मद्रास हाई कोर्ट ने थूथुकुडी कलेक्टर को किया तलब, मुफ्त घर स्थल पट्टों पर अवैध कब्जे का मामला
सारांश
मुख्य बातें
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने 6 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले में मुफ्त घर स्थल योजना के तहत आवंटित पट्टों की जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए थूथुकुडी जिला कलेक्टर को सभी संबंधित दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया। यह मामला कोविलपट्टी में वर्ष 2002 में जारी पट्टों से जुड़ा है, जहाँ नए लाभार्थी अवैध कब्जेदारों के कारण निर्माण कार्य शुरू करने में असमर्थ हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिका थूथुकुडी के इलुप्पैयुरानी निवासी अंबुराज द्वारा दायर की गई है। उन्होंने अदालत को बताया कि कोविलपट्टी में वर्ष 2002 में पिछड़े वर्गों, अत्यंत पिछड़े वर्गों और विमुक्त समुदायों के 280 लोगों को मुफ्त घर स्थल के पट्टे जारी किए गए थे। कई लाभार्थियों ने लगभग 20 वर्षों तक आवंटित भूमि पर निर्माण नहीं किया, जिसके फलस्वरूप उनके पट्टे रद्द कर दिए गए।
इसके बाद जिला कलेक्टर ने 118 नए लाभार्थियों को पट्टे जारी किए। नियमों के अनुसार आवंटन के एक वर्ष के भीतर निर्माण पूर्ण करना अनिवार्य है। इसी क्रम में 21 लाभार्थियों ने इस वर्ष जनवरी में निर्माण कार्य आरंभ करने का प्रयास किया।
अवैध कब्जे और धमकियों का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई लोगों ने उक्त जमीनों पर अवैध कब्जा कर रखा है और वे नए लाभार्थियों को धमका रहे हैं तथा निर्माण कार्य रोक रहे हैं। जिला कलेक्टर और पुलिस को बार बार शिकायतें देने के बावजूद कथित तौर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने चेताया कि यदि एक वर्ष की समय सीमा में घर नहीं बने तो नए लाभार्थियों के पट्टे भी रद्द हो जाएँगे।
अदालत की कड़ी टिप्पणी
न्यायमूर्ति वेलमुरुगन और न्यायमूर्ति रामकृष्णन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कठोर सवाल उठाए। पीठ ने कहा, "इस योजना के तहत जमीन उन गरीब और जरूरतमंद लोगों को आवंटित की जाती है जिनके पास घर बनाने के लिए घर या जमीन नहीं है। जमीन आवंटित करने से पहले क्या अधिकारियों को जमीन की मौजूदा स्थिति की जाँच नहीं करनी चाहिए थी? अगर उन जमीनों के लिए पट्टे जारी किए जाते हैं, जिन पर कब्जा है, तो लाभार्थी वहाँ घर कैसे बना सकते हैं?"
सरकार की ओर से बताया गया कि कब्जे पहले ही हटा दिए गए हैं, लेकिन जजों ने यह सवाल भी उठाया कि बिना भूमि की पूर्व जाँच के पट्टे कैसे जारी किए जा सकते हैं। अदालत ने सरकारी वकील के जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय माँगने के अनुरोध को भी अस्वीकार कर दिया।
अदालत का आदेश और आगे की सुनवाई
खंडपीठ ने थूथुकुडी जिला कलेक्टर को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर मामले की विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया है। इस प्रकरण की अगली सुनवाई सोमवार को निर्धारित है।
यह मामला उस व्यापक समस्या की ओर ध्यान दिलाता है जहाँ कल्याणकारी आवास योजनाएँ क्रियान्वयन की खामियों के कारण अपने वास्तविक लाभार्थियों तक नहीं पहुँच पातीं। आने वाले दिनों में यदि कलेक्टर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, तो अदालत और कड़े निर्देश जारी कर सकती है।