राहुल-प्रियंका पर FIR: गहलोत बोले- लोकतांत्रिक संस्थाएं खतरनाक दिशा में, मोदी-शाह चुप क्यों?
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने 7 अक्टूबर 2026 को जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ दर्ज एफआईआर की कड़ी आलोचना की और चेतावनी दी कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाएं 'खतरनाक दिशा' में बढ़ रही हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को उसी तरह कमज़ोर किया जा रहा है, जैसा — उनके विचार में — चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देशों में हुआ है।
मुख्य घटनाक्रम
दिल्ली में आकाशवाणी भवन के निकट हुए विरोध प्रदर्शन के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिससे राजनीतिक तनाव तेज़ हो गया। गहलोत के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन इसलिए आयोजित किया गया था क्योंकि कथित तौर पर लगभग 300 सांसदों को चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। सांसद विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और 'वोट चोरी' के आरोपों से जुड़े सवालों पर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण माँगने गए थे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल के साथ पुलिस का व्यवहार 'आपत्तिजनक' रहा। उन्होंने कहा कि नेताओं को हिरासत में लिया गया और बाद में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी गई।
गहलोत के आरोप और तुलना
गहलोत ने कहा कि सरकार और प्रशासन की ऐसी कार्रवाइयाँ उनके लिए 'अप्रत्याशित नहीं थीं' और टिप्पणी की कि 'वे कुछ भी कर सकते हैं।' उन्होंने भारत की वर्तमान स्थिति की तुलना चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देशों से करते हुए सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र इन बढ़ते तानाशाही कदमों के बीच टिक पाएगा।
गौरतलब है कि गहलोत स्वयं लगभग दो दशकों तक संसद परिसर में काम कर चुके हैं और उन्होंने इसे 'अत्यंत सुरक्षित स्थान' बताया। उनके अनुसार, यदि तीनों चुनाव आयुक्त इंडिया ब्लॉक के सांसदों से मिलते, तो मुद्दों का 'पारदर्शी ढंग से समाधान' संभव होता।
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि यह मामला केवल किसी एक राजनीतिक दल या कुछ नेताओं का नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के नागरिकों — विशेषकर युवाओं और आने वाली पीढ़ी — के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाएं धीरे-धीरे कमज़ोर हो रही हैं और यह स्थिति 'गंभीर चिंता का विषय' है।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल पहले से ही चुनाव आयोग की निष्पक्षता और एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ एफआईआर का यह सिलसिला एक व्यापक पैटर्न का हिस्सा है।
मोदी-शाह की चुप्पी पर सवाल
गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई सार्वजनिक बयान न आने पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, देश भर में जारी विरोध प्रदर्शनों के मद्देनज़र शीर्ष नेतृत्व की जवाबदेही स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की चुप्पी वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
आगे की स्थिति
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर कांग्रेस के भीतर आक्रोश गहरा है और पार्टी के नेताओं ने देश भर में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। आने वाले दिनों में यह मामला संसद और न्यायपालिका दोनों स्तरों पर और तीखा होने की संभावना है।