3 सितंबर 2026
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नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने फर्जी लोन सेंक्शन लेटर से ठगी करने वाले गिरोह के दो आरोपी गाजियाबाद से दबोचे

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नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने फर्जी लोन सेंक्शन लेटर से ठगी करने वाले गिरोह के दो आरोपी गाजियाबाद से दबोचे

सारांश

पर्सनल लोन के नाम पर फर्जी सेंक्शन लेटर भेजकर ठगी करने वाले गिरोह के दो और सदस्य नोएडा साइबर पुलिस के हत्थे चढ़े। गाजियाबाद से गिरफ्तार तुषार और सुमित कुमार अपने बैंक खाते किराए पर देकर 10% कमीशन लेते थे — दोनों खातों में कुल ₹3.40 लाख की ठगी की रकम मिली।

मुख्य बातें

नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने 3 सितंबर 2026 को गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी से दो वांछित साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया।
आरोपी तुषार (21) और सुमित कुमार (21) पर फर्जी लोन सेंक्शन लेटर भेजकर प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ठगी का आरोप है।
दोनों के बैंक खातों में कुल ₹3 लाख 40 हजार की धोखाधड़ी की रकम पाई गई — तुषार के खाते में ₹1.20 लाख और सुमित के खाते में ₹2.20 लाख ।
आरोपी ठगी की रकम में से 10% कमीशन काटकर बाकी साइबर अपराधियों को लौटाते थे और म्यूल खाते भी उपलब्ध कराते थे।
इस गिरोह के दो अन्य आरोपियों को पहले ही 15 दिसंबर 2025 को जेल भेजा जा चुका है।
महाराष्ट्र और तमिलनाडु से भी इन खातों के खिलाफ नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायतें दर्ज हैं।

नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने 3 सितंबर 2026 को पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर फर्जी सेंक्शन लेटर भेजकर ठगी करने वाले गिरोह के दो वांछित सदस्यों को गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी से गिरफ्तार किया। तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल विश्लेषण, सर्विलांस और गोपनीय सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में तुषार (21 वर्ष), पुत्र कपिल देव, और सुमित कुमार (21 वर्ष), पुत्र रामेश्वर प्रसाद, को हिरासत में लिया गया — दोनों खोड़ा कॉलोनी के निवासी हैं।

कैसे काम करता था यह गिरोह

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह लोन की जरूरत रखने वाले लोगों को निशाना बनाता था। गिरोह के सदस्य आरयूलोन्स कंपनी से कथित तौर पर प्राप्त डेटा का दुरुपयोग करते हुए पीड़ितों से संपर्क करते थे और कम समय में पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देते थे। विश्वास जीतने के लिए पीड़ितों को फर्जी लोन सेंक्शन लेटर भेजे जाते थे।

लोन स्वीकृत होने का भरोसा दिलाने के बाद आरोपी प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क के नाम पर रकम जमा करवाते थे। रकम मिलते ही पीड़ितों से संपर्क काट लिया जाता था। इस मामले में थाना साइबर क्राइम नोएडा में मुकदमा दर्ज है।

मुख्य घटनाक्रम: पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी

गौरतलब है कि इस गिरोह के दो अन्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर 15 दिसंबर 2025 को जेल भेजा जा चुका है। जांच के दौरान सामने आए इन दो नए वांछित आरोपियों की अब गिरफ्तारी हुई है, जो दर्शाता है कि यह नेटवर्क कई स्तरों पर संचालित था।

म्यूल खाते और कमीशन का खेल

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को धोखाधड़ी की रकम प्राप्त करने के लिए किराए पर देते थे। इसके बदले उन्हें कुल रकम का करीब 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था। अपने खातों के अलावा वे विभिन्न म्यूल बैंक खाते भी साइबर अपराधियों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराते थे।

जांच में सामने आया कि आरोपी तुषार के बैंक खाते में ₹1 लाख 20 हजार और सुमित कुमार के खाते में ₹2 लाख 20 हजार की धनराशि प्राप्त हुई — यानी दोनों खातों में कुल ₹3 लाख 40 हजार की रकम आई।

अन्य राज्यों में भी शिकायतें

पुलिस के मुताबिक, इन बैंक खातों के खिलाफ नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर विभिन्न राज्यों से शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें महाराष्ट्र और तमिलनाडु से कुल दो शिकायतें शामिल हैं। यह इस बात का संकेत है कि इस गिरोह का दायरा केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था।

पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों, इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, वेबसाइटों और डिजिटल माध्यमों की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर और आरोपी तथा लेन-देन के विवरण सामने आएंगे।

साइबर पुलिस की जनता से अपील

साइबर क्राइम पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि फोन, व्हाट्सऐप या किसी अन्य माध्यम से मिले लोन ऑफर पर बिना जाँचे भरोसा न करें। लोन सेंक्शन लेटर मिलने पर भी उसकी सत्यता की पुष्टि किए बिना किसी प्रकार की प्रोसेसिंग फीस या शुल्क न चुकाएं।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी व्यवस्था भारत में अस्तित्व में नहीं है। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स, इनकम टैक्स या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी या डिजिटल अरेस्ट की धमकी दे, तो घबराने की बजाय तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि ठगी की रकम कई परतों से गुजरती है। आरयूलोन्स के डेटा के कथित दुरुपयोग का आरोप फिनटेक कंपनियों की डेटा सुरक्षा जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाता है — यह पहलू अब तक जांच के दायरे में स्पष्ट नहीं है। जब तक म्यूल खाता उपलब्ध कराने को गंभीर अपराध के रूप में सख्त सजा नहीं मिलती, यह मॉडल फलता-फूलता रहेगा।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा में फर्जी लोन सेंक्शन लेटर से ठगी का मामला क्या है?
यह एक साइबर ठगी का मामला है जिसमें गिरोह के सदस्य लोन की जरूरत वाले लोगों को फर्जी सेंक्शन लेटर भेजकर प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम ऐंठते थे। नोएडा साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज है और अब तक इस गिरोह के कुल चार सदस्य गिरफ्तार हो चुके हैं।
गिरफ्तार आरोपी तुषार और सुमित कुमार ने क्या किया?
दोनों आरोपी अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किराए पर देते थे और कुल रकम का 10% कमीशन लेते थे। इसके अलावा वे म्यूल बैंक खाते भी उपलब्ध कराते थे। दोनों के खातों में मिलाकर ₹3 लाख 40 हजार की धनराशि पाई गई।
म्यूल बैंक खाता क्या होता है और यह कैसे खतरनाक है?
म्यूल खाता वह बैंक खाता होता है जिसे उसका असली मालिक किसी अपराधी को धोखाधड़ी की रकम ट्रांसफर करने के लिए उपलब्ध कराता है। इससे असली साइबर अपराधी की पहचान छुपी रहती है और खाताधारक खुद भी कानूनी कार्रवाई का शिकार बन जाता है।
साइबर लोन फ्रॉड से खुद को कैसे बचाएं?
किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा फोन, व्हाट्सऐप या अन्य माध्यम से दिए गए लोन ऑफर पर तुरंत भरोसा न करें। लोन सेंक्शन लेटर मिलने पर भी उसकी सत्यता की जांच किए बिना प्रोसेसिंग फीस या कोई शुल्क न जमा करें। संदेह होने पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क करें।
'डिजिटल अरेस्ट' क्या है और क्या यह कानूनी है?
'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी व्यवस्था भारत में नहीं है। यदि कोई खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन पर गिरफ्तारी की धमकी दे, तो घबराएं नहीं और तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क करें।
राष्ट्र प्रेस
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