आंध्र प्रदेश में ₹52,000 करोड़ की जमीन गरीबों को: सीएम चंद्रबाबू नायडू ने विजयवाड़ा में बांटे 26 हजार पट्टे
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 30 सितंबर 2026 को विजयवाड़ा में आयोजित 'पेदलाकु पट्टाभिषेकम' कार्यक्रम में घोषणा की कि राज्य सरकार ने अब तक गरीब परिवारों को कुल ₹52,000 करोड़ मूल्य की जमीन वितरित की है। इस अवसर पर उन्होंने 26,000 परिवारों को आवासीय भूमि के नियमितीकरण के पट्टे सौंपे, जो राज्य के इतिहास में एकल कार्यक्रम में किए गए सबसे बड़े भूमि वितरणों में से एक है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री नायडू ने बताया कि विजयवाड़ा में वितरित की जा रही भूमि का कुल मूल्य ₹28,112 करोड़ है। प्रत्येक लाभार्थी को औसतन 130 वर्ग गज का भूखंड दिया गया है, और प्रत्येक भूखंड की बाज़ार कीमत लगभग ₹50 लाख से ₹2 करोड़ के बीच बताई गई है।
नायडू ने कहा, "हमने विशाखापत्तनम में 28 हजार लोगों, मंगलगिरी में 5,800 परिवारों और अब विजयवाड़ा में 26 हजार परिवारों को जमीन के पट्टे बांटे हैं। कुल 60 हजार गरीबों को जमीन का अधिकार देने को मैं अपना सौभाग्य मानता हूं।"
सरकार की प्रतिक्रिया और दावे
मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम को गठबंधन सरकार की ओर से गरीबों के आत्मसम्मान का 'पट्टाभिषेक' करार दिया। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन सरकार चुनाव के दौरान किए गए प्रत्येक वादे को पूरा कर रही है और विकास कार्यों पर पहले ही ₹1.50 लाख करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।
नायडू ने तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री एन.टी. रामाराव के नारे — 'गरीबों के लिए भोजन, आवास और कपड़ा' — का स्मरण कराया और कहा कि वर्तमान सरकार उसी विरासत को आगे बढ़ा रही है।
पिछली सरकार पर आरोप
मुख्यमंत्री ने 2019 से 2024 के बीच की तत्कालीन वाईएसआरसीपी (YSRCP) सरकार पर आरोप लगाया कि उसने हर घर में संपत्ति से जुड़े विवाद पैदा किए। उन्होंने कहा, "उन्होंने जमीन के पट्टा पासबुक पर अपनी तस्वीरें तक लगाईं। लैंड टाइटलिंग एक्ट के जरिए समस्याएं पैदा की गईं।"
नायडू ने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने केवल सर्वे के पत्थरों पर तस्वीरें लगाने के लिए ₹800 करोड़ खर्च किए थे। गौरतलब है कि वर्तमान गठबंधन सरकार राज्य की सभी भूमियों का पुनः सर्वे करा रही है और आधिकारिक राजकीय चिह्न वाली पट्टादार पासबुक जारी कर रही है।
आम जनता पर असर
यह योजना उन हजारों परिवारों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो दशकों से अपनी आवासीय जमीन पर कानूनी अधिकार के बिना रह रहे थे। 130 वर्ग गज के औसत भूखंड का स्वामित्व इन परिवारों को बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं और संपत्ति निर्माण तक पहुँच दिला सकता है — जो अब तक उनकी पहुँच से बाहर था।
यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में भूमि विवाद एक पुरानी और संवेदनशील समस्या रहे हैं। भूमि अधिकारों का औपचारिकीकरण न केवल सामाजिक सुरक्षा बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण का भी आधार बनता है।
क्या होगा आगे
मुख्यमंत्री नायडू ने अगले तीन वर्षों में ₹35,000 करोड़ की लागत से 36 सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने का संकल्प लिया। उन्होंने यह भी कहा कि 2028 के कृष्णा पुष्करालु तक राज्य में कृष्णा और गोदावरी नदियों से पर्याप्त जल उपलब्ध होगा। नायडू के अनुसार, विकास और कल्याण गठबंधन सरकार की दो आँखें हैं और भविष्य में समृद्धि के लिए दोनों को साथ लेकर चलना आवश्यक है।