30 सितंबर 2026
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गुजरात सरकार का बड़ा फैसला: दफ्तरों में प्लास्टिक फाइलें होंगी बंद, कागज-जूट-खादी लेंगे जगह

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गुजरात सरकार का बड़ा फैसला: दफ्तरों में प्लास्टिक फाइलें होंगी बंद, कागज-जूट-खादी लेंगे जगह

सारांश

गुजरात सरकार ने सरकारी दफ्तरों में प्लास्टिक फाइलें और फोल्डर चरणबद्ध तरीके से खत्म करने का फैसला किया है। सामान्य प्रशासन विभाग के सर्कुलर के तहत कागज, जूट और खादी के विकल्पों को अपनाया जाएगा — एक कदम जो सरकारी कार्यप्रणाली में पर्यावरण अनुकूल बदलाव की ओर इशारा करता है।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार ने 30 सितंबर 2026 को सरकारी कार्यालयों में प्लास्टिक फाइलों और फोल्डरों को चरणबद्ध ढंग से समाप्त करने का निर्णय लिया।
सामान्य प्रशासन विभाग ने आधिकारिक सर्कुलर जारी किया; गुजरात सचिवालय , सार्वजनिक उपक्रम, विश्वविद्यालय और स्थानीय निकाय सभी इसके दायरे में।
प्लास्टिक की जगह कागज, जूट और खादी से बनी पर्यावरण अनुकूल स्टेशनरी को प्राथमिकता दी जाएगी।
वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुनभाई मोढवाडिया ने कहा — शुरुआत प्लास्टिक फाइलों से होगी, धीरे-धीरे सभी प्लास्टिक सामग्री कम की जाएगी।
पहले से खरीदा गया मौजूदा स्टॉक समाप्त होने तक उपयोग की अनुमति; इसके बाद नई खरीदारी में केवल पर्यावरण अनुकूल विकल्प अनिवार्य।
यह निर्णय केंद्र के पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के अनुरूप है।

गुजरात सरकार ने 30 सितंबर 2026 को सरकारी कार्यालयों में प्लास्टिक फाइलों और फोल्डरों के उपयोग को चरणबद्ध ढंग से समाप्त करने का निर्णय लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस आशय का एक आधिकारिक सर्कुलर जारी किया है, जिसका उद्देश्य सरकारी कामकाज से उत्पन्न होने वाले प्लास्टिक कचरे को कम करना और पर्यावरण अनुकूल कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देना है।

सर्कुलर का दायरा और प्रभावित संस्थाएँ

जारी सर्कुलर के अनुसार यह निर्देश गुजरात सचिवालय के समस्त विभागों, विभागाध्यक्षों के कार्यालयों, राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों, सरकारी समितियों, स्वायत्त निकायों, स्थानीय निकायों, सरकारी विश्वविद्यालयों तथा अनुदान प्राप्त संस्थानों पर लागू होगा। इन सभी कार्यालयों में रोज़मर्रा के प्रशासनिक कार्यों के दौरान प्लास्टिक स्टेशनरी का उपयोग धीरे-धीरे घटाया जाएगा।

प्लास्टिक फाइलों और फोल्डरों के स्थान पर अब कागज, जूट और खादी से निर्मित पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह कदम केंद्र सरकार के पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के तहत जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप उठाया गया है।

सरकार की प्रतिक्रिया

गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुनभाई मोढवाडिया ने कहा कि सरकार ने सभी प्रकार की प्लास्टिक सामग्री का उपयोग क्रमिक रूप से कम करने का संकल्प लिया है, जिसमें प्लास्टिक फाइलें भी शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक चरण में प्लास्टिक फाइलों को हटाकर उनकी जगह पर्यावरण अनुकूल कागज की फाइलें उपयोग में लाई जाएंगी।

गौरतलब है कि यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारें एकल-उपयोग प्लास्टिक पर अंकुश लगाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। भारत सरकार ने 1 जुलाई 2022 से कई एकल-उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध लागू किया था; गुजरात का यह कदम उसी नीतिगत दिशा का विस्तार माना जा सकता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

पर्यावरण विशेषज्ञ समीर रामी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकारी कार्यालयों में प्लास्टिक फाइलों के उपयोग को समाप्त करना एक सराहनीय पहल है। उनके अनुसार, रोज़मर्रा की जीवनशैली में भी प्लास्टिक का उपयोग यथासंभव कम किया जाना चाहिए। रामी ने यह भी कहा कि जब सरकार स्वयं इस दिशा में पहल करती है, तो आम नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और अधिक प्रभावी हो जाता है।

मौजूदा स्टॉक और संक्रमण व्यवस्था

सरकार ने व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि पहले से खरीदे गए प्लास्टिक फोल्डर और अन्य सामग्री को तत्काल नष्ट नहीं किया जाएगा। मौजूदा स्टॉक समाप्त होने तक उनके उपयोग की अनुमति दी गई है, ताकि सार्वजनिक धन की बर्बादी न हो। इसके बाद की सभी नई खरीदारी में केवल पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को ही मंज़ूरी दी जाएगी।

आम जनता और अन्य संगठनों पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी संस्थानों में इस प्रकार के संरचनात्मक बदलाव से निजी संगठनों और आम नागरिकों को भी प्लास्टिक उपयोग घटाने की प्रेरणा मिल सकती है। यह पहल गुजरात में टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कार्यप्रणाली की नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। आने वाले महीनों में इस नीति के क्रियान्वयन की समीक्षा से स्पष्ट होगा कि राज्य इस संकल्प को ज़मीनी स्तर पर कितनी कारगर तरीके से लागू कर पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती क्रियान्वयन की है — राज्य के हज़ारों कार्यालयों में अनुपालन सुनिश्चित करना और आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना आसान नहीं होगा। यह भी ध्यान देने योग्य है कि केंद्र का एकल-उपयोग प्लास्टिक प्रतिबंध 2022 में लागू होने के बाद भी ज़मीनी स्तर पर पालन असमान रहा है। गुजरात की पहल तभी अनुकरणीय बनेगी जब इसमें सत्यापन तंत्र, समयसीमा और उल्लंघन पर कार्रवाई का स्पष्ट ढाँचा हो — जो अभी सर्कुलर में दिखाई नहीं देता।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात सरकार ने प्लास्टिक फाइलें बंद करने का फैसला क्यों किया?
गुजरात सरकार ने सरकारी कामकाज से उत्पन्न होने वाले प्लास्टिक कचरे को कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है। यह कदम केंद्र के पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के अनुरूप है।
किन सरकारी कार्यालयों पर यह नियम लागू होगा?
यह निर्देश गुजरात सचिवालय के सभी विभागों, विभागाध्यक्षों के कार्यालयों, राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, सरकारी समितियों, स्वायत्त निकायों, स्थानीय निकायों, सरकारी विश्वविद्यालयों और अनुदान प्राप्त संस्थानों पर लागू होगा। यानी राज्य की लगभग सभी प्रमुख सरकारी संस्थाएँ इसके दायरे में आती हैं।
प्लास्टिक फाइलों की जगह क्या उपयोग किया जाएगा?
प्लास्टिक फाइलों और फोल्डरों के स्थान पर कागज, जूट और खादी से बने पर्यावरण अनुकूल विकल्पों का उपयोग किया जाएगा। नई खरीदारी में इन्हीं विकल्पों को प्राथमिकता देना अनिवार्य होगा।
पहले से खरीदी गई प्लास्टिक फाइलों का क्या होगा?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहले से खरीदे गए प्लास्टिक फोल्डर और अन्य सामग्री का मौजूदा स्टॉक समाप्त होने तक उपयोग जारी रखा जा सकता है। स्टॉक खत्म होने के बाद ही नई पर्यावरण अनुकूल सामग्री की खरीदारी अनिवार्य होगी।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस फैसले पर क्या कहा?
पर्यावरण विशेषज्ञ समीर रामी ने इस पहल का स्वागत किया और कहा कि सरकारी कार्यालयों से प्लास्टिक फाइलें हटाना एक सकारात्मक कदम है। उनके अनुसार जब सरकार स्वयं इस दिशा में आगे बढ़ती है, तो आम नागरिकों को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करना अधिक प्रभावी हो जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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