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गौरव गोगोई का दावा: असम में सरकार बनने पर हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ जांच होगी

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गौरव गोगोई का दावा: असम में सरकार बनने पर हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ जांच होगी

सारांश

गौरव गोगोई का दावा है कि कांग्रेस असम में सरकार बनाएगी और सत्ता में आने के बाद हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ जांच शुरू होगी। यह राजनीतिक विवाद असम में गर्मा गया है।

मुख्य बातें

गौरव गोगोई का सरकार बनाने का दावा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ जांच की योजना विवाद का कारण: पवन खेड़ा के आरोप सरमा और पत्नी ने आरोपों का खंडन किया मामला न्यायालय तक पहुंचा

गुवाहाटी, १८ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के प्रमुख सदस्य गौरव गोगोई ने शनिवार को कहा कि उनकी पार्टी असम में सरकार बनाने में सफल होगी। उन्होंने यह भी बताया कि सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ जांच प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

गोगोई ने पत्रकारों से कहा कि ४ मई को उनकी सरकार का गठन होगा और इसके तुरंत बाद वे सरमा के खिलाफ जांच की कार्रवाई शुरु करेंगे।

यह बयान उस समय सामने आया है जब हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के बीच विवाद चल रहा है, जो असम में एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि सरमा की पत्नी, रिनिकी सरमा, के पास कई विदेशी पासपोर्ट हैं और उनके पास दुबई में संपत्तियाँ एवं अमेरिका में व्यापारिक संबंधों की जानकारी है।

उन्होंने कहा कि उनके पास संयुक्त अरब अमीरात, एंटीगुआ और बारबुडा, और मिस्र जैसे देशों के पासपोर्ट हैं, जिससे वैधता और प्रकटीकरण मानदंडों पर सवाल उठते हैं।

इन आरोपों ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया। सरमा और उनकी पत्नी ने इन दावों को खारिज करते हुए इन्हें दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक प्रेरित बताया।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया और खेड़ा के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई की चेतावनी दी।

यह विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल गया है, जिसमें रिनिकी सरमा की शिकायत के आधार पर असम में खेड़ा के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई है। इसके चलते पुलिस ने मामले से संबंधित कार्रवाई शुरू की है।

खेड़ा ने पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत प्राप्त की थी, लेकिन असम पुलिस द्वारा इसे चुनौती दिए जाने के बाद मामला भारत के सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गया।

एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, सर्वोच्च न्यायालय ने खेड़ा को गिरफ्तारी से सुरक्षा देने से इनकार करते हुए उन्हें असम की उचित अदालत में जाने का निर्देश दिया।

इसके बाद, सरमा ने कहा कि खेड़ा को गुवाहाटी में अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करना चाहिए और कानूनी प्रक्रिया का सामना करना चाहिए।

यह मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया है, जिसमें कांग्रेस अपने आरोपों पर अड़ी हुई है और भाजपा उन्हें निराधार और मानहानिकारक बताकर खारिज कर रही है।

यह विवाद न केवल असम में राजनीतिक माहौल को गर्म कर रहा है, बल्कि कानूनी कार्रवाई को चुनावी बयानबाजी से भी जोड़ दिया है, जिससे यह एक केंद्रीय मुद्दा बन गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह सिर्फ एक राज्य का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौरव गोगोई ने कब और क्या कहा?
गौरव गोगोई ने 18 अप्रैल को कहा कि कांग्रेस असम में सरकार बनाएगी और इसके बाद हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ जांच शुरू की जाएगी।
यह विवाद किस वजह से शुरू हुआ?
यह विवाद पवन खेड़ा के आरोपों के कारण शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने सरमा की पत्नी के विदेशी पासपोर्टों का उल्लेख किया।
सरमा और उनकी पत्नी ने आरोपों को कैसे प्रतिक्रिया दी?
सरमा और उनकी पत्नी ने आरोपों को मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण बताया।
क्या मामला न्यायालय तक पहुंचा?
जी हाँ, मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा और खेड़ा को गिरफ्तारी से सुरक्षा देने से इनकार कर दिया गया।
इस विवाद का राजनीतिक माहौल पर क्या असर पड़ा है?
यह विवाद असम में राजनीतिक माहौल को गर्म कर रहा है और चुनावी बयानबाजी का केंद्रीय मुद्दा बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
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