24 अगस्त 2026
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मध्य प्रदेश पोषण आहार संयंत्र घोटाला: कांग्रेस विधायक बरैया ने CM यादव को लिखा पत्र, जांच और कार्रवाई की मांग

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मध्य प्रदेश पोषण आहार संयंत्र घोटाला: कांग्रेस विधायक बरैया ने CM यादव को लिखा पत्र, जांच और कार्रवाई की मांग

सारांश

मध्य प्रदेश में पोषण आहार संयंत्रों के बंद होने और शिशु व धात्री महिलाओं की मौतों के बीच कांग्रेस विधायक बरैया ने CM यादव को पत्र लिखकर जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि दो वर्ष पुरानी EOW प्राथमिकी के बावजूद चालान पेश नहीं हुआ और दोषी अधिकारियों को बचाया जा रहा है।

मुख्य बातें

भांडेर विधानसभा से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने 24 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा।
आरोप: आजीविका मिशन के पोषण आहार संयंत्रों में भ्रष्टाचार के चलते गर्भवती व धात्री महिलाओं और शिशुओं को समय पर पोषण नहीं मिल रहा।
विधायक ने पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और पूर्व सीईओ ललित मोहन बेलबाल को जिम्मेदार ठहराया।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में दो वर्ष पूर्व दर्ज प्राथमिकी के बावजूद अब तक चालान पेश नहीं हुआ।
मध्य प्रदेश शिशु मृत्यु दर और धात्री महिला मृत्यु दर में देश में शीर्ष पर बताया जा रहा है।

मध्य प्रदेश के दतिया जिले के भांडेर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने 24 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेश के पोषण आहार संयंत्रों की उच्चस्तरीय जांच कराने और संचालन व वितरण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। बरैया का आरोप है कि आजीविका मिशन के अंतर्गत चलाए जा रहे इन संयंत्रों में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते गर्भवती और धात्री महिलाओं तथा शिशुओं को समय पर पोषण आहार नहीं मिल पा रहा, जिसके परिणामस्वरूप मौतें हो रही हैं।

मुख्य आरोप और पत्र की विषय-वस्तु

विधायक बरैया ने अपने पत्र में कहा है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत आजीविका मिशन द्वारा संचालित पोषण आहार संयंत्र एक के बाद एक बंद होते जा रहे हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मध्य प्रदेश शिशु मृत्यु दर और धात्री महिलाओं की मृत्यु दर के मामले में देश में शीर्ष पर बना हुआ है — एक तथ्य जो लगातार सामने आ रहा है।

बरैया ने अपने पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'यह सामान्य मृत्युएँ नहीं, बल्कि हत्याएँ हैं।' उनके अनुसार इसकी जिम्मेदारी पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और आजीविका मिशन के पूर्व सीईओ व सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी ललित मोहन बेलबाल पर है, जिनके कार्यकाल में इन संयंत्रों में भ्रष्टाचार पनपा।

भ्रष्टाचार और जांच की स्थिति

विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार इन अधिकारियों को लगातार बचाने का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में एक अधिकारी के खिलाफ नियुक्ति मामले में दो वर्ष पूर्व प्राथमिकी दर्ज हुई थी, परंतु अब तक चालान पेश नहीं किया गया। यह मामला जांच एजेंसी की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

गौरतलब है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका पर विधायक ने कोई आपत्ति नहीं जताई — उन्होंने स्पष्ट किया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपना दायित्व निभा रही हैं, परंतु आजीविका मिशन स्तर पर हुए भ्रष्टाचार ने पूरी आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया है।

आम जनता पर असर

बरैया के अनुसार पोषण आहार की कमी के कारण प्रदेश में लाखों परिवार प्रभावित हो रहे हैं। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर पर्याप्त पोषण न मिलना न केवल स्वास्थ्य संकट है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं की विफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण भी है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पोषण अभियान के तहत कुपोषण उन्मूलन को प्राथमिकता दे रही है।

विधायक की मांगें और आगे की राह

बरैया ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं — पहली, आजीविका मिशन के सभी पोषण आहार संयंत्रों की तत्काल उच्चस्तरीय जांच; दूसरी, संचालन व वितरण में लापरवाही के दोषी अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई; और तीसरी, शिशुओं तथा गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की असामान्य मृत्यु को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाना। इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन EOW में दो साल बाद भी चालान न पेश होना यह बताता है कि जवाबदेही की प्रक्रिया कितनी खोखली है। असली सवाल यह है कि जब केंद्र का पोषण अभियान राष्ट्रीय प्राथमिकता है, तब राज्य स्तर पर आजीविका मिशन के संयंत्र बंद क्यों हो रहे हैं और दोषी अधिकारी सुरक्षित क्यों हैं। विपक्ष का दबाव तब तक प्रतीकात्मक रहेगा जब तक सत्तारूढ़ दल स्वतंत्र जांच और सत्यापन योग्य परिणामों की जिम्मेदारी नहीं लेता।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फूल सिंह बरैया ने CM मोहन यादव को पत्र क्यों लिखा?
कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने आजीविका मिशन के पोषण आहार संयंत्रों में कथित भ्रष्टाचार और संचालन विफलता के चलते गर्भवती, धात्री महिलाओं और शिशुओं की हो रही मौतों को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है।
मध्य प्रदेश के पोषण आहार संयंत्रों में क्या समस्या है?
आरोपों के अनुसार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत आजीविका मिशन द्वारा संचालित पोषण आहार संयंत्र बंद हो रहे हैं और भ्रष्टाचार के कारण लाभार्थियों तक समय पर आहार नहीं पहुँच पा रहा। इससे राज्य में शिशु मृत्यु दर और धात्री महिलाओं की मृत्यु दर पर असर पड़ रहा है।
किन अधिकारियों पर आरोप लगाए गए हैं?
विधायक बरैया ने पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और आजीविका मिशन के पूर्व सीईओ व सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी ललित मोहन बेलबाल पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार इन्हीं के कार्यकाल में संयंत्रों में अनियमितताएँ पनपीं।
EOW में दर्ज मामले की क्या स्थिति है?
बरैया के अनुसार एक अधिकारी के खिलाफ नियुक्ति मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में दो वर्ष पूर्व प्राथमिकी दर्ज हुई थी, लेकिन अब तक चालान पेश नहीं किया गया है। इसे विधायक ने सरकार द्वारा आरोपियों को बचाने की कोशिश बताया है।
इस मामले में मुख्यमंत्री से क्या मांगें की गई हैं?
विधायक ने तीन मांगें रखी हैं — सभी पोषण आहार संयंत्रों की उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई, और शिशुओं तथा गर्भवती व धात्री महिलाओं की असामान्य मृत्यु रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाना।
राष्ट्र प्रेस
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