मध्य प्रदेश पोषण आहार संयंत्र घोटाला: कांग्रेस विधायक बरैया ने CM यादव को लिखा पत्र, जांच और कार्रवाई की मांग
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के दतिया जिले के भांडेर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने 24 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेश के पोषण आहार संयंत्रों की उच्चस्तरीय जांच कराने और संचालन व वितरण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। बरैया का आरोप है कि आजीविका मिशन के अंतर्गत चलाए जा रहे इन संयंत्रों में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते गर्भवती और धात्री महिलाओं तथा शिशुओं को समय पर पोषण आहार नहीं मिल पा रहा, जिसके परिणामस्वरूप मौतें हो रही हैं।
मुख्य आरोप और पत्र की विषय-वस्तु
विधायक बरैया ने अपने पत्र में कहा है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत आजीविका मिशन द्वारा संचालित पोषण आहार संयंत्र एक के बाद एक बंद होते जा रहे हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मध्य प्रदेश शिशु मृत्यु दर और धात्री महिलाओं की मृत्यु दर के मामले में देश में शीर्ष पर बना हुआ है — एक तथ्य जो लगातार सामने आ रहा है।
बरैया ने अपने पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'यह सामान्य मृत्युएँ नहीं, बल्कि हत्याएँ हैं।' उनके अनुसार इसकी जिम्मेदारी पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और आजीविका मिशन के पूर्व सीईओ व सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी ललित मोहन बेलबाल पर है, जिनके कार्यकाल में इन संयंत्रों में भ्रष्टाचार पनपा।
भ्रष्टाचार और जांच की स्थिति
विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार इन अधिकारियों को लगातार बचाने का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में एक अधिकारी के खिलाफ नियुक्ति मामले में दो वर्ष पूर्व प्राथमिकी दर्ज हुई थी, परंतु अब तक चालान पेश नहीं किया गया। यह मामला जांच एजेंसी की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
गौरतलब है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका पर विधायक ने कोई आपत्ति नहीं जताई — उन्होंने स्पष्ट किया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपना दायित्व निभा रही हैं, परंतु आजीविका मिशन स्तर पर हुए भ्रष्टाचार ने पूरी आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया है।
आम जनता पर असर
बरैया के अनुसार पोषण आहार की कमी के कारण प्रदेश में लाखों परिवार प्रभावित हो रहे हैं। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर पर्याप्त पोषण न मिलना न केवल स्वास्थ्य संकट है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं की विफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण भी है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पोषण अभियान के तहत कुपोषण उन्मूलन को प्राथमिकता दे रही है।
विधायक की मांगें और आगे की राह
बरैया ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं — पहली, आजीविका मिशन के सभी पोषण आहार संयंत्रों की तत्काल उच्चस्तरीय जांच; दूसरी, संचालन व वितरण में लापरवाही के दोषी अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई; और तीसरी, शिशुओं तथा गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की असामान्य मृत्यु को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाना। इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।