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गुजरात: डिजिटल प्रमाणपत्रों पर अब लगेगी आधिकारिक मुहर, GAD के 21 अक्टूबर के परिपत्र से मिलेगी राहत

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गुजरात: डिजिटल प्रमाणपत्रों पर अब लगेगी आधिकारिक मुहर, GAD के 21 अक्टूबर के परिपत्र से मिलेगी राहत

सारांश

गुजरात में ऑनलाइन जारी दस्तावेजों पर अब मुहर के लिए दफ्तर जाने की ज़रूरत नहीं रहेगी — GAD के ताज़ा परिपत्र ने डिजिटल प्रमाणपत्रों में जारीकर्ता की आधिकारिक मुहर सीधे अंकित करने का रास्ता खोला है। यह 'डिजिटल गुजरात 2.0' की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है।

मुख्य बातें

GAD ने 21 अक्टूबर 2026 को परिपत्र जारी कर डिजिटल पोर्टलों से प्राप्त प्रमाणपत्रों पर आधिकारिक गोल मुहर और कार्यालय-विवरण अंकित करने की व्यवस्था का निर्देश दिया।
नई प्रणाली लागू होने के बाद नागरिकों को मुहर लगवाने के लिए अलग से सरकारी दफ्तर नहीं जाना पड़ेगा।
यह पहल मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार के 'डिजिटल गुजरात 2.0' कार्यक्रम का हिस्सा है।
कार्यान्वयन के लिए संबंधित विभाग विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के साथ समन्वय कर डिजिटल पोर्टलों में तकनीकी संशोधन करेंगे।
राज्य सरकार GPR और BPR के ज़रिये प्रशासनिक प्रक्रियाओं को व्यापक रूप से सुव्यवस्थित कर रही है।

गुजरात सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने 21 अक्टूबर 2026 को एक परिपत्र जारी कर आदेश दिया है कि राज्य के डिजिटल पोर्टलों से प्राप्त ई-प्रमाणपत्रों और सत्यापन पत्रों पर जारीकर्ता प्राधिकारी की आधिकारिक गोल मुहर तथा संबंधित कार्यालय का विवरण डिजिटल रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद नागरिकों को केवल मुहर लगवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के अलग से चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

मौजूदा समस्या और नई व्यवस्था

वर्तमान में गुजरात के डिजिटल पोर्टलों के ज़रिये ऑनलाइन जारी होने वाले प्रमाणपत्रों पर संबंधित जारीकर्ता अधिकारी की मुहर अंकित नहीं होती। इसके चलते आवेदकों को दस्तावेज़ की प्रामाणिकता सिद्ध करने के लिए संबंधित सरकारी कार्यालय में पुनः जाना पड़ता है, जिससे समय और श्रम दोनों बर्बाद होते हैं।

नई व्यवस्था के अंतर्गत लागू कानूनों, नियमों और निर्देशों के अनुरूप सक्षम जारीकर्ता प्राधिकारी की मुहर और कार्यालय-विवरण सीधे डिजिटल दस्तावेज़ पर दिखाया जाएगा। इससे दस्तावेज़ की पहचान और प्रामाणिकता अधिक स्पष्ट होगी।

डिजिटल गुजरात 2.0 से जुड़ाव

यह पहल मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार के 'डिजिटल गुजरात 2.0' कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका व्यापक लक्ष्य 'डिजिटल-बाय-डिफॉल्ट' दृष्टिकोण के तहत संपूर्ण सेवा वितरण प्रक्रिया को डिजिटाइज़ करना है। इसके तहत भौतिक कागज़ी कार्रवाई और अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम करना अपेक्षित है।

गौरतलब है कि राज्य सरकार नागरिकों द्वारा बार-बार उपयोग की जाने वाली सेवाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए सरकारी प्रक्रिया पुनर्गठन (GPR) और व्यावसायिक प्रक्रिया पुनर्गठन (BPR) की प्रक्रिया भी चला रही है।

कार्यान्वयन की राह

परिपत्र के अनुसार, संबंधित सरकारी विभाग इस निर्णय को लागू करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के साथ समन्वय करेंगे। आवश्यक विभागीय प्रक्रियाएँ पूरी होने के बाद डिजिटल पोर्टलों में तकनीकी संशोधन किए जाएंगे, जिनमें जारीकर्ता की मुहर और विवरण को शामिल करने की क्षमता जोड़ी जाएगी। फिलहाल कार्यान्वयन की कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की गई है।

आम नागरिकों पर असर

यह बदलाव उन सभी नागरिकों के लिए महत्त्वपूर्ण है जो जाति, निवास, आय, जन्म जैसे प्रमाणपत्र नियमित रूप से ऑनलाइन प्राप्त करते हैं और उन्हें नौकरियों, शैक्षणिक संस्थाओं या सरकारी योजनाओं में जमा करते हैं। मुहर लगवाने की अलग प्रक्रिया समाप्त होने से आवेदन से प्रमाणपत्र उपयोग तक की पूरी यात्रा ऑनलाइन हो जाएगी।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर कागज़ रहित शासन को बढ़ावा देने की कोशिशें तेज़ हुई हैं। तकनीकी बदलाव पूर्ण होने के बाद यह पहल कितनी प्रभावी साबित होती है, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो यह संकेत देती है कि यह अभी घोषणा है, क्रियान्वयन नहीं। असली परीक्षा विभागीय समन्वय और पोर्टल-अपग्रेड की गति में है — भारत में ऐसे परिपत्र अक्सर तकनीकी तैयारी के अभाव में लंबे समय तक कागज़ पर ही रहते हैं। यदि यह समयबद्ध तरीके से लागू होता है, तो यह 'डिजिटल-बाय-डिफॉल्ट' शासन का एक ठोस उदाहरण बन सकता है जिसे अन्य राज्य भी अपना सकते हैं।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में डिजिटल प्रमाणपत्रों पर आधिकारिक मुहर की नई व्यवस्था क्या है?
गुजरात के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने 21 अक्टूबर 2026 के परिपत्र में निर्देश दिया है कि डिजिटल पोर्टलों से जारी होने वाले प्रमाणपत्रों और सत्यापन पत्रों पर जारीकर्ता प्राधिकारी की आधिकारिक गोल मुहर और कार्यालय-विवरण डिजिटल रूप से प्रदर्शित किया जाए। इससे नागरिकों को मुहर के लिए अलग से सरकारी दफ्तर नहीं जाना पड़ेगा।
अभी तक डिजिटल प्रमाणपत्रों पर मुहर क्यों नहीं होती थी?
वर्तमान में राज्य के डिजिटल पोर्टलों के माध्यम से जारी ई-प्रमाणपत्रों पर जारीकर्ता अधिकारी की मुहर अंकित नहीं होती। इस कमी के कारण आवेदकों को प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता के लिए संबंधित सरकारी कार्यालय में अलग से जाना पड़ता है, जिससे समय और प्रयास दोनों बर्बाद होते हैं।
यह बदलाव कब तक लागू होगा?
परिपत्र के अनुसार, संबंधित विभाग विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के साथ समन्वय कर आवश्यक तकनीकी संशोधन करेंगे। फिलहाल कोई निश्चित समय-सीमा घोषित नहीं की गई है; कार्यान्वयन विभागीय प्रक्रियाओं और पोर्टल अपग्रेड पूरे होने पर निर्भर है।
इस पहल से किन नागरिकों को सीधा फायदा होगा?
वे सभी नागरिक लाभान्वित होंगे जो जाति, निवास, आय, जन्म आदि से जुड़े प्रमाणपत्र ऑनलाइन प्राप्त कर नौकरियों, शैक्षणिक संस्थाओं या सरकारी योजनाओं में जमा करते हैं। मुहर की प्रक्रिया ऑनलाइन होने से आवेदन से प्रमाणपत्र के उपयोग तक की पूरी यात्रा डिजिटल हो जाएगी।
'डिजिटल गुजरात 2.0' क्या है और यह पहल उससे कैसे जुड़ी है?
'डिजिटल गुजरात 2.0' मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार का कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य 'डिजिटल-बाय-डिफॉल्ट' दृष्टिकोण अपनाकर प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और कागज़-रहित बनाना है। डिजिटल प्रमाणपत्रों पर मुहर की व्यवस्था इसी कार्यक्रम के तहत GPR और BPR प्रक्रियाओं का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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