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गांधी सरोवर परियोजना: तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का जताया आभार, 83.814 एकड़ रक्षा भूमि को मिली मंजूरी

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गांधी सरोवर परियोजना: तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का जताया आभार, 83.814 एकड़ रक्षा भूमि को मिली मंजूरी

सारांश

हैदराबाद के बापू घाट पर गांधी सरोवर परियोजना को हरी झंडी मिल गई है। रक्षा मंत्रालय ने गोलकोंडा तोपखाना केंद्र की ₹533.42 करोड़ मूल्य की 83.814 एकड़ भूमि पर EVI आधार पर कार्य की अनुमति दी — यह मूसी नदी पुनर्जीवन की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्रालय ने 18 जून 2026 को गांधी सरोवर परियोजना के लिए 83.814 एकड़ रक्षा भूमि पर कार्य की अनुमति दी।
भूमि का मूल्य ₹533.42 करोड़ आंका गया है; अनुमति EVI (समान मूल्य अवसंरचना) निर्माण के आधार पर दी गई।
परियोजना तोपखाना केंद्र गोलकोंडा, हैदराबाद में बापू घाट को विश्व स्तरीय सांस्कृतिक-पारिस्थितिक केंद्र के रूप में विकसित करेगी।
फरवरी 1948 में महात्मा गांधी की अस्थियाँ ईसा-मूसी संगम पर विसर्जित की गई थीं, जो इस स्थल को राष्ट्रीय महत्व देती है।
CM रेवंत रेड्डी ने मूल रूप से 98.20 एकड़ भूमि हस्तांतरण का अनुरोध किया था।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने 19 जून 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्रालय और भारतीय सेना के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। यह आभार गांधी सरोवर परियोजना के लिए हैदराबाद स्थित मूसी रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MRDRC) को कार्य आरंभ करने की अनुमति मिलने के बाद दिया गया। रक्षा मंत्रालय ने 18 जून को सेना प्रमुख को लिखे पत्र में तोपखाना केंद्र गोलकोंडा में 83.814 एकड़ रक्षा भूमि पर समान मूल्य अवसंरचना (EVI) के निर्माण के आधार पर यह अनुमति प्रदान की।

परियोजना का स्वरूप और महत्व

रक्षा मंत्रालय के 18 जून के पत्र के अनुसार, 83.814 एकड़ रक्षा भूमि का मूल्य ₹533.42 करोड़ आंका गया है। इस भूमि पर कार्य की अनुमति EVI निर्माण के बदले दी गई है, जो सेना (LMA) को देय होगी। गांधी सरोवर परियोजना, मूसी नदी पुनर्जीवन पहल का एक अभिन्न अंग है, जिसके तहत बापू घाट को विश्व स्तरीय शैक्षिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने रक्षा मंत्री को यह भी अवगत कराया था कि फरवरी 1948 में महात्मा गांधी की अस्थियाँ ईसा और मूसी नदियों के पवित्र संगम पर विसर्जित की गई थीं, जिससे यह स्थल राष्ट्रीय महत्व का बन गया है। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार इस स्थल को महात्मा गांधी के आदर्शों और विरासत को प्रतिबिंबित करने वाले केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है।

मुख्यमंत्री की पहल और वार्ता

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ इस परियोजना को लेकर कई दौर की चर्चा की थी। उन्होंने रक्षा मंत्री से 98.20 एकड़ रक्षा भूमि हस्तांतरित करने का अनुरोध किया था और ईसा-मूसी संगम पर आयोजित होने वाले शिलान्यास समारोह में उपस्थित रहने का आग्रह भी किया था। यह मंजूरी उन्हीं प्रयासों का परिणाम है।

मूसी पुनर्जीवन का व्यापक लक्ष्य

गांधी सरोवर परियोजना, तेलंगाना सरकार की व्यापक मूसी नदी पुनर्जीवन परियोजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पारिस्थितिक बहाली और सतत विकास है। मुख्यमंत्री ने इस मंजूरी को मूसी नदी के नदी तट को एक जीवंत पारिस्थितिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक धरोहर में बदलने की दिशा में 'महत्वपूर्ण मील का पत्थर' बताया। आने वाले समय में इस परियोजना के शिलान्यास की तारीख और क्रियान्वयन की रूपरेखा सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि अनुरोधित 98.20 एकड़ के बजाय केवल 83.814 एकड़ की अनुमति मिली है — यह अंतर परियोजना के अंतिम स्वरूप पर असर डाल सकता है। EVI आधारित अनुमति का अर्थ है कि तेलंगाना सरकार को रक्षा भूमि के बदले समकक्ष अवसंरचना का निर्माण करना होगा, जो वित्तीय और प्रशासनिक दृष्टि से एक जटिल प्रक्रिया है। मूसी नदी पुनर्जीवन परियोजना पहले से ही बड़े पैमाने की महत्वाकांक्षाओं के कारण चर्चा में रही है — गांधी जी की विरासत से जुड़े इस स्थल का विकास राजनीतिक और भावनात्मक दोनों दृष्टियों से संवेदनशील है, और क्रियान्वयन की पारदर्शिता इसकी विश्वसनीयता तय करेगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गांधी सरोवर परियोजना क्या है?
गांधी सरोवर परियोजना तेलंगाना सरकार की मूसी नदी पुनर्जीवन पहल का हिस्सा है, जिसके तहत हैदराबाद के बापू घाट को महात्मा गांधी के आदर्शों को प्रतिबिंबित करने वाले विश्व स्तरीय शैक्षिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यह परियोजना ईसा और मूसी नदियों के उस संगम पर स्थित है जहाँ फरवरी 1948 में महात्मा गांधी की अस्थियाँ विसर्जित की गई थीं।
रक्षा मंत्रालय ने कितनी भूमि पर कार्य की अनुमति दी है?
रक्षा मंत्रालय ने 18 जून 2026 को तोपखाना केंद्र गोलकोंडा में 83.814 एकड़ रक्षा भूमि पर कार्य की अनुमति दी है, जिसका मूल्य ₹533.42 करोड़ आंका गया है। यह अनुमति समान मूल्य अवसंरचना (EVI) निर्माण के आधार पर दी गई है।
EVI (समान मूल्य अवसंरचना) का क्या अर्थ है?
EVI यानी समान मूल्य अवसंरचना एक व्यवस्था है जिसके तहत रक्षा भूमि के उपयोग के बदले में राज्य सरकार को सेना (LMA) के लिए समकक्ष मूल्य की अवसंरचना का निर्माण करना होता है। इस मामले में तेलंगाना सरकार को ₹533.42 करोड़ मूल्य की EVI सेना को देनी होगी।
बापू घाट का ऐतिहासिक महत्व क्यों है?
बापू घाट हैदराबाद में ईसा और मूसी नदियों के संगम पर स्थित है। फरवरी 1948 में महात्मा गांधी की अस्थियाँ इसी पवित्र संगम में विसर्जित की गई थीं, जिससे यह स्थल राष्ट्रीय और ऐतिहासिक महत्व का बन गया है।
CM रेवंत रेड्डी ने कितनी भूमि का अनुरोध किया था और कितनी मिली?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से 98.20 एकड़ रक्षा भूमि हस्तांतरित करने का अनुरोध किया था, जबकि रक्षा मंत्रालय ने 83.814 एकड़ पर कार्य की अनुमति प्रदान की है।
राष्ट्र प्रेस
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