047 की यात्रा में कॉर्पोरेट गवर्नेंस को नई ऊँचाई देने का संकेत देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ध्यान देने योग्य यह है कि एमएसएमई अनुपालन के बोझ को कम करने की बात होती रही है, जबकि नए कैलेंडर और पहलें अनुपालन की परतें और बढ़ा सकती हैं — इस विरोधाभास पर समारोह में कोई चर्चा नहीं हुई। पेशेवर संस्थानों की वास्तविक परीक्षा तब होगी जब वे नियामकीय सरलीकरण और व्यापक पहुँच को एक साथ सुनिश्चित कर सकें।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईसीएसआई का 58वाँ स्थापना दिवस समारोह कहाँ और कब हुआ?
आईसीएसआई का 58वाँ स्थापना दिवस समारोह 4 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम को उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने संबोधित किया।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कंपनी सचिवों के बारे में क्या कहा?
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कंपनी सचिवों को 'सुशासन का संरक्षक' बताया और कहा कि वे कॉर्पोरेट पारदर्शिता, निवेशकों के विश्वास और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को मज़बूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एआई युग में भी सत्यनिष्ठा, जवाबदेही और पारदर्शिता मानवीय ज़िम्मेदारी ही रहेगी।
एमएसएमई अनुपालन कैलेंडर 2027 क्या है?
एमएसएमई अनुपालन कैलेंडर 2027 आईसीएसआई की एक नई पहल है, जिसे उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने 4 अक्टूबर 2026 को लॉन्च किया। इसका उद्देश्य देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को नियामकीय अनुपालन में अधिक सुव्यवस्थित और सक्षम बनाना है।
विकसित भारत 2047 में आईसीएसआई की क्या भूमिका बताई गई?
उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत 2047 की यात्रा में आईसीएआई, आईसीएमएआई और आईसीएसआई को एक मज़बूत कॉर्पोरेट और आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि मज़बूत संस्थान और सुशासन भौतिक व डिजिटल बुनियादी ढाँचे जितने ही महत्त्वपूर्ण होंगे।
'शहीद की बेटी' पहल क्या है और आईसीएसआई का इसमें क्या योगदान है?
'शहीद की बेटी' एक सामाजिक पहल है जिसके तहत आईसीएसआई ने राष्ट्रीय रक्षा कोष और रक्षा मंत्रालय के सशस्त्र सेना ध्वज दिवस कोष में योगदान दिया है। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा, 'जब इरादा अच्छा होता है, तो सब कुछ अच्छा होता है।'
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