एमएसएमई दिवस 2026: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन बोले — गुणवत्ता और AI अपनाए बिना 'विकसित भारत 2047' अधूरा
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 27 जून 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट शब्दों में कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भारत की आर्थिक संरचना की नींव हैं और 'विकसित भारत 2047' का महत्वाकांक्षी लक्ष्य एक सशक्त, नवाचार-आधारित और तकनीक-सक्षम एमएसएमई क्षेत्र के बिना हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने उद्यमियों से आग्रह किया कि गुणवत्ता, नवाचार और आधुनिक तकनीक को अपनाना ही दीर्घकालिक व्यावसायिक सफलता की असली कुंजी है।
समारोह और नई डिजिटल पहलों का शुभारंभ
डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस-2026 समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि एमएसएमई महज एक आर्थिक श्रेणी नहीं है — यह पहली पीढ़ी के उद्यमियों के साहस, युवाओं की आकांक्षाओं, महिला उद्यमियों के दृढ़ संकल्प और लाखों छोटे कारोबारियों के संघर्ष एवं सफलता का जीवंत प्रतीक है।
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने कई महत्वपूर्ण डिजिटल पहलों का उद्घाटन किया — जिनमें पीएमईजीपी 2.0 पोर्टल, समाधान 2.0 पोर्टल, प्रोक्योरमेंट एंड मार्केटिंग सपोर्ट (पीएमएस) 2.0 पोर्टल, एमएसएमई ग्लोबल मार्ट 2.0, टेस्टिंग सेंटर पोर्टल और मंत्रालय की बहुभाषी सुविधा पहल शामिल हैं। इसके साथ ही एमएसएमई आइडिया हैकाथॉन 6.0 लॉन्च किया गया और आत्मनिर्भर भारत (एसआरआई) फंड तथा पीएम विश्वकर्मा योजना पर ई-पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
उपराष्ट्रपति का उद्यमी अनुभव: व्यक्तिगत सफर से सबक
राधाकृष्णन ने इस अवसर पर अपने निजी उद्यमी जीवन का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता की आर्थिक सहायता से कपड़ों का एक छोटा कारोबार शुरू किया था। शुरुआती कठिनाइयों का डटकर सामना करते हुए, निरंतर सीखने और परिश्रम के बल पर उन्होंने एक सफल निटवियर निर्यात व्यवसाय खड़ा किया।
उन्होंने युवा उद्यमियों को संदेश दिया कि शुरुआती असफलताओं से विचलित हुए बिना अपने काम को पूरी लगन से सीखें और निरंतर आगे बढ़ते रहें। गौरतलब है कि किसी उपराष्ट्रपति द्वारा इस तरह का व्यक्तिगत उद्यमी अनुभव साझा करना एमएसएमई क्षेत्र के लिए एक असामान्य और प्रेरक संदेश था।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता पर जोर
उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार्य नहीं है। लागत नियंत्रण भले ही आवश्यक हो, लेकिन उत्पाद और सेवाओं की गुणवत्ता प्रतिस्पर्धियों से बेहतर बनाए रखना उससे भी अधिक जरूरी है।
उन्होंने हर माइक्रो उद्यम को लघु उद्यम और हर लघु उद्यम को मध्यम उद्यम बनने का लक्ष्य रखने की सलाह दी — यानी वृद्धि को एक सतत प्रक्रिया के रूप में देखने का आह्वान किया।
AI और नई तकनीक: खतरा नहीं, अवसर
संयुक्त राष्ट्र की इस वर्ष की थीम 'AI-संचालित भविष्य में मानव-केंद्रित उद्यमिता' का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती तकनीकों को भय की दृष्टि से नहीं, बल्कि नए अवसरों के द्वार के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जिस प्रकार कंप्यूटर के आगमन ने रोजगार के नए क्षेत्र और संभावनाएं उत्पन्न कीं, उसी प्रकार AI भी एमएसएमई के लिए विकास के नए रास्ते खोलेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार एमएसएमई को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने, बैंक ऋण की उपलब्धता बढ़ाने और डिजिटल तकनीक अपनाने को प्रोत्साहित करने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रही है।
एनएसआईसी सम्मान और सरकार की प्रतिक्रिया
समारोह में उपराष्ट्रपति ने नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (एनएसआईसी) को प्रतिष्ठित 'शेड्यूल ए' कंपनी का दर्जा मिलने पर सम्मानित किया। उपराष्ट्रपति ने एमएसएमई के सार्वभौमिक पंजीकरण पर भी बल दिया, यह कहते हुए कि व्यापक पंजीकरण से सरकार को सटीक आंकड़े प्राप्त होंगे जिनके आधार पर अधिक प्रभावी नीतियां तैयार की जा सकेंगी।
समारोह में केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी, राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। आने वाले समय में इन नई डिजिटल पहलों का क्रियान्वयन यह तय करेगा कि एमएसएमई क्षेत्र वास्तव में 'विकसित भारत 2047' की रीढ़ बन पाता है या नहीं।