28 जुलाई 2026
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असम बाढ़: शिवसागर के नामटियाल दारिकापार में परिवारों ने गँवाई आजीविका, CM सरमा बोले — 'सामान्य मानसून नहीं, अभूतपूर्व आपदा'

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असम बाढ़: शिवसागर के नामटियाल दारिकापार में परिवारों ने गँवाई आजीविका, CM सरमा बोले — 'सामान्य मानसून नहीं, अभूतपूर्व आपदा'

सारांश

शिवसागर के नामटियाल दारिकापार में बाढ़ ने एक घंटे में पूरे गाँव को डुबो दिया — लोग घंटों छाती तक पानी में फँसे रहे, मवेशी बह गए, घर तबाह हुए। CM सरमा ने इसे 'अभूतपूर्व आपदा' बताते हुए 400% अधिक बारिश को जिम्मेदार ठहराया।

मुख्य बातें

असम के शिवसागर जिले के खट पाथर क्षेत्र में 28 जुलाई 2026 को अचानक भीषण बाढ़ आई, नामटियाल दारिकापार गाँव सबसे अधिक प्रभावित।
कई लोग आठ घंटे तक छाती तक गहरे पानी में फँसे रहे; एक स्थानीय व्यक्ति ने नाव से बचाया।
एक परिवार की 10 मवेशियों की मौत हुई और 18 कुत्ते बाढ़ में बह गए।
प्रभावित परिवार नेशनल हाईवे किनारे अस्थायी शिविरों में हैं; भोजन, दवाइयाँ और पेयजल की कमी।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 27 जुलाई को बताया कि कई क्षेत्रों में सामान्य से 400% अधिक बारिश दर्ज हुई।
CM ने इस बाढ़ को 'अभूतपूर्व' बताया और कहा कि बाढ़-सुरक्षित माने जाने वाले इलाके भी जलमग्न हुए।

असम के शिवसागर जिले के खट पाथर क्षेत्र में 28 जुलाई 2026 को भीषण बाढ़ ने नामटियाल दारिकापार गाँव के दर्जनों परिवारों की वर्षों की मेहनत पलभर में बहा दी। लगातार मूसलाधार बारिश के कारण बाढ़ का पानी बिना किसी पूर्व चेतावनी के गाँव में घुस आया, जिससे लोगों को घर, मवेशी और जरूरी सामान बचाने का मौका तक नहीं मिला। यह आपदा केवल जल-प्लावन नहीं थी — इसने प्रभावित परिवारों की पूरी आजीविका और भविष्य की उम्मीदों पर भी चोट की।

अचानक आई तबाही का मंजर

एक स्थानीय निवासी ने बताया, 'पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि महज डेढ़ घंटे में हमारा पूरा घर डूब गया। हम अपना कोई भी सामान नहीं बचा पाए।' उन्होंने कहा कि उनके पास पाँच गायें और 12 बकरियाँ थीं, जिनमें से 10 की मौत हो गई और 18 कुत्ते बाढ़ के तेज बहाव में बह गए। एक अन्य निवासी ने बताया कि घर के अंदर कमर तक पानी भर जाने के कारण वे पिछले एक हफ्ते से ठीक से सो नहीं पाए

कई लोग बचाए जाने से पहले करीब आठ घंटे तक छाती तक गहरे पानी में फँसे रहे। उनकी जान एक स्थानीय व्यक्ति की साहसिक कोशिश से बच सकी, जिसने अपनी परवाह किए बिना नाव लेकर तेज बहाव के बीच पहुँचकर फँसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। एक बुजुर्ग व्यक्ति को पूरी रात अपने अनाज के भंडार (कोठार) के ऊपर बैठकर गुजारनी पड़ी; अगले दिन गाँव के ही एक व्यक्ति ने नाव से पहुँचकर उन्हें बचाया।

आम जनता पर असर

बेघर हुए परिवार अब नेशनल हाईवे के किनारे बने अस्थायी शिविरों में दिन गुजार रहे हैं। उनके घर अभी भी जलमग्न हैं और वापसी की कोई निश्चित तारीख नहीं है। भोजन, साफ पेयजल, कपड़े और दवाइयों की भारी कमी है। जिन परिवारों में बुजुर्ग और बीमार सदस्य हैं, उनके लिए हालात और भी विकट हैं — आवश्यक दवाइयाँ उन तक नहीं पहुँच पा रही हैं।

एक निवासी ने कहा, 'हमारा घर पूरी तरह पानी में डूबा है। स्थानीय लोगों से कुछ मदद मिली है, लेकिन हमें अभी और सहायता की जरूरत है।' बुजुर्ग महिलाओं ने अपने घर, मवेशी और कीमती सामान खो दिए हैं — उनकी पीड़ा इस आपदा की गहराई को बयान करती है।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 27 जुलाई को पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि इस बार की बाढ़ सामान्य मानसून बाढ़ नहीं थी। उन्होंने बताया कि राज्य के कई हिस्सों में सामान्य से 400 प्रतिशत से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिसके कारण वे इलाके भी जलमग्न हो गए जिन्हें आमतौर पर बाढ़-सुरक्षित माना जाता था।

सरमा ने कहा कि बाढ़ का पानी केवल नदियों के उफनने से नहीं फैला, बल्कि कम समय में हुई अत्यधिक वर्षा के कारण शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र प्रभावित हुए। उन्होंने इस आपदा को 'अभूतपूर्व' बताया।

क्या होगा आगे

प्रभावित परिवार राहत और पुनर्वास की प्रतीक्षा में हैं। गाँव वाले उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकारी मदद जल्द पहुँचेगी और वे अपनी टूटी जिंदगी को फिर से खड़ा कर सकेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण असम में बाढ़ की तीव्रता और आवृत्ति दोनों बढ़ रही हैं, और राज्य की पूर्व-चेतावनी प्रणाली की सीमाएँ एक बार फिर उजागर हुई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि जब मौसम विभाग के पास अत्यधिक वर्षा के पूर्वानुमान उपलब्ध थे, तो ग्रामीणों को समय पर चेतावनी क्यों नहीं मिली। नामटियाल दारिकापार जैसे गाँवों में लोगों का घंटों पानी में फँसे रहना असम की पूर्व-चेतावनी और निकासी प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर करता है। असम हर साल बाढ़ की चपेट में आता है, फिर भी राहत हर बार प्रतिक्रियात्मक (reactive) रहती है — न कि पूर्व-नियोजित। जब तक बाढ़ प्रबंधन को केवल राहत-वितरण से आगे ले जाकर स्थायी बुनियादी ढाँचे और सामुदायिक तैयारी से नहीं जोड़ा जाता, ये दर्दनाक कहानियाँ हर मानसून में दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम के शिवसागर में बाढ़ कब और कहाँ आई?
28 जुलाई 2026 को शिवसागर जिले के खट पाथर क्षेत्र, विशेषकर नामटियाल दारिकापार गाँव में अचानक भीषण बाढ़ आई। लगातार मूसलाधार बारिश के कारण बिना किसी पूर्व चेतावनी के गाँवों में पानी घुस गया।
बाढ़ में फँसे लोगों को कैसे बचाया गया?
कई लोग आठ घंटे तक छाती तक गहरे पानी में फँसे रहे। एक स्थानीय व्यक्ति ने अपनी जान जोखिम में डालकर नाव से तेज बहाव के बीच पहुँचकर फँसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। एक बुजुर्ग व्यक्ति को पूरी रात कोठार के ऊपर बैठकर गुजारनी पड़ी और अगले दिन उन्हें बचाया गया।
CM हिमंत बिस्वा सरमा ने इस बाढ़ के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 27 जुलाई को कहा कि यह सामान्य मानसून बाढ़ नहीं थी। उन्होंने बताया कि राज्य के कई हिस्सों में सामान्य से 400 प्रतिशत से अधिक बारिश हुई, जिससे बाढ़-सुरक्षित माने जाने वाले इलाके भी जलमग्न हो गए।
बाढ़ से प्रभावित परिवारों की स्थिति अभी कैसी है?
प्रभावित परिवार नेशनल हाईवे के किनारे बने अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं। उनके घर अभी भी पानी में डूबे हैं और भोजन, साफ पेयजल, कपड़े व दवाइयों की भारी कमी है। बुजुर्ग और बीमार लोगों को जरूरी दवाइयाँ नहीं मिल पा रही हैं।
इस बाढ़ में कितना नुकसान हुआ?
एक परिवार की पाँच गायों और 12 बकरियों में से 10 की मौत हो गई और 18 कुत्ते बाढ़ में बह गए। घरों में कमर तक पानी भर गया, सारा सामान नष्ट हो गया और कई परिवार बेघर हो गए। सटीक आधिकारिक नुकसान के आँकड़े अभी सामने नहीं आए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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