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नोएडा में फर्जी एविएशन जॉब रैकेट का भंडाफोड़, वांछित आरोपी डॉ. अजय गाजियाबाद से गिरफ्तार

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नोएडा में फर्जी एविएशन जॉब रैकेट का भंडाफोड़, वांछित आरोपी डॉ. अजय गाजियाबाद से गिरफ्तार

सारांश

नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने फर्जी एविएशन जॉब और एडमिशन रैकेट के वांछित आरोपी डॉ. अजय को गाजियाबाद से दबोचा। गैंग लम्बोदर इंस्टीट्यूट की आड़ में फर्जी कॉल सेंटर चलाता था और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की नकली वेबसाइट बनाकर युवाओं को ठगता था। इससे पहले 5 आरोपी 8 जुलाई को गिरफ्तार हो चुके हैं।

मुख्य बातें

नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने 22 अगस्त को वांछित आरोपी डॉ.
अजय पुत्र धर्मपाल सिंह को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया।
गैंग के 5 अन्य आरोपी पहले ही 8 जुलाई को गिरफ्तार होकर जेल भेजे जा चुके हैं।
गैंग सेक्टर-22, नोएडा स्थित लम्बोदर इंस्टीट्यूट के नाम से फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था।
पीड़ितों को फर्जी ऑफर लेटर, एडमिशन कन्फर्मेशन और प्रमाण-पत्र भेजकर रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, मेडिकल, यूनिफॉर्म व अन्य मदों में रकम वसूली जाती थी।
गैंग ने कथित तौर पर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाई और म्यूल बैंक खातों में ठगी की रकम जमा कराई।
मुकदमा थाना साइबर क्राइम, गौतमबुद्धनगर में दर्ज; पूछताछ में अन्य सदस्यों की तलाश जारी।

नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने 22 अगस्त को फर्जी एविएशन जॉब और एडमिशन रैकेट चलाने वाले गैंग के एक वांछित आरोपी को दबोचा। डॉक्टर अजय पुत्र धर्मपाल सिंह को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और अभिसूचना के आधार पर गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया। यह गैंग नोएडा के सेक्टर-22 स्थित लम्बोदर इंस्टीट्यूट के नाम से फर्जी कॉल सेंटर संचालित करते हुए नौकरी और एडमिशन के नाम पर बेरोजगार युवाओं को ठगता था।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, इस मामले में गैंग के पाँच आरोपियों को पहले ही 8 जुलाई को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था। डॉ. अजय उस समय से फरार चल रहे थे और उन्हें वांछित घोषित किया गया था। शुक्रवार को साइबर क्राइम थाने की टीम ने उन्हें गाजियाबाद से पकड़ने में सफलता पाई। मुकदमा थाना साइबर क्राइम, गौतमबुद्धनगर में दर्ज है।

ठगी का तरीका

गैंग के सदस्य खुद को प्रतिष्ठित एविएशन कंपनियों और एयरलाइंस का प्रतिनिधि बताकर अभ्यर्थियों को अपने जाल में फँसाते थे। पीड़ितों से ऑनलाइन इंटरव्यू, रजिस्ट्रेशन, एडमिशन, ट्रेनिंग, मेडिकल, यूनिफॉर्म, सिक्योरिटी डिपॉजिट और प्रोसेसिंग फीस जैसे अलग-अलग मदों के नाम पर चरणबद्ध तरीके से रकम वसूली जाती थी।

विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए आरोपी पीड़ितों को फर्जी ऑफर लेटर, एडमिशन कन्फर्मेशन, प्रमाण-पत्र और अन्य दस्तावेज भेजते थे। इन दस्तावेजों को देखकर पीड़ित आश्वस्त हो जाते थे और आरोपियों के बताए बैंक खातों में रकम जमा कर देते थे।

फर्जी वेबसाइट और म्यूल खाते

जाँच में सामने आया कि गैंग ने कथित तौर पर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम से एक फर्जी वेबसाइट भी तैयार की थी। इसके अलावा विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम और लोगो का दुरुपयोग कर लोगों को भ्रमित किया जाता था। ठगी से प्राप्त रकम को म्यूल बैंक खातों में मँगाया जाता था, जिसके बाद गैंग के सदस्य उसे आपस में बाँट लेते थे।

पुलिस की अपील

नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि नौकरी या एडमिशन के नाम पर कोई भी भुगतान करने से पहले संबंधित कंपनी या संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट और प्रामाणिकता की जाँच अवश्य करें। रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट या ट्रेनिंग फीस के नाम पर तत्काल भुगतान का दबाव बनाने वालों से सतर्क रहें।

आगे की जाँच

पुलिस गिरफ्तार आरोपी डॉ. अजय से पूछताछ कर गैंग से जुड़े अन्य सदस्यों और ठगी के पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटी है। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस बड़े संकट की झलक है जिसमें बेरोजगार युवा एविएशन जैसे ग्लैमरस क्षेत्र में नौकरी की लालसा में ठगों के आसान शिकार बन रहे हैं। गौरतलब है कि गैंग ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट — जो खुद अभी विकास के चरण में है — के नाम का दुरुपयोग कर फर्जी वेबसाइट बनाई, जो दर्शाता है कि ये ठग सरकारी परियोजनाओं की चर्चा को भी हथियार बनाते हैं। म्यूल बैंक खातों के ज़रिये रकम बाँटने का तरीका बताता है कि यह सुनियोजित साइबर अपराध नेटवर्क है, न कि अकेले व्यक्ति की करतूत। जब तक डिजिटल साक्षरता और नौकरी सत्यापन के लिए कोई केंद्रीय तंत्र नहीं बनता, ऐसे रैकेट नए नाम और नई वेबसाइटों के साथ फिर उभरते रहेंगे।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा फर्जी एविएशन जॉब रैकेट क्या है?
यह एक साइबर ठगी गैंग है जो नोएडा के सेक्टर-22 स्थित लम्बोदर इंस्टीट्यूट की आड़ में फर्जी कॉल सेंटर चलाता था और एविएशन कंपनियों में नौकरी व एडमिशन का झाँसा देकर युवाओं से रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, मेडिकल और सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर रकम वसूलता था। गैंग फर्जी ऑफर लेटर और प्रमाण-पत्र भेजकर पीड़ितों को विश्वास दिलाता था।
इस मामले में अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
अब तक कुल 6 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। गैंग के 5 सदस्यों को 8 जुलाई को पकड़कर जेल भेजा गया था, जबकि वांछित आरोपी डॉ. अजय पुत्र धर्मपाल सिंह को 22 अगस्त को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया।
गैंग ने ठगी के लिए कौन-से तरीके अपनाए?
गैंग ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाई और प्रतिष्ठित एविएशन संस्थानों के नाम व लोगो का कथित तौर पर दुरुपयोग किया। पीड़ितों को फर्जी ऑफर लेटर, एडमिशन कन्फर्मेशन और प्रमाण-पत्र भेजे जाते थे, और ठगी की रकम म्यूल बैंक खातों में मँगाकर आपस में बाँटी जाती थी।
साइबर ठगी से बचने के लिए पुलिस ने क्या सलाह दी है?
नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने अपील की है कि नौकरी या एडमिशन के लिए कोई भी भुगतान करने से पहले संबंधित कंपनी या संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट और प्रामाणिकता की जाँच करें। रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग फीस या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर तत्काल भुगतान का दबाव बनाने वालों से सतर्क रहें।
इस मामले में आगे क्या होगा?
पुलिस गिरफ्तार आरोपी डॉ. अजय से पूछताछ कर गैंग के अन्य सदस्यों और ठगी के पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटी है। अधिकारियों के अनुसार, जाँच के आधार पर और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
राष्ट्र प्रेस
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