गडग हॉस्टल में मेडिकल छात्रा वीना हनापुर की संदिग्ध मौत, परिवार ने हत्या का आरोप लगाकर जांच की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के गडग जिले में नागावी स्थित महात्मा गांधी ग्रामीण विकास विश्वविद्यालय के छात्रावास में 24 जुलाई को मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ (एमपीएच) की छात्रा वीना हनापुर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई। परिवार ने आत्महत्या की संभावना को सिरे से खारिज करते हुए हत्या का आरोप लगाया है और पुलिस से निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की माँग की है।
घटनाक्रम: कैसे मिला शव
रिपोर्टों के अनुसार, वीना हनापुर का शव हॉस्टल के कमरे में एक डबल डेकर बेड से लटका हुआ पाया गया। परिवार का कहना है कि शव घुटनों के बल बैठी हुई अवस्था में था, जिससे मृत्यु की परिस्थितियाँ और भी संदिग्ध हो जाती हैं। परिवार ने यह भी बताया कि मृतका के चेहरे पर चोटों के निशान थे और नाक के पास खून की मौजूदगी थी, जिसे वे हत्या के संकेत मानते हैं।
परिवार के आरोप और संदेह
वीना के माता-पिता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी बेटी ने आत्महत्या नहीं की — किसी ने उस पर हमला किया और बाद में उसे फाँसी पर लटका दिया। परिवार ने विश्वविद्यालय प्रशासन के आचरण पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि परिजनों के परिसर पहुँचने से पहले ही शव को अस्पताल ले जाया जा चुका था, और उन्होंने माँग की कि यह स्पष्ट किया जाए कि विश्वविद्यालय कर्मचारियों ने परिवार की अनुपस्थिति में शव क्यों हटाया।
गौरतलब है कि वीना हनापुर अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए जानी जाती थीं और परीक्षाओं में लगातार अच्छे अंक प्राप्त करती थीं। इस पृष्ठभूमि में उनकी अचानक मृत्यु उनके सहपाठियों और परिजनों के लिए और भी अधिक स्तब्ध करने वाली है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच की स्थिति
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। अधिकारियों द्वारा फोरेंसिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा छात्रावास के कर्मचारियों और सहपाठियों के बयानों के आधार पर मृत्यु के सटीक कारण का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच के नतीजे आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह मामला आत्महत्या का है या हत्या का।
विश्वविद्यालय और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में छात्रावासों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। परिवार ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब माँगा है कि शव हटाने का निर्णय किसने और क्यों लिया। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की प्रक्रियागत चूक साक्ष्य संरक्षण को प्रभावित कर सकती है।
आगे क्या होगा
पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के आधार पर अगली कार्रवाई तय करेगी। परिवार ने न्याय मिलने तक अपना संघर्ष जारी रखने की बात कही है। इस मामले में आगे की जांच पर सभी की निगाहें टिकी हैं।