म्यूनिख में 'एक भारत, एक विश्व' कार्यक्रम: ग्वालियर के उद्भव संस्थान की अहम भूमिका, 12 सितंबर को होगा आयोजन
सारांश
मुख्य बातें
ग्वालियर का उद्भव सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान जर्मनी के म्यूनिख में 12 सितंबर को आयोजित होने वाले 'एक भारत, एक विश्व' कार्यक्रम का प्रमुख सहयोगी संस्था है। विश्व समभाव दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित यह कार्यक्रम सद्गुरु दर्शन न्यास और जर्मनी में भारत के महावाणिज्य दूतावास के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न होगा। इस आयोजन में ग्वालियर की सांस्कृतिक पहचान वैश्विक मंच पर प्रस्तुत होगी।
कार्यक्रम का स्वरूप और उद्देश्य
उद्भव संस्थान के अध्यक्ष डॉ. केशव पांडेय और सचिव दीपक तोमर ने पत्रकारों को बताया कि इस आयोजन में विभिन्न देशों के सांस्कृतिक दल अपनी-अपनी परंपराओं और व्यंजनों का प्रदर्शन करेंगे। सांस्कृतिक एवं पाक-परंपराओं के इस आदान-प्रदान के माध्यम से वैश्विक शांति का संदेश दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त 'एक भारत, एक विश्व' थीम पर एक क्विज़ प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी।
वाणी माधव की प्रस्तुति और स्थानीय कलाकारों को प्रशिक्षण
उद्भव की तकनीकी प्रमुख और सुप्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना वाणी माधव इस कार्यक्रम में अपनी नृत्य प्रस्तुति देंगी। साथ ही वे म्यूनिख के स्थानीय कलाकारों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की बारीकियाँ और तकनीकें भी सिखाएंगी, जो सांस्कृतिक कूटनीति का एक व्यावहारिक उदाहरण होगा।
ग्वालियर में अक्टूबर में होगा अंतर्राष्ट्रीय कल्चरल ओलंपियाड
म्यूनिख आयोजन के बाद उद्भव संस्थान का दूसरा बड़ा कार्यक्रम ग्वालियर में 24 से 27 अक्टूबर के बीच होगा। यह 21वाँ अंतर्राष्ट्रीय कल्चरल ओलंपियाड उद्भव उत्सव होगा, जिसमें शास्त्रीय नृत्य, अर्धशास्त्रीय नृत्य, लोक नृत्य (एकल एवं समूह), इंस्ट्रूमेंटल बैंड और पेंटिंग प्रतियोगिताएँ विभिन्न वर्गों में आयोजित की जाएंगी। संस्था के मुख्य संरक्षक केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के मार्गदर्शन में यह आयोजन संपन्न होगा।
मॉडल यूनाइटेड नेशंस समिट का भी आयोजन
उद्भव उत्सव के साथ-साथ एक वृहद मॉडल यूनाइटेड नेशंस (MUN) समिट भी आयोजित की जाएगी, जिसमें देश-विदेश के स्कूली छात्र वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। यह मंच युवा पीढ़ी को अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक समस्याओं से परिचित कराने का अवसर प्रदान करेगा।
सितंबर-अक्टूबर में इन दो प्रमुख आयोजनों के साथ ग्वालियर का उद्भव संस्थान भारतीय संस्कृति को वैश्विक फलक पर स्थापित करने की दिशा में एक नई पहल करने जा रहा है।