जेनोसाइड वॉच की पाकिस्तान पर चेतावनी: धार्मिक अल्पसंख्यक और महिलाएं नरसंहार के तीसरे चरण में
सारांश
मुख्य बातें
मानवाधिकार निगरानी संगठन जेनोसाइड वॉच ने 31 मई 2026 को पाकिस्तान के संदर्भ में एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि देश वर्तमान में नरसंहार के तीसरे चरण — 'भेदभाव' (डिस्क्रिमिनेशन) — में है। रिपोर्ट के अनुसार, धार्मिक अल्पसंख्यकों, महिलाओं और राजनीतिक विपक्ष के विरुद्ध व्यापक हिंसा और उत्पीड़न की घटनाएं देश को और गहरे संकट की ओर धकेल रही हैं।
रिपोर्ट में क्या कहा गया है
जेनोसाइड वॉच की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान को एक साथ नरसंहार के तीसरे चरण (भेदभाव) और पाँचवें चरण (संगठन) में वर्गीकृत किया गया है। रिपोर्ट में यह भी चेताया गया है कि धार्मिक, लैंगिक और राजनीतिक आधार पर बढ़ता विभाजन, प्रतिबंधात्मक कानून, सेंसरशिप और कमज़ोर सुरक्षा तंत्र देश को छठे चरण 'ध्रुवीकरण' (पोलराइजेशन) की दिशा में ले जा रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, कमज़ोर और संवेदनशील समुदायों के विरुद्ध हिंसा, उत्पीड़न और विस्थापन की घटनाएं नौवें चरण 'उत्पीड़न' (परसिक्यूशन) के संकेत भी दर्शाती हैं, जो नरसंहार की प्रक्रिया में एक अत्यंत गंभीर पड़ाव माना जाता है।
प्रभावित समुदाय
रिपोर्ट के मुताबिक, भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करने वाले प्रमुख समूहों में ईसाई, हिंदू, बौद्ध, शिया और अहमदिया समुदाय शामिल हैं। इनके अलावा राजनीतिक विपक्ष, महिलाएं और समलैंगिक समुदाय भी इस सूची में हैं।
रिपोर्ट में विशेष रूप से पाकिस्तान के ईसाई समुदाय की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है। देश की कुल आबादी में लगभग 1.8 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला यह समुदाय सामाजिक और संस्थागत भेदभाव का शिकार बताया गया है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
महिलाओं की स्थिति पर गंभीर चिंताएं
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में महिलाओं को एसिड हमले, जबरन विवाह, बाल विवाह, दुष्कर्म, मानव तस्करी, जबरन धर्म परिवर्तन और घरेलू हिंसा जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। रिपोर्ट में 2025 में लाहौर हाई कोर्ट द्वारा यौवन प्राप्ति के बाद विवाह को इस्लामी कानून के तहत वैध मानने के फैसले का विशेष उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, देश में लाखों लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु से पहले कर दी जाती है। इसके साथ ही, पाकिस्तान को विश्व आर्थिक मंच के ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में सबसे निचले पायदान पर रखा गया है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर खतरा
जेनोसाइड वॉच ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान में पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को सेंसरशिप, धमकियों, हिंसा, गिरफ्तारी और हत्या जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। तुर्की मूल की पत्रकार उज़ाय बुलुत ने अमेरिकी मीडिया संस्थान पीजे मीडिया में लिखते हुए कहा कि ये चरण उन परिस्थितियों को दर्शाते हैं जो किसी राष्ट्रीय, जातीय, नस्लीय या धार्मिक समूह के सुनियोजित विनाश का माहौल तैयार कर सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
जेनोसाइड वॉच ने यूरोपियन यूनियन (EU) से आग्रह किया है कि वह जीएसपी+ समीक्षा प्रक्रिया के माध्यम से पाकिस्तान पर धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आज़ादी और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े सुधारों को लागू करने के लिए दबाव बनाए। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त से भी पाकिस्तान को 'विशेष चिंता वाले देश' के रूप में चिन्हित करने पर विचार करने की अपील की गई है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति पर भी टिकी हैं। आने वाले महीनों में EU की जीएसपी+ समीक्षा और संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे पर होने वाली चर्चाएं यह तय करेंगी कि अंतरराष्ट्रीय दबाव कितना प्रभावी साबित होता है।