6 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मद्रास हाई कोर्ट ने थूथुकुडी कलेक्टर को किया तलब, मुफ्त घर स्थल पट्टों पर अवैध कब्जे का मामला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मद्रास हाई कोर्ट ने थूथुकुडी कलेक्टर को किया तलब, मुफ्त घर स्थल पट्टों पर अवैध कब्जे का मामला

सारांश

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने थूथुकुडी कलेक्टर को सीधे कठघरे में खड़ा किया — सवाल यह है कि जिस जमीन पर पहले से कब्जा था, वहाँ गरीब लाभार्थियों को पट्टे कैसे जारी हो गए? 118 नए लाभार्थियों के घर बनाने का हक और उनकी एक साल की समय सीमा दोनों दाँव पर हैं।

मुख्य बातें

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने 6 अक्टूबर 2026 को थूथुकुडी जिला कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया।
कोविलपट्टी में वर्ष 2002 में 280 लोगों को मुफ्त घर स्थल पट्टे जारी हुए थे; निर्माण न करने पर पट्टे रद्द हुए और 118 नए लाभार्थियों को आवंटन किया गया।
21 लाभार्थियों ने इस वर्ष जनवरी में निर्माण शुरू करने का प्रयास किया, लेकिन अवैध कब्जेदारों ने कथित तौर पर बाधा डाली और धमकाया।
न्यायमूर्ति वेलमुरुगन और न्यायमूर्ति रामकृष्णन की पीठ ने पूछा कि भूमि की स्थिति जाँचे बिना पट्टे कैसे जारी किए गए।
सरकार ने दावा किया कि कब्जे हटा दिए गए हैं; अदालत ने हलफनामा दाखिल करने का समय देने से इनकार किया।
मामले की अगली सुनवाई सोमवार को निर्धारित है।

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने 6 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले में मुफ्त घर स्थल योजना के तहत आवंटित पट्टों की जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए थूथुकुडी जिला कलेक्टर को सभी संबंधित दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया। यह मामला कोविलपट्टी में वर्ष 2002 में जारी पट्टों से जुड़ा है, जहाँ नए लाभार्थी अवैध कब्जेदारों के कारण निर्माण कार्य शुरू करने में असमर्थ हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिका थूथुकुडी के इलुप्पैयुरानी निवासी अंबुराज द्वारा दायर की गई है। उन्होंने अदालत को बताया कि कोविलपट्टी में वर्ष 2002 में पिछड़े वर्गों, अत्यंत पिछड़े वर्गों और विमुक्त समुदायों के 280 लोगों को मुफ्त घर स्थल के पट्टे जारी किए गए थे। कई लाभार्थियों ने लगभग 20 वर्षों तक आवंटित भूमि पर निर्माण नहीं किया, जिसके फलस्वरूप उनके पट्टे रद्द कर दिए गए।

इसके बाद जिला कलेक्टर ने 118 नए लाभार्थियों को पट्टे जारी किए। नियमों के अनुसार आवंटन के एक वर्ष के भीतर निर्माण पूर्ण करना अनिवार्य है। इसी क्रम में 21 लाभार्थियों ने इस वर्ष जनवरी में निर्माण कार्य आरंभ करने का प्रयास किया।

अवैध कब्जे और धमकियों का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई लोगों ने उक्त जमीनों पर अवैध कब्जा कर रखा है और वे नए लाभार्थियों को धमका रहे हैं तथा निर्माण कार्य रोक रहे हैं। जिला कलेक्टर और पुलिस को बार बार शिकायतें देने के बावजूद कथित तौर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने चेताया कि यदि एक वर्ष की समय सीमा में घर नहीं बने तो नए लाभार्थियों के पट्टे भी रद्द हो जाएँगे।

अदालत की कड़ी टिप्पणी

न्यायमूर्ति वेलमुरुगन और न्यायमूर्ति रामकृष्णन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कठोर सवाल उठाए। पीठ ने कहा, "इस योजना के तहत जमीन उन गरीब और जरूरतमंद लोगों को आवंटित की जाती है जिनके पास घर बनाने के लिए घर या जमीन नहीं है। जमीन आवंटित करने से पहले क्या अधिकारियों को जमीन की मौजूदा स्थिति की जाँच नहीं करनी चाहिए थी? अगर उन जमीनों के लिए पट्टे जारी किए जाते हैं, जिन पर कब्जा है, तो लाभार्थी वहाँ घर कैसे बना सकते हैं?"

सरकार की ओर से बताया गया कि कब्जे पहले ही हटा दिए गए हैं, लेकिन जजों ने यह सवाल भी उठाया कि बिना भूमि की पूर्व जाँच के पट्टे कैसे जारी किए जा सकते हैं। अदालत ने सरकारी वकील के जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय माँगने के अनुरोध को भी अस्वीकार कर दिया।

अदालत का आदेश और आगे की सुनवाई

खंडपीठ ने थूथुकुडी जिला कलेक्टर को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर मामले की विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया है। इस प्रकरण की अगली सुनवाई सोमवार को निर्धारित है।

यह मामला उस व्यापक समस्या की ओर ध्यान दिलाता है जहाँ कल्याणकारी आवास योजनाएँ क्रियान्वयन की खामियों के कारण अपने वास्तविक लाभार्थियों तक नहीं पहुँच पातीं। आने वाले दिनों में यदि कलेक्टर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, तो अदालत और कड़े निर्देश जारी कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीन की जाँच किए बिना पट्टे जारी कर दिए जाते हैं। दो दशकों में पट्टे रद्द होना और फिर नए लाभार्थियों को वही विवादित भूमि सौंपना यह दिखाता है कि रिकॉर्ड सुधार और भू अधिकार सत्यापन की व्यवस्था कितनी कमज़ोर है। पुलिस और प्रशासन दोनों को शिकायतें मिलने के बावजूद निष्क्रियता अधिक चिंताजनक है। हाई कोर्ट की सीधी दखलंदाज़ी आवश्यक है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस मामले के बाद राज्य सरकार पट्टा पूर्व भूमि सत्यापन को अनिवार्य करेगी।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मद्रास हाई कोर्ट ने थूथुकुडी कलेक्टर को क्यों तलब किया?
कोविलपट्टी में मुफ्त घर स्थल योजना के तहत जारी पट्टों की जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए थूथुकुडी जिला कलेक्टर को सभी दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि बिना भूमि की स्थिति जाँचे पट्टे कैसे जारी किए गए।
मुफ्त घर स्थल योजना क्या है और इसके लाभार्थी कौन हैं?
यह तमिलनाडु सरकार की एक कल्याणकारी योजना है जिसके तहत पिछड़े वर्गों, अत्यंत पिछड़े वर्गों और विमुक्त समुदायों के जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त में भूखंड (पट्टा) आवंटित किए जाते हैं। नियम के अनुसार लाभार्थियों को आवंटन के एक वर्ष के भीतर निर्माण करना अनिवार्य है।
इस मामले में नए लाभार्थियों को क्या समस्या हो रही है?
118 नए लाभार्थियों को जारी पट्टों की जमीन पर अवैध कब्जेदारों ने कब्जा कर रखा है। कथित तौर पर ये कब्जेदार लाभार्थियों को धमका रहे हैं और निर्माण कार्य रोक रहे हैं, जिससे एक वर्ष की अनिवार्य समय सीमा में घर न बन पाने पर उनके पट्टे रद्द होने का खतरा है।
अदालत की अगली सुनवाई कब होगी?
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार को निर्धारित की है, जिसमें थूथुकुडी जिला कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
सरकार ने अदालत में क्या रुख अपनाया?
सरकार की ओर से सुनवाई में बताया गया कि अवैध कब्जे पहले ही हटा दिए गए हैं। हालाँकि अदालत ने इस दावे पर संतोष न जताते हुए जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय देने का सरकारी अनुरोध भी अस्वीकार कर दिया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले