गुजरात में नकली IFFCO खाद बेचने पर चार गिरफ्तार, PBM अधिनियम के तहत कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 6 जुलाई 2026 को अमरेली जिले में नकली और घटिया डीएपी उर्वरक बेचने के आरोप में चार व्यक्तियों के खिलाफ कालाबाजारी निवारण एवं आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने संबंधी अधिनियम, 1980 (PBM अधिनियम) के तहत मामला दर्ज किया है। सभी चारों आरोपियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
जांच का केंद्र अमरेली जिले के बाबरा तालुका के खंभला गांव में स्थित श्री फर्टिलाइजर दुकान रही। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने नकली IFFCO ब्रांड के बैगों में भरे घटिया डीएपी उर्वरक के 299 बोरे बरामद किए। तीन नमूने परीक्षण के लिए जूनागढ़ प्रयोगशाला भेजे गए, और तीनों ही गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांचकर्ताओं के अनुसार, खाद के लिए कोई खरीद चालान, स्रोत प्रमाण पत्र या स्टॉक रजिस्टर प्रविष्टि भी नहीं मिली।
चारों आरोपी कौन हैं
सरकार के अनुसार, राजकोट जिले के जसदान निवासी 33 वर्षीय महेश जापड़िया बरामद नकली स्टॉक से कथित तौर पर जुड़ा था। बोटाद जिले के रामपारा गांव निवासी 26 वर्षीय जिग्नेश डाभी पर किसानों को असली सब्सिडी वाली डीएपी बताकर नकली IFFCO ब्रांड के बैगों में घटिया खाद बेचने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया कि जापड़िया ने डाभी से ही यह खाद खरीदी थी।
सूरत निवासी 30 वर्षीय विजय मालवीय पर अन्य आरोपियों के साथ मिलकर नकली IFFCO ब्रांड के बैगों में घटिया डीएपी बेचने का आरोप है। चौथे आरोपी, अमरेली जिले के 39 वर्षीय भरत धनानी पर IFFCO और प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना (भारत डीएपी) की ब्रांडिंग वाले नकली प्लास्टिक बैग छापने का आरोप है, जिनमें घटिया खाद भरकर असली बताकर बेची जाती थी।
सरकार की प्रतिक्रिया
कृषि मंत्री जीतू वाघानी ने सोमवार को इस कार्रवाई की घोषणा करते हुए कहा कि नकली खाद और बीज बेचने में बार-बार शामिल अपराधियों के लाइसेंस रद्द करने के साथ-साथ उन्हें कारावास की सजा भी भुगतनी पड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली सरकार किसानों को धोखा देने वालों को बर्दाश्त नहीं करेगी। वाघानी के अनुसार, अवैध, प्रतिबंधित या घटिया कृषि सामग्री बेचने वालों पर PBM अधिनियम के कड़े प्रावधान लागू किए जाएंगे।
आम जनता और किसानों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ सीजन की बुवाई चल रही है और किसान बड़े पैमाने पर डीएपी उर्वरक की खरीद करते हैं। नकली खाद के उपयोग से फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। गौरतलब है कि सब्सिडी वाली खाद को नकली ब्रांडिंग में बेचना न केवल किसानों के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि सरकारी सब्सिडी तंत्र का भी दुरुपयोग है।
क्या होगा आगे
तीनों प्रयोगशाला नमूनों के विफल होने के बाद अब अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि इस तरह के मामलों में भविष्य में भी PBM अधिनियम के कठोर प्रावधानों का उपयोग जारी रहेगा। कृषि विभाग के अनुसार, प्रदेश भर में उर्वरक विक्रेताओं की जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है।