गणपति जुलूस पर अंडे फेंकना निंदनीय, दोषियों को कड़ी सजा मिले: शिवसेना (यूबीटी) के आनंद दुबे
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 24 अगस्त को मुंबई में कहा कि गणपति जुलूस के दौरान रिहायशी इलाकों से अंडे फेंके जाने की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। साथ ही दुबे ने कंगना रनौत और बाबा रामदेव के बीच चल रहे विवाद को भी सभ्य समाज के लिए अशोभनीय करार दिया।
गणपति जुलूस पर हमले की निंदा
आनंद दुबे ने कहा कि 14 सितंबर से गणपति महोत्सव का शुभारंभ होने वाला है और इस पावन अवसर की पूर्व संध्या पर जब भगवान गणपति की सवारी निकल रही थी, तभी रिहायशी इलाकों से उस पर अंडे फेंके गए। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे लोग कौन हैं जो सनातन और हिंदू धर्म को इस देश में कमज़ोर करना चाहते हैं। दुबे ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया कि इस घटना के दोषियों की पहचान कर उन्हें कठोर दंड दिया जाए।
कंगना रनौत-बाबा रामदेव विवाद पर प्रतिक्रिया
दुबे ने कहा कि कंगना रनौत और बाबा रामदेव दोनों ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े हैं और एक ही विचारधारा के समर्थक हैं। उनके बीच इस प्रकार का वाद-विवाद न तो एक महिला सांसद को शोभा देता है और न ही एक संत को। उनका मानना है कि इस विषय को अनावश्यक तूल नहीं देना चाहिए और सभ्य समाज में ऐसे आचरण की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
काशी में मांसाहार विवाद पर आपत्ति
दुबे ने यह भी कहा कि सावन का पवित्र महीना चल रहा है और काशी भगवान महादेव की नगरी है। उनके अनुसार, इस पवित्र नगरी में भोज-भंडारे के दौरान मांसाहार परोसे जाने की खबरें अत्यंत आपत्तिजनक हैं। उन्होंने कहा कि काशी जैसे धार्मिक स्थल पर ऐसी हरकत की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
चीनी की महंगाई और सरकार पर सवाल
दुबे ने चीनी की बढ़ती कीमतों और किल्लत को दुखद बताते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि असमय बारिश से गन्ने की फसल प्रभावित होने की जानकारी पहले से थी, इसके बावजूद खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय ने न तो समय पर आयात की व्यवस्था की, न कालाबाज़ारों पर कार्रवाई की और न ही गन्ने से बनने वाले इथेनॉल पर अंकुश लगाने पर विचार किया। दुबे ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि आज देश में 'चीनी कड़वाहट दे रही है और प्याज आंखों से आंसू निकाल रही है।'
आगे क्या
गणपति महोत्सव 14 सितंबर से शुरू होने वाला है और इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। शिवसेना (यूबीटी) की यह माँग राज्य सरकार के लिए एक राजनीतिक परीक्षा भी है कि वह धार्मिक जुलूसों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में कितनी सक्षम है।