गुजरात वक्फ बोर्ड का अल्टीमेटम: 26 मई तक उम्मीद पोर्टल पर पंजीकरण करें, वरना कानूनी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात राज्य वक्फ बोर्ड ने गांधीनगर से 20 मई 2026 को राज्य के सभी मुतवल्लियों (वक्फ प्रशासकों), न्यासियों, वक्फ संस्थानों और हितधारकों को 26 मई 2026 तक उम्मीद (एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास) पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण पूरा करने का निर्देश दिया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा कानूनी ढाँचे के अंतर्गत अब कोई अतिरिक्त छूट नहीं दी जाएगी।
उम्मीद पोर्टल क्या है और यह क्यों लाया गया
केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने पिछले वर्ष 6 जून को उम्मीद पोर्टल को एक राष्ट्रीय डिजिटल शासन मंच के रूप में लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य देशभर की वक्फ संपत्तियों के स्वामित्व, आय, दस्तावेज़ीकरण और प्रशासनिक अभिलेखों को एक केंद्रीकृत डेटाबेस में दर्ज करना है। अधिकारियों के अनुसार, यह पोर्टल वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता, जवाबदेही और कानूनी सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
गौरतलब है कि इससे पहले राज्य और स्थानीय स्तरों पर वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड-रखरखाव खंडित और असंगठित था, जिससे संपत्ति विवादों और प्रशासनिक अनियमितताओं की शिकायतें बढ़ रही थीं।
पोर्टल की प्रमुख कार्यक्षमताएँ
अधिकारियों के अनुसार, उम्मीद प्लेटफॉर्म वक्फ संपत्तियों के सत्यापन, जियो-टैगिंग, निगरानी और डिजिटल प्रबंधन के लिए एकीकृत प्रणाली के रूप में कार्य करता है। मंत्रालय ने पोर्टल पर सर्वेक्षण और पट्टा प्रबंधन सहित अतिरिक्त मॉड्यूल भी जोड़े हैं, जो संपत्ति दस्तावेज़ीकरण और प्रशासनिक निगरानी को और सुदृढ़ बनाते हैं।
गुजरात में अनुपालन की स्थिति
बोर्ड ने चिंता जताई कि राज्य में बड़ी संख्या में वक्फ संस्थाओं ने बार-बार सलाह दिए जाने के बावजूद अभी तक पंजीकरण पूरा नहीं किया है। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर अनुपालन समयसीमा पहले ही निर्धारित की जा चुकी है और उम्मीद अधिनियम के ढाँचे के तहत मौजूदा वक्फ संपत्ति विवरण अपलोड करने की अंतिम तिथि करीब आ रही है।
बोर्ड ने मुतवल्लियों, न्यासियों और प्रशासकों से आग्रह किया है कि वे सभी आवश्यक दस्तावेज़ बिना देरी अपलोड करें और अधूरे आवेदन जमा करने से बचें।
गैर-अनुपालन के परिणाम
गुजरात राज्य वक्फ बोर्ड ने स्पष्ट किया कि 26 मई 2026 तक पंजीकरण पूरा न करने वाले संस्थानों को प्रशासनिक और कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। बोर्ड ने यह भी कहा कि गैर-अनुपालन से उत्पन्न किसी भी परिणाम की जिम्मेदारी पूरी तरह संबंधित संस्था पर होगी।
तकनीकी और प्रक्रियात्मक सहायता के लिए बोर्ड ने एक समर्पित हेल्पलाइन भी सक्रिय की है, ताकि पंजीकरण प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके।
आगे की राह
बोर्ड के अनुसार, एक ही प्लेटफॉर्म पर डेटा का समेकन दीर्घकालिक रूप से अधिक कुशल प्रशासन को सक्षम बनाएगा और संपत्ति प्रबंधन में अनियमितताओं को कम करने में सहायक होगा। 26 मई 2026 की समयसीमा के बाद गुजरात में वक्फ प्रशासन का डिजिटल ढाँचा किस रूप में आकार लेता है, यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा।