नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने फर्जी लोन सेंक्शन लेटर से ठगी करने वाले गिरोह के दो आरोपी गाजियाबाद से दबोचे
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने 3 सितंबर 2026 को पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर फर्जी सेंक्शन लेटर भेजकर ठगी करने वाले गिरोह के दो वांछित सदस्यों को गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी से गिरफ्तार किया। तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल विश्लेषण, सर्विलांस और गोपनीय सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में तुषार (21 वर्ष), पुत्र कपिल देव, और सुमित कुमार (21 वर्ष), पुत्र रामेश्वर प्रसाद, को हिरासत में लिया गया — दोनों खोड़ा कॉलोनी के निवासी हैं।
कैसे काम करता था यह गिरोह
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह लोन की जरूरत रखने वाले लोगों को निशाना बनाता था। गिरोह के सदस्य आरयूलोन्स कंपनी से कथित तौर पर प्राप्त डेटा का दुरुपयोग करते हुए पीड़ितों से संपर्क करते थे और कम समय में पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देते थे। विश्वास जीतने के लिए पीड़ितों को फर्जी लोन सेंक्शन लेटर भेजे जाते थे।
लोन स्वीकृत होने का भरोसा दिलाने के बाद आरोपी प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क के नाम पर रकम जमा करवाते थे। रकम मिलते ही पीड़ितों से संपर्क काट लिया जाता था। इस मामले में थाना साइबर क्राइम नोएडा में मुकदमा दर्ज है।
मुख्य घटनाक्रम: पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी
गौरतलब है कि इस गिरोह के दो अन्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर 15 दिसंबर 2025 को जेल भेजा जा चुका है। जांच के दौरान सामने आए इन दो नए वांछित आरोपियों की अब गिरफ्तारी हुई है, जो दर्शाता है कि यह नेटवर्क कई स्तरों पर संचालित था।
म्यूल खाते और कमीशन का खेल
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को धोखाधड़ी की रकम प्राप्त करने के लिए किराए पर देते थे। इसके बदले उन्हें कुल रकम का करीब 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था। अपने खातों के अलावा वे विभिन्न म्यूल बैंक खाते भी साइबर अपराधियों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराते थे।
जांच में सामने आया कि आरोपी तुषार के बैंक खाते में ₹1 लाख 20 हजार और सुमित कुमार के खाते में ₹2 लाख 20 हजार की धनराशि प्राप्त हुई — यानी दोनों खातों में कुल ₹3 लाख 40 हजार की रकम आई।
अन्य राज्यों में भी शिकायतें
पुलिस के मुताबिक, इन बैंक खातों के खिलाफ नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर विभिन्न राज्यों से शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें महाराष्ट्र और तमिलनाडु से कुल दो शिकायतें शामिल हैं। यह इस बात का संकेत है कि इस गिरोह का दायरा केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था।
पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों, इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, वेबसाइटों और डिजिटल माध्यमों की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर और आरोपी तथा लेन-देन के विवरण सामने आएंगे।
साइबर पुलिस की जनता से अपील
साइबर क्राइम पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि फोन, व्हाट्सऐप या किसी अन्य माध्यम से मिले लोन ऑफर पर बिना जाँचे भरोसा न करें। लोन सेंक्शन लेटर मिलने पर भी उसकी सत्यता की पुष्टि किए बिना किसी प्रकार की प्रोसेसिंग फीस या शुल्क न चुकाएं।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी व्यवस्था भारत में अस्तित्व में नहीं है। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स, इनकम टैक्स या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी या डिजिटल अरेस्ट की धमकी दे, तो घबराने की बजाय तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क करें।